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गोवर्धन गिरधारी जी, सुध लेना हमारी (साध्वी पूर्णिमा) भजन लिरिक्स

Govardhan Giridhari Ji Sudh Lena Hamari Lyrics (Sadhvi Purnima) Lyrics

Location: श्री धाम वृन्दावन
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गोवर्धन गिरधारी जी, सुध लेना हमारी (साध्वी पूर्णिमा) भजन लिरिक्स

GOVARDHAN GIRIDHARI JI SUDH LENA HAMARI LYRICS SADHVI PURNIMA

गोवर्धन गिरधारी जी, सुध लेना हमारी, लेना हमारी सुध, लेना हमारी। आए शरण तिहारी जी, सुध लेना हमारी॥ मोर मुकुट पीताम्बर सोहे, मोर मुकुट पीताम्बर सोहे, कुंडल की छवि न्यारी जी, सुध लेना हमारी। गोवर्धन गिरधारी जी॥ तुम बिन हमरी कौन खबर ले, तुम बिन हमरी कौन खबर ले, मेरे बाँके बिहारी जी, सुध लेना हमारी। गोवर्धन गिरधारी जी॥ भरी सभा में द्रौपदी पुकारे, भरी सभा में द्रौपदी पुकारे, आ रखना लाज हमारी जी, सुध लेना हमारी। गोवर्धन गिरधारी जी॥ मीरा के प्रभु गिरधर नागर, मीरा के प्रभु गिरधर नागर, संतन के हितकारी जी, गोवर्धन गिरधारी जी॥ गोवर्धन गिरधारी जी, सुध लेना हमारी, लेना हमारी सुध, लेना हमारी। आए शरण तिहारी जी, सुध लेना हमारी, गोवर्धन गिरधारी जी॥

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गोवर्धन गिरधारी जी, सुध लेना हमारी, लेना हमारी सुध, लेना हमारी। आए शरण तिहारी जी, सुध लेना हमारी॥

मोर मुकुट पीताम्बर सोहे, मोर मुकुट पीताम्बर सोहे, कुंडल की छवि न्यारी जी, सुध लेना हमारी। गोवर्धन गिरधारी जी॥

तुम बिन हमरी कौन खबर ले, तुम बिन हमरी कौन खबर ले, मेरे बाँके बिहारी जी, सुध लेना हमारी। गोवर्धन गिरधारी जी॥

भरी सभा में द्रौपदी पुकारे, भरी सभा में द्रौपदी पुकारे, आ रखना लाज हमारी जी, सुध लेना हमारी। गोवर्धन गिरधारी जी॥

मीरा के प्रभु गिरधर नागर, मीरा के प्रभु गिरधर नागर, संतन के हितकारी जी, गोवर्धन गिरधारी जी॥

गोवर्धन गिरधारी जी, सुध लेना हमारी, लेना हमारी सुध, लेना हमारी। आए शरण तिहारी जी, सुध लेना हमारी, गोवर्धन गिरधारी जी॥

गोवर्धन गिरधारी जी, सुध लेना हमारी (साध्वी पूर्णिमा) भजन लिरिक्स Video

अर्थ (Bhavarth)

परम श्रद्धेय साध्वी पूर्णिमा जी (पूनम दीदी) की अत्यंत ही दर्द भरी और करुणा से युक्त आवाज़ में गाया गया यह ब्रज भजन "गोवर्धन गिरधारी जी, सुध लेना हमारी" पूर्ण शरणागति (Surrender) का एक बहुत ही सुंदर उदाहरण है। जब भक्त दुनिया से निराश हो जाता है, तब वह अपने 'बाँके बिहारी' से ही अपनी सुध लेने (ध्यान रखने) की प्रार्थना करता है। यह भजन भक्त की दीनता और भगवान श्री कृष्ण (गिरधारी) की असीम करुणा का एक बहुत ही मधुर संवाद है। भक्त दुनिया के सब सहारे छोड़कर भगवान से अपनी 'सुध' (खबर/परवाह) लेने की प्रार्थना कर रहा है। इसके भावों को तीन मुख्य हिस्सों में समझा जा सकता है: 1. पूर्ण शरणागति और 'सुध' लेने की पुकार: भजन की शुरुआत में ही भक्त अपने इष्ट, गोवर्धन पर्वत को धारण करने वाले श्री कृष्ण (गिरधारी) को पुकारते हुए कहता है कि "हे प्रभु! अब तुम ही मेरी सुध (खबर) लो, क्योंकि मैं अपनी सारी उम्मीदें छोड़कर तुम्हारी शरण (आश्रय) में आ गया हूँ।" भक्त कहता है कि इस स्वार्थी दुनिया में तुम्हारे सिवा (तुम बिन) मेरा कोई नहीं है जो मेरे सुख-दुख की खबर ले सके; केवल तुम ही मेरे सच्चे 'बाँके बिहारी' हो। 2. श्री कृष्ण का अलौकिक और मनमोहक स्वरूप: पुकार के साथ-साथ भक्त भगवान के उस मनमोहक रूप का ध्यान (Dhyana) करता है, जो उन्हें सबसे अधिक प्रिय है। वह कहता है कि मेरे प्रभु के शीश पर मोर मुकुट सुशोभित है, उनके शरीर पर पीताम्बर (पीले वस्त्र) सज रहे हैं, और उनके कानों में झूलते हुए कुंडल की छवि (सुंदरता) इस पूरी दुनिया में सबसे न्यारी और अद्भुत है। 3. द्रौपदी और मीरा के प्रसंग से प्रभु की महिमा: भक्त अपना विश्वास पक्का करने के लिए इतिहास के उन महान उदाहरणों का स्मरण करता है जब भगवान ने अपने भक्तों की सुध ली थी। वह कहता है कि जब दुशासन ने भरी सभा में द्रौपदी का चीरहरण करना चाहा, तब तुम्हारे ही नाम ने आकर उनकी लाज (सम्मान) बचाई थी। तुम ही मीराबाई के 'गिरधर नागर' हो और हमेशा संतों का हित (भला) करने वाले 'हितकारी' हो। इसलिए, जैसे तुमने उनकी सुध ली, वैसे ही मेरी भी सुध लो।

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Frequently Asked Questions

Q1: 'गोवर्धन गिरधारी जी, सुध लेना हमारी' भजन की मुख्य गायिका कौन हैं?

यह अत्यंत भावपूर्ण और करुणा से भरा कृष्ण भजन परम श्रद्धेय साध्वी पूर्णिमा जी (जिन्हें भक्त प्रेम से पूनम दीदी भी कहते हैं) द्वारा गाया गया है।

Q2: भजन में प्रयुक्त "सुध लेना" का क्या अर्थ है?

'सुध लेना' एक बहुत ही प्यारा ब्रज/हिंदी मुहावरा है, जिसका अर्थ है किसी की 'खबर लेना', 'ध्यान रखना' या 'परवाह करना'। भक्त भगवान से कह रहा है कि दुनिया ने मुझे भुला दिया है, अब आप ही मेरी रक्षा और देखभाल करें।

Q3: "मीरा के प्रभु गिरधर नागर" पंक्ति क्या दर्शाती है?

यह पंक्ति दर्शाती है कि भगवान श्री कृष्ण ही परम भक्त मीराबाई के सर्वस्व (गिरधर नागर) थे। जो भगवान मीराबाई जैसे संतों का हमेशा हित (भला) करते हैं, भक्त उन्हीं भगवान से अपनी रक्षा की प्रार्थना कर रहा है।

Categories: Krishna Bhajan, Braj Ras

Deity: Shri Krishna

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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