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ये तो छलिया बड़ो भारी, जासे मैया मैं हारी (तेजवीर सिंह) भजन लिरिक्स

Ye To Chhaliya Bado Bhari Lyrics (Tejveer Singh) Lyrics

Location: Sonkh, Magorra (Mathura)

तर्ज (Tune): राजस्थानी लोकगीत - नखरालो देवरियो

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ये तो छलिया बड़ो भारी, जासे मैया मैं हारी (तेजवीर सिंह) भजन लिरिक्स

YE TO CHHALIYA BADO BHARI LYRICS TEJVEER SINGH

ये तो छलिया बड़ो भारी, जासे मैया मैं हारी, मैं हारी, मैं हारी मैया, मैं हारी | एक दिना हम दधि बेचन को, गयी थी सखियाँ सारी | म्हारी मटकी फोड़ डारी, जासे मैया मैं हारी | लेके ग्वाल बाल ई मैया, गलियन गलियन डोले, कहा कमी है मैया हमारी, सीधे मुंह न बोले | तो ते बात बताऊं सारी, जासे मैया मैं हारी | ना है कमी दूध माखन की, फिर भी मांगत डोले, नौ लाख गाय नंदबाबा की, सारो जगत यूँ बोले | जाकी लीला है ये न्यारी, जासे मैया मैं हारी |

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HINDI BHAJAN

ये तो छलिया बड़ो भारी, जासे मैया मैं हारी, मैं हारी, मैं हारी मैया, मैं हारी |

एक दिना हम दधि बेचन को, गयी थी सखियाँ सारी | म्हारी मटकी फोड़ डारी, जासे मैया मैं हारी |

लेके ग्वाल बाल ई मैया, गलियन गलियन डोले, कहा कमी है मैया हमारी, सीधे मुंह न बोले | तो ते बात बताऊं सारी, जासे मैया मैं हारी |

ना है कमी दूध माखन की, फिर भी मांगत डोले, नौ लाख गाय नंदबाबा की, सारो जगत यूँ बोले | जाकी लीला है ये न्यारी, जासे मैया मैं हारी |

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अर्थ (Bhavarth)

गायक तेजवीर सिंह (Tejveer Singh) की आवाज़ में गाया गया यह एक अत्यंत ही नटखट और प्यारा ब्रज भजन है। प्रसिद्ध राजस्थानी गीत "नखरालो देवरियो" की तर्ज पर होने के कारण इस भजन में एक बहुत ही मनमोहक और थिरकने वाली लय (Rhythm) है। इसमें गोपियाँ मैया यशोदा से कन्हैया की शरारतों की मीठी शिकायत कर रही हैं। यह भजन ब्रज की उस मनमोहक लीला का वर्णन करता है जब गोपियाँ कन्हैया की रोज़-रोज़ की शरारतों से तंग आकर माता यशोदा के पास उलाहना (शिकायत) लेकर पहुँचती हैं। इसके भावार्थ को तीन मुख्य हिस्सों में समझा जा सकता है: 1. छलिया कन्हैया से हार मानना (Defeated by the Divine Trickster): गोपी मैया यशोदा से कहती है कि "हे मैया! तेरा यह लाला तो बहुत बड़ा छलिया (शरारती/धोखा देने वाला) है। मैं इसकी रोज़ की चालाकियों से पूरी तरह हार चुकी हूँ।" गोपी अपनी परेशानी बताते हुए कहती है कि एक दिन जब हम सभी सखियाँ मिलकर बाज़ार में दही (दधि) बेचने जा रही थीं, तो तुम्हारे कन्हैया ने बीच रास्ते में ही हमारी मटकी फोड़ दी। 2. ग्वाल-बालों के साथ हुड़दंग (Mischief in the Streets): गोपी आगे शिकायत करती है कि तेरा यह लाला अपने सभी ग्वाल-बाल दोस्तों की टोली बनाकर पूरे गोकुल की गलियों में आवारा घूमता (डोले) रहता है। हम इससे पूछती हैं कि अरे कन्हैया! बता तो सही, हममें या हमारे माखन में ऐसी क्या कमी है जो तू ऐसी शरारतें करता है? लेकिन यह तो हमसे सीधे मुँह बात भी नहीं करता। इसलिए हे मैया, आज मैं तुझे इसकी सारी बातें बताने आई हूँ। 3. नौ लाख गायों का मालिक और फिर भी माखन चोर (The Ultimate Irony): अंतिम भाग में गोपी भगवान की लीला पर एक बहुत ही प्यारा व्यंग्य कसते हुए कहती है कि "मैया, तुम्हारे घर में दूध-दही और माखन की कोई कमी थोड़ी है! पूरी दुनिया जानती है कि नंदबाबा के पास नौ लाख गायें हैं। फिर भी पता नहीं क्यों, तेरा यह कन्हैया दर-दर माखन मांगता (चुराता) फिरता है।" अंत में गोपी स्वयं ही मुस्कुराकर हार मान लेती है कि वास्तव में इस कन्हैया की लीला सबसे न्यारी और समझ से परे है।

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Frequently Asked Questions

Q1: 'ये तो छलिया बड़ो भारी' भजन किस राजस्थानी गीत की तर्ज पर आधारित है?

A1: तेज़वीर सिंह जी द्वारा गाया गया यह नटखट ब्रज भजन अत्यंत लोकप्रिय राजस्थानी लोकगीत "नखरालो देवरियो" (Nakhralo Devariyo) की थिरकने वाली तर्ज (धुन) पर आधारित है।

Q2: भजन में गोपियाँ मैया यशोदा से क्या शिकायत कर रही हैं?

A2: गोपियाँ शिकायत कर रही हैं कि कन्हैया ने उनका रास्ता रोककर दही की मटकी फोड़ दी है। वे हैरान हैं कि नंदबाबा के घर में नौ लाख गायें होने के बावजूद, कन्हैया पूरे गाँव की गलियों में माखन क्यों चुराता फिरता है।

Q3: "जाकी लीला है ये न्यारी" पंक्ति का क्या आध्यात्मिक अर्थ है?

A3: गोपी अंततः यह समझ जाती है कि कन्हैया कोई साधारण बालक नहीं है। माखन चुराना या मटकी फोड़ना उसकी केवल एक 'दिव्य लीला' है, जिसके बहाने वह अपने भक्तों (गोपियों) के साथ समय बिताता है और उन्हें आनंद प्रदान करता है।

Categories: Braj Ras, Krishna Bhajan

Deity: Shri Krishna

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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