लाल रसमातो खेले होरी (ब्रज होली सॉन्ग) लिरिक्स - गौरव कृष्ण गोस्वामी
Lal Rasmaato Khele Hori Lyrics - Gaurav Krishna Goswami Lyrics
॥ सवैया / दोहा ॥ बाजत ताल मृदंग सुरंग, उमंग भरी सखियन रस बोरी। साथ लिए पिचकारी हाथ, फिरें चहुँ ओर भर केसर कोरी॥ चन्द्र कला छिडकें रंग ऊपर, आपस माहि करें चित चोरी। श्री वृषभानु महीपति मंदिर, लाल लली मिली खेलत होरी॥
॥ स्थायी ॥ लाल रसमातो खेले होरी, लाल रसमातो, लाल मदमातो, हाँ लाल रसमातो खेले होरी। तो खेले होरी, तो खेले होरी।
हे री वो तो होरी के मिस आवे, अरी मेरी गलियन धूम मचावे। करे बरजोरी, हाँ करे बरजोरी, लाल रसमातो खेले होरी।
हे री वो तो केसर माट घुलावे, मेरे ऊपर भर-भर डारे। करे रस बोरी, हाँ करे रस बोरी, लाल रसमातो खेले होरी।
हे री वो तो ठाडो कदम की छैयां, मेरी पकड़ मरोड़ी बैयां, झटक लड़ तोड़ी, हाँ झटक लड़ तोड़ी, लाल रसमातो खेले होरी।
हे री वो तो चन्द्र सखी को प्यारो, हाँ रे जसोदा को है राज दुलारो, मटुकिया फोरी, मटुकिया फोरी, लाल रसमातो खेले होरी।

अर्थ (Bhavarth)
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Frequently Asked Questions
'लाल रसमातो खेले होरी' भजन किसने गाया है?
ब्रज के रस और प्रेम से सराबोर इस लेटेस्ट (2026) होली भजन को सुप्रसिद्ध कथावाचक और भजन गायक श्री गौरव कृष्ण गोस्वामी (Gaurav Krishna Goswami) जी ने अपनी मधुर आवाज़ में गाया है।
इस होली भजन का मुख्य भाव (Bhaav) क्या है?
इस भजन का मुख्य भाव ब्रज की वह पवित्र लीला है जहाँ 'लाल' (श्री कृष्ण) और 'लली' (श्री राधा रानी) दिव्य रंगों में डूबकर होली खेल रहे हैं। इसमें गोपियों के साथ कन्हैया की नटखट बरजोरी, मटकी फोड़ना और केसर के रंग बरसाने का सजीव चित्रण किया गया है।
भजन में 'चन्द्र सखी को प्यारो' का क्या अर्थ है?
'चन्द्र सखी' ब्रज की एक प्रसिद्ध संत कवयित्री थीं, जिन्होंने श्री कृष्ण भक्ति के अनेक पद रचे हैं। यहाँ उनके नाम की छाप (Signature) का उपयोग करते हुए बताया गया है कि यह रसिया 'चन्द्र सखी' का अत्यंत प्यारा और यशोदा मैया का राज दुलारा है
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Categories: Holi Rasiya, Phalgun Bhajan, Braj Ras
Deity: Shri Radha-Krishna
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मोहित तरकरMohit Tarkar
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