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मेरा गोपाल गिरधारी, ज़माने से निराला है (कृष्ण भजन) लिरिक्स

Mera Gopal Giridhari Zamane Se Nirala Hai Lyrics Lyrics

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मेरा गोपाल गिरधारी, ज़माने से निराला है (कृष्ण भजन) लिरिक्स

MERA GOPAL GIRIDHARI ZAMANE SE NIRALA HAI LYRICS

मेरा गोपाल गिरधारी, ज़माने से निराला है। रंगीला है, रसीला है, ना गोरा है, ना काला है॥ कभी सपनों में आ जाना, कभी रूपोश हो जाना, ये तरसाने का मोहन ने निराला ढंग निकाला है॥ कभी वो रूठ जाता है, कभी वो मुस्कुराता है, इसी दर्शन की खातिर तो बड़े नाज़ों से पाला है॥ मज़े से दिल में आ बैठो, मेरे नैनों में बस जाओ, अरे गोपाल मंदिर ये तुम्हारा देखा-भाला है॥ कहीं ओखल में बंध जाना, कहीं ग्वालों के संग आना, तुम्हारी बाल-लीला ने अजब धोखे में डाला है॥ मेरा गोपाल गिरधारी, ज़माने से निराला है। रंगीला है, रसीला है, ना गोरा है, ना काला है॥

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HINDI BHAJAN

मेरा गोपाल गिरधारी, ज़माने से निराला है। रंगीला है, रसीला है, ना गोरा है, ना काला है॥

कभी सपनों में आ जाना, कभी रूपोश हो जाना, ये तरसाने का मोहन ने निराला ढंग निकाला है॥

कभी वो रूठ जाता है, कभी वो मुस्कुराता है, इसी दर्शन की खातिर तो बड़े नाज़ों से पाला है॥

मज़े से दिल में आ बैठो, मेरे नैनों में बस जाओ, अरे गोपाल मंदिर ये तुम्हारा देखा-भाला है॥

कहीं ओखल में बंध जाना, कहीं ग्वालों के संग आना, तुम्हारी बाल-लीला ने अजब धोखे में डाला है॥

मेरा गोपाल गिरधारी, ज़माने से निराला है। रंगीला है, रसीला है, ना गोरा है, ना काला है॥

मेरा गोपाल गिरधारी, ज़माने से निराला है (कृष्ण भजन) लिरिक्स Video

अर्थ (Bhavarth)

भगवान श्री कृष्ण की बाल-लीलाओं और उनके नटखट स्वरूप का वर्णन करने वाला यह भजन "मेरा गोपाल गिरधारी, ज़माने से निराला है" अत्यंत ही मधुर और प्रेम-रस से भरा है। इसमें एक भक्त (विशेषकर वात्सल्य भाव रखने वाले) और भगवान के बीच का वह मीठा सा रिश्ता झलकता है, जहाँ भगवान कभी रूठते हैं तो कभी मनाते हैं। यह भजन भगवान श्री कृष्ण के 'बाल स्वरूप' (Childhood Form) और उनकी मनमोहक छवि का एक बहुत ही सुंदर गान है। इसे तीन मुख्य भावों में समझा जा सकता है: 1. अद्वितीय छवि और नटखटपन: भक्त लाड़ लड़ाते हुए कहता है कि मेरा गोवर्धन उठाने वाला गोपाल (गिरधारी) इस पूरी दुनिया में सबसे अलग और अनोखा (निराला) है। उसका रंग ऐसा है जिसे शब्दों में नहीं बांधा जा सकता—वह न तो पूरी तरह गोरा है और न ही बिल्कुल काला (सांवला-सलोना)। वह बहुत ही रंगीला और प्रेम-रस से भरा हुआ है। मोहन ने अपने भक्तों को सताने और तरसाने का एक अजीब ही तरीका निकाल लिया है—वह कभी तो सपनों में आकर दर्शन दे जाता है और फिर अचानक आँखों से ओझल (रूपोश) हो जाता है। 2. वात्सल्य प्रेम और हृदय रूपी मंदिर: भजन में यशोदा मैया और भक्तों का वात्सल्य प्रेम झलकता है। भक्त कहता है कि मेरा कन्हैया कभी रूठ जाता है तो कभी प्यारी सी मुस्कान दे देता है। हमने उसे इसी दर्शन और मुस्कुराहट के लिए बड़े ही नाज़ (लाड़-प्यार) से पाला है। भक्त श्री कृष्ण से आग्रह करता है कि "हे गोपाल! तुम मजे से मेरे हृदय में आकर बैठ जाओ और मेरी आँखों में बस जाओ, क्योंकि मेरे मन का यह 'मंदिर' तुम्हारा ही घर है और तुम्हारा भली-भांति देखा-भाला हुआ है।" 3. मनमोहक बाल-लीलाएं: अंतिम भाग में कृष्ण की उन प्रसिद्ध बाल-लीलाओं का ज़िक्र है, जिन्होंने बड़े-बड़े ज्ञानियों को भी भ्रम में डाल दिया। जो भगवान पूरे ब्रह्मांड का स्वामी है, वह कभी एक छोटी सी 'ओखली' (Okhla) से बंध जाता है (दामोदर लीला), तो कभी साधारण ग्वालों के साथ धूल में खेलता नज़र आता है। भगवान की इन्ही मासूम बाल-लीलाओं ने दुनिया को एक अजीब से मीठे धोखे (आश्चर्य) में डाल रखा है।

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Frequently Asked Questions

Q1: "रूपोश हो जाना" का क्या अर्थ है?

'रूपोश' (Rooposh) एक उर्दू शब्द है जिसका अर्थ है 'छिप जाना' या 'आँखों से ओझल हो जाना'। यहाँ भक्त कह रहा है कि भगवान कृष्ण कभी सपनों में दर्शन देते हैं और फिर अचानक छिप जाते हैं, जिससे भक्त दर्शनों के लिए और ज़्यादा तरसता है।

Q2: भजन में "कहीं ओखल में बंध जाना" का संबंध किस लीला से है?

यह पंक्ति भगवान श्री कृष्ण की प्रसिद्ध 'दामोदर लीला' से संबंधित है। जब बाल-कृष्ण ने माखन चुराकर मटकी फोड़ दी थी, तो मैया यशोदा ने उन्हें सज़ा देने के लिए एक लकड़ी की ओखली (ओखल) से बांध दिया था।

Q3: "अरे गोपाल मंदिर ये तुम्हारा देखा-भाला है" का आध्यात्मिक भाव क्या है?

इसका आध्यात्मिक भाव यह है कि भक्त भगवान को अपने हृदय (मन) में बसने का निमंत्रण दे रहा है। भक्त कहता है कि मेरे हृदय रूपी मंदिर में आ जाओ, क्योंकि ईश्वर के लिए भक्त का हृदय ही उनका सबसे पुराना और जाना-पहचाना (देखा-भाला) घर होता है।

Categories: Braj Ras, Krishna Bhajan

Deity: Shri Krishna

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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