Shri Radha-KrishnaKrishna Bhajan

कई जन्मों से बुला रहे हो, कोई तो नाता ज़रूर होगा (इन्द्रेश उपाध्याय) भजन लिरिक्स

Kai Janmo Se Bula Rahe Ho Lyrics (Indresh Upadhyay) Lyrics

Location: श्री धाम वृंदावन (Shri Dham Vrindavan)
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कई जन्मों से बुला रहे हो, कोई तो नाता ज़रूर होगा (इन्द्रेश उपाध्याय) भजन लिरिक्स

KAI JANMO SE BULA RAHE HO LYRICS INDRESH UPADHYAY

कई जन्मों से बुला रहे हो, कोई तो नाता ज़रूर होगा। कई जन्मों से बुला रहे हो, कोई तो रिश्ता ज़रूर होगा॥ नज़रों से नज़रें मिला ना पायी, मेरी नज़र का कसूर होगा। नज़रों से नज़रें मिला रहे हो, मेरी नज़र का कसूर होगा॥ कई जन्मों से बुला रहे हो, कोई तो नाता ज़रूर होगा॥ ॥ अंतरा 1 ॥ तुम ही तो मेरे माता पिता हो, तुम ही तो मेरे बंधु सखा हो। कितने रिश्ते तुम संग जोड़े, कोई तो नाता ज़रूर होगा॥ कई जन्मों से बुला रहे हो, कोई तो नाता ज़रूर होगा॥ ॥ अंतरा 2 ॥ तुम ही तो मेरी आत्मा हो, तुम ही तो मेरे परमात्मा हो। मुझमें रहकर मुझसे ही पर्दा, पर्दा हटाना ज़रूर होगा॥ कई जन्मों से बुला रहे हो, कोई तो नाता ज़रूर होगा॥ ॥ अंतरा 3 ॥ कभी बुलाते हो वृन्दावन में, कभी बुलाते हो निधिवन में। कभी बुलाते हो मधुवन में, अपने घर में रोज़ बुलाते, मेरे घर आना ज़रूर होगा॥ कई जन्मों से बुला रहे हो, कोई तो नाता ज़रूर होगा॥ ॥ अंतरा 4 (राधा-कृष्ण भाव) ॥ राधा रानी को कन्हैया बड़े प्यारो, मनमोहन मुरली वारो। श्यामा प्यारी को कन्हैया बड़े प्यारो, मनमोहन मुरली वारो॥ कई जन्मों से बुला रहे हो, कोई तो नाता ज़रूर होगा॥

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कई जन्मों से बुला रहे हो, कोई तो नाता ज़रूर होगा। कई जन्मों से बुला रहे हो, कोई तो रिश्ता ज़रूर होगा॥

नज़रों से नज़रें मिला ना पायी, मेरी नज़र का कसूर होगा। नज़रों से नज़रें मिला रहे हो, मेरी नज़र का कसूर होगा॥ कई जन्मों से बुला रहे हो, कोई तो नाता ज़रूर होगा॥

॥ अंतरा 1 ॥ तुम ही तो मेरे माता पिता हो, तुम ही तो मेरे बंधु सखा हो। कितने रिश्ते तुम संग जोड़े, कोई तो नाता ज़रूर होगा॥ कई जन्मों से बुला रहे हो, कोई तो नाता ज़रूर होगा॥

॥ अंतरा 2 ॥ तुम ही तो मेरी आत्मा हो, तुम ही तो मेरे परमात्मा हो। मुझमें रहकर मुझसे ही पर्दा, पर्दा हटाना ज़रूर होगा॥ कई जन्मों से बुला रहे हो, कोई तो नाता ज़रूर होगा॥

॥ अंतरा 3 ॥ कभी बुलाते हो वृन्दावन में, कभी बुलाते हो निधिवन में। कभी बुलाते हो मधुवन में, अपने घर में रोज़ बुलाते, मेरे घर आना ज़रूर होगा॥ कई जन्मों से बुला रहे हो, कोई तो नाता ज़रूर होगा॥

॥ अंतरा 4 (राधा-कृष्ण भाव) ॥ राधा रानी को कन्हैया बड़े प्यारो, मनमोहन मुरली वारो। श्यामा प्यारी को कन्हैया बड़े प्यारो, मनमोहन मुरली वारो॥ कई जन्मों से बुला रहे हो, कोई तो नाता ज़रूर होगा॥

कई जन्मों से बुला रहे हो, कोई तो नाता ज़रूर होगा (इन्द्रेश उपाध्याय) भजन लिरिक्स Video

अर्थ (Bhavarth)

परम श्रद्धेय युवा संत एवं कथावाचक श्री इन्द्रेश उपाध्याय (Indresh Upadhyay) जी की अत्यंत भावपूर्ण आवाज़ में गाया गया यह भजन "कई जन्मों से बुला रहे हो" एक भक्त और भगवान के बीच जन्म-जन्मांतर के रिश्ते को बहुत ही गहराई से दर्शाता है। इसमें ईश्वर से मिलने की तड़प, मीठी शिकायत और पूर्ण समर्पण का अद्भुत संगम है। यह भजन एक भक्त और भगवान के बीच जन्म-जन्मांतर के अटूट संबंध (नाते) और गहरी आत्मीयता को दर्शाता है। इसके अत्यंत गहरे आध्यात्मिक भावों को मुख्य रूप से तीन हिस्सों में समझा जा सकता है: 1. जन्म-जन्मांतर का प्रेम और स्वयं पर पछतावा: भक्त ईश्वर से कहता है कि "हे प्रभु! आप मुझे इस जन्म में नहीं, बल्कि कई जन्मों से अपनी ओर खींच (बुला) रहे हैं, हमारा ज़रूर कोई बहुत पुराना और गहरा रिश्ता है।" लेकिन भक्त अपनी ही कमियों को स्वीकार करते हुए कहता है कि "अगर मैं आपके दर्शन नहीं कर पा रहा या आपसे नज़रें नहीं मिला पा रहा हूँ, तो यह मेरी ही नज़रों (अज्ञानता) का कसूर है।" 2. सर्वस्व समर्पण और भीतर ही ईश्वर का वास: दूसरे अंतरे में भक्त अपने भगवान को ही अपना माता, पिता, बंधु (भाई) और सखा (मित्र) मान लेता है। वह एक बहुत ही गूढ़ (Deep) बात कहता है— "प्रभु, आप ही मेरी आत्मा हैं और आप ही परमात्मा हैं। आप मेरे ही भीतर बैठे हैं, लेकिन फिर भी इस 'माया' ने मेरे और आपके बीच एक पर्दा डाल रखा है। हे नाथ! अब तो आपको यह अज्ञानता का पर्दा हटाकर मुझे दर्शन देने ही होंगे।" 3. मिलन की ज़िद और मीठी शिकायत: यह भाग भक्त की भगवान से एक बहुत ही मीठी शिकायत है। भक्त प्रेम से ज़िद करते हुए कहता है कि "हे कन्हैया! आप मुझे रोज़ अपने घर (वृंदावन, निधिवन, मधुवन) बुलाते हो, लेकिन अब आपको भी कभी मेरे घर (मेरे हृदय में) आना ही होगा।" अंत में यह भजन राधा-कृष्ण के मधुर प्रेम भाव में विलीन हो जाता है, जहाँ श्यामा प्यारी और मनमोहन की सुंदरता का गुणगान किया गया है।

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Frequently Asked Questions

Q1: 'कई जन्मों से बुला रहे हो' भजन के मूल गायक कौन हैं?

यह अत्यंत भावपूर्ण और गहरा समर्पण भजन प्रसिद्ध युवा संत एवं कथावाचक श्री इन्द्रेश उपाध्याय (Indresh Upadhyay) जी द्वारा गाया गया है। इनकी कथाओं के दौरान गाए गए भजन बहुत लोकप्रिय हैं।

Q2: भजन में "मुझमें रहकर मुझसे ही पर्दा" पंक्ति का क्या आध्यात्मिक अर्थ है?

सनातन धर्म और वेदांत के अनुसार, ईश्वर (परमात्मा) मनुष्य के भीतर ही 'आत्मा' के रूप में निवास करते हैं। लेकिन मनुष्य के अहंकार, मोह-माया और अज्ञानता रूपी 'पर्दे' के कारण वह अपने ही भीतर बैठे ईश्वर को पहचान नहीं पाता। भक्त इसी पर्दे को हटाने की विनती कर रहा है।

Q3: "अपने घर में रोज़ बुलाते, मेरे घर आना ज़रूर होगा" का क्या भाव है?

यह भगवान के प्रति सखा-भाव (मित्रता) और प्रेम की ज़िद है। भक्त कहता है कि मैं तो आपके दर्शन के लिए रोज़ आपके धाम (वृंदावन/निधिवन) आता हूँ, लेकिन अब आपको भी मेरे घर (अर्थात मेरे हृदय में) हमेशा के लिए बसने आना ही होगा।

Categories: Krishna Bhajan

Deity: Shri Radha-Krishna

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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