ऊधो जब टेढ़े दिन आवैं (सूरदास जी का पद) लिरिक्स
Udho Jab Tedhe Din Aavain Lyrics - Indresh Upadhyay Lyrics
तर्ज (Tune): राग आधारित / पारंपरिक सूरदास पद (Raag Based / Traditional Surdas Pad)
ऊधो जब टेढ़े दिन आवैं (सूरदास जी का पद) लिरिक्स
UDHO JAB TEDHE DIN AAVAIN LYRICS INDRESH UPADHYAY
ऊधो! जब टेढ़े दिन आवैं, जब टेढ़े दिन आवैं। टेढ़ी-मेढ़ी बनी कूबरी, वाको हरि लपिटावैं। चंद्रवदन सी सुघड़ राधिका, वाको योग सिखावैं। ऊधो! जब टेढ़े दिन आवैं॥ ऊँचे-नीचे बैन कहत हैं, धिक बैठे बेलबावैं। मांगे कतौ कछु नहिं देवैं, नाहक दोष लगावैं। ऊधो! जब टेढ़े दिन आवैं॥ इष्ट-मित्र मुखहू नहिं बोलैं, देखत नैन चुरावैं। सोना छुवत होत माटी, जब मूरख ज्ञान सिखावैं। ऊधो! जब टेढ़े दिन आवैं॥ आपन-आपन भाग सखीरी, काको दोष लगावैं। सूरदास बिधना के आखर, छिनु भरि टरि न पावैं। ऊधो! जब टेढ़े दिन आवैं॥

अर्थ (Bhavarth)
FAQs
Q1: 'ऊधो जब टेढ़े दिन आवैं' पद के रचयिता कौन हैं?
A1: इस अत्यंत भावपूर्ण और प्रसिद्ध पद की रचना अष्टछाप के सर्वश्रेष्ठ भक्त कवि महाकवि सूरदास जी (Mahakavi Surdas) द्वारा की गई है।
Q2: यह पद रामायण या भागवत के किस प्रसंग से लिया गया है?
A2: यह पद श्रीमद्भागवत महापुराण के सुप्रसिद्ध 'उद्धव-गोपी संवाद' (जिसे भ्रमर गीत भी कहा जाता है) प्रसंग पर आधारित है।
Q3: गोपियों ने 'टेढ़े दिन' (बुरे दिन) का क्या उदाहरण दिया?
A3: गोपियों ने व्यंग्य करते हुए कहा कि बुरे दिनों का इससे बड़ा उदाहरण क्या होगा कि मथुरा में श्री कृष्ण ने दासी 'कुब्जा' को गले लगा लिया और परम सुंदरी श्री राधिका जी को योग (वैराग्य) का संदेश भिजवा दिया।
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Categories: Braj Ras, Krishna Bhajan, Pad
Deity: Shri Krishna
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