Shri KrishnaKrishna Bhajan

मुझे ला दो भजन वाली वही माला, जा के रटने से मिल जाए नन्दलाला (भजन) लिरिक्स

Mujhe La Do Bhajan Wali Wahi Mala Lyrics Lyrics

HINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARI

मुझे ला दो भजन वाली वही माला, जा के रटने से मिल जाए नन्दलाला (भजन) लिरिक्स

MUJHE LA DO BHAJAN WALI WAHI MALA LYRICS

॥ मुखड़ा ॥ मुझे ला दो भजन वाली वही माला, जा के रटने से मिल जाए नन्दलाला॥ ॥ अंतरा 1 ॥ जो माला माँ यशोदा ने फेरी, जो माला माँ यशोदा ने फेरी, देखो लीला दिखा गए नन्दलाला। मोहे ला दो भजन वाली वही माला, जा के रटने से मिल जाए नन्दलाला॥ ॥ अंतरा 2 ॥ जो माला मैया गौरा ने फेरी, जो माला मैया गौरा ने फेरी, उन्हें मिल गए वो डमरू वाला। मोहे ला दो भजन वाली वही माला, जा के रटने से मिल जाए नन्दलाला॥ ॥ अंतरा 3 ॥ जो माला द्रोपदी ने फेरी, जो माला द्रोपदी ने फेरी, देखो चीर बढ़ा गए गोपाला। मोहे ला दो भजन वाली वही माला, जा के रटने से मिल जाए नन्दलाला॥ ॥ अंतरा 4 ॥ जो माला माता शबरी ने फेरी, जो माला माता शबरी ने फेरी, झूठे बेरो को खा गए राम लाला। मोहे ला दो भजन वाली वही माला, जा के रटने से मिल जाए नन्दलाला॥ ॥ अंतरा 5 ॥ जो माला हनुमान जी ने फेरी, जो माला हनुमान जी ने फेरी, देखो लंका को पल में जला डाला। मोहे ला दो भजन वाली वही माला, जा के रटने से मिल जाए नन्दलाला॥ ॥ समापन ॥ मुझे ला दो भजन वाली वही माला, जा के रटने से मिल जाए नन्दलाला॥

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॥ मुखड़ा ॥ मुझे ला दो भजन वाली वही माला, जा के रटने से मिल जाए नन्दलाला॥

॥ अंतरा 1 ॥ जो माला माँ यशोदा ने फेरी, जो माला माँ यशोदा ने फेरी, देखो लीला दिखा गए नन्दलाला। मोहे ला दो भजन वाली वही माला, जा के रटने से मिल जाए नन्दलाला॥

॥ अंतरा 2 ॥ जो माला मैया गौरा ने फेरी, जो माला मैया गौरा ने फेरी, उन्हें मिल गए वो डमरू वाला। मोहे ला दो भजन वाली वही माला, जा के रटने से मिल जाए नन्दलाला॥

॥ अंतरा 3 ॥ जो माला द्रोपदी ने फेरी, जो माला द्रोपदी ने फेरी, देखो चीर बढ़ा गए गोपाला। मोहे ला दो भजन वाली वही माला, जा के रटने से मिल जाए नन्दलाला॥

॥ अंतरा 4 ॥ जो माला माता शबरी ने फेरी, जो माला माता शबरी ने फेरी, झूठे बेरो को खा गए राम लाला। मोहे ला दो भजन वाली वही माला, जा के रटने से मिल जाए नन्दलाला॥

॥ अंतरा 5 ॥ जो माला हनुमान जी ने फेरी, जो माला हनुमान जी ने फेरी, देखो लंका को पल में जला डाला। मोहे ला दो भजन वाली वही माला, जा के रटने से मिल जाए नन्दलाला॥

॥ समापन ॥ मुझे ला दो भजन वाली वही माला, जा के रटने से मिल जाए नन्दलाला॥

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अर्थ (Bhavarth)

Gemini said भगवान के नाम-जप (नाम स्मरण) की महिमा को दर्शाता हुआ यह एक अत्यंत ही प्यारा और सिद्ध कीर्तन है। "मुझे ला दो भजन वाली वही माला" भजन में यह बताया गया है कि कैसे केवल भगवान का नाम जपने से ही युगों-युगों से भक्तों ने अपने इष्ट देव को प्राप्त किया है। यह महिला कीर्तन मंडलियों (Satsang) में बहुत ही चाव से गाया जाता है। यह भजन 'नाम-जप' (ईश्वर का निरंतर स्मरण करने) की असीम शक्ति का एक अत्यंत ही सुंदर और पौराणिक प्रमाण है। इसमें 'माला' केवल मोतियों की नहीं, बल्कि 'भक्ति और विश्वास' की माला है। इसके गहरे भावों को तीन मुख्य हिस्सों में समझा जा सकता है: 1. परम नाम की चाह (The Desire for the Divine Name): भक्त ईश्वर से प्रार्थना करता है कि "हे प्रभु! मुझे केवल सांसारिक मोतियों की माला नहीं चाहिए, मुझे तो 'भजन वाली वह माला' (वह नाम और सच्ची भक्ति) ला दो, जिसे दिन-रात रटने (जपने) से मुझे साक्षात मेरे नन्दलाल (श्री कृष्ण) की प्राप्ति हो जाए।" 2. मातृ-प्रेम और सतीत्व की जीत (Examples of Divine Grace): भक्त इतिहास के महान उदाहरण देते हुए कहता है कि जब मैया यशोदा ने वात्सल्य भाव से उस नाम की माला फेरी, तो स्वयं परब्रह्म उनके आँगन में बालक बनकर लीलाएं करने लगे। जब माता पार्वती (गौरा) ने कठोर तपस्या करके शिव नाम की माला फेरी, तो उन्हें साक्षात 'डमरू वाले' (महादेव) पति रूप में प्राप्त हुए। जब भरी सभा में द्रौपदी ने संकट के समय 'गोविंद' नाम की माला जपी, तो भगवान ने आकर उनका चीर (साड़ी) बढ़ाकर उनकी लाज बचा ली। 3. भक्ति की पराकाष्ठा (The Pinnacle of Devotion): अंतिम भाग में भगवान राम के भक्तों का सुंदर वर्णन है। जब माता शबरी ने वर्षों तक राम-नाम की माला फेरी, तो स्वयं भगवान उनके आश्रम में आए और प्रेम से उनके जूठे बेर भी खा लिए। और जब वीर हनुमान जी ने अपने हृदय में 'राम' नाम की माला फेरी, तो उसी नाम की शक्ति से उन्होंने पल भर में रावण की सोने की लंका को जलाकर भस्म कर दिया। यह दर्शाता है कि भगवान के नाम में असंभव को संभव करने की शक्ति है।

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Frequently Asked Questions

Q1: इस भजन में "भजन वाली माला" का क्या आध्यात्मिक अर्थ है?

यहाँ 'भजन वाली माला' का अर्थ केवल तुलसी या रुद्राक्ष के मोतियों से नहीं है। इसका आध्यात्मिक अर्थ है— ईश्वर के नाम का निरंतर 'स्मरण' (Naam Jaap) और हृदय में सच्ची भक्ति का होना, जिसे जपने से साक्षात भगवान की प्राप्ति हो जाती है।

Q2: द्रौपदी और शबरी के प्रसंग में माला जपने का क्या फल मिला?

भजन के अनुसार, जब द्रौपदी ने संकट में कृष्ण नाम की माला फेरी, तो भगवान ने उनकी साड़ी (चीर) बढ़ाकर उनकी लाज बचाई। वहीं, जब माता शबरी ने प्रेम से राम-नाम जपा, तो साक्षात भगवान राम ने आकर उनके जूठे बेर खाए।

Q3: यह भजन मुख्य रूप से किस अवसर पर गाया जाता है?

यह भजन बहुत ही सरल और लयबद्ध है, इसलिए इसे मुख्य रूप से महिलाओं की कीर्तन मंडलियों (सत्संग), एकादशी के जागरण और सुबह की पूजा (Morning Prayers) के दौरान ढोलक की ताल पर बहुत आनंद से गाया जाता है।

Categories: Krishna Bhajan

Deity: Shri Krishna

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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