प्रेम नगर मत जा मुसाफिर (चेतावनी भजन) लिरिक्स - श्री इन्द्रेश उपाध्याय
Prem Nagar Mat Ja Musafir Lyrics - Shri Indresh Upadhyay Lyrics
तर्ज (Tune): हुस्न पहाड़ों का (Husn Pahadon Ka - Bollywood Tarz)
॥ दोहा ॥ ऊधौ सूधौ है चलो, सुन गोपिन के बोल। ज्ञान बजाई डुमडुमी, प्रेम बजायो ढोल॥
॥ स्थायी ॥ प्रेम नगर मत जा मुसाफिर, प्रेम नगर मत जा।
प्रेम नगर की संकरी हैं गलियाँ, ता में दो न समाय। मुसाफिर, प्रेम नगर मत जा।
प्रेम नगर की गहरी है नदिया, लाखों लोग डुबाय। मुसाफिर, प्रेम नगर मत जा।
प्रेम नगर का पंथ कठिन है, ता पे ना चल पाय। मुसाफिर, प्रेम नगर मत जा।
प्रेम नगर की सुंदर हैं परियाँ, लाखों लोग लुभाय। मुसाफिर, प्रेम नगर मत जा।

अर्थ (Bhavarth)
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Frequently Asked Questions
'प्रेम नगर मत जा मुसाफिर' भजन का वास्तविक भावार्थ (Meaning) क्या है?
पूज्य श्री इन्द्रेश उपाध्याय जी के अनुसार, इस भजन में 'प्रेम नगर' श्री वृंदावन धाम को कहा गया है। यह चेतावनी है कि यदि कोई मुसाफिर (यात्री) वृंदावन के प्रेम रस में डूब गया, तो वह वापस सांसारिक मोह-माया में नहीं लौट पाएगा, क्योंकि हृदय की संकरी गली में केवल श्री कृष्ण ही समा सकते हैं, संसार नहीं।
भजन में प्रेम नगर की 'सुंदर परियाँ' किन्हें कहा गया है?
भजन में 'परियां' कोई अप्सराएं नहीं हैं। इसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ ब्रज के 'रसिक संतों' (जैसे पूज्य प्रेमानंद जी महाराज और राजेंद्र दास जी) से है, जो अपने मधुर भजनों और सत्संग से भक्तों का मन मोह लेते हैं और उन्हें श्री कृष्ण की ओर खींच लेते हैं।
इस प्रसिद्ध चेतावनी भजन के मूल रचयिता कौन हैं?
इस सुप्रसिद्ध और गहरे अर्थों वाले चेतावनी भजन की रचना महान संत कवि 'ब्रह्मानंद जी' द्वारा की गई थी।
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Categories: Chetawani Bhajan, Krishna Bhajan, Braj Ras, Filmi Tarz Bhajan
Deity: Shri Krishna
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मोहित तरकरMohit Tarkar
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