श्याम जैसा नगीना नहीं सारे जग की बजरिया में (कृष्ण भजन) लिरिक्स
Shyam Jaisa Nagina Nahi Saare Jag Ki Bajariya Mein Lyrics Lyrics
श्याम जैसा नगीना नहीं, सारे जग की बजरिया में | नीलमणि ही जडाऊँगी, अपने मन की मुंदरिया में |
श्याम का नाम प्यारा लगे, रसना पे बिठाऊंगी मैं, मृदु मूरत बसाउंगी, नैनों की उतरिया में |
हैं झूठे सभी रिश्ते, और झूठे सभी नाते, दूजा रंग न चढाऊंगी, अपनी श्यामल चदरिया में |
जल्दी से जतन करके, कान्हा को रिझाना है, कुछ दिन ही तो रहना है, काया की कुठरिया में |

अर्थ (Bhavarth)
Read the most authentic and complete Shyam Jaisa Nagina Nahi Saare Jag Ki Bajariya Mein Lyrics (श्याम जैसा नगीना नहीं सारे जग की बजरिया में (कृष्ण भजन) लिरिक्स) lyrics. Popularized by Chitra Vichitra Ji Maharaj, this divine krishna bhajan dedicated to Shri Krishna is presented in pristine Devanagari and English (Romanized) scripts. Using our advanced transliteration tool, you can instantly convert these lyrics into 8+ Indian languages including Gujarati, Bengali, Kannada, and Telugu. Scroll up to read the complete Bhavarth (meaning) to deeply understand the spiritual essence of this composition. You can also use the free PDF download feature to save these lyrics for your daily offline Puja, Aarti, and Satsang.
यहाँ आप श्याम जैसा नगीना नहीं सारे जग की बजरिया में (कृष्ण भजन) लिरिक्स के संपूर्ण और शुद्ध पाठ का आनंद ले सकते हैं। हमारी वेबसाइट पर आप इस कृष्ण भजन को हिंदी और अंग्रेजी के साथ-साथ गुजराती, बंगाली और अन्य 6 भारतीय भाषाओं में पढ़ सकते हैं।इस रचना के आध्यात्मिक रहस्य को समझने के लिए आप ऊपर इसका 'भावार्थ' (अर्थ) भी पढ़ सकते हैं। दैनिक पूजा और सत्संग के लिए आप इसका PDF (पीडीएफ) मुफ्त में डाउनलोड कर सकते हैं।
Frequently Asked Questions
Q1: 'श्याम जैसा नगीना नहीं' भजन के मूल गायक कौन हैं?
A1: यह अत्यंत मधुर और वैराग्य से भरा भजन परम श्रद्धेय रसिक संत बाबा श्री चित्र विचित्र बिहारी दास जी महाराज द्वारा गाया गया है। इनकी आवाज़ में यह भजन श्रोताओं को बहुत भावुक कर देता है।
Q2: भजन में प्रयुक्त शब्द "काया की कुठरिया" का क्या आध्यात्मिक अर्थ है?
A2: 'काया' का अर्थ है शरीर और 'कुठरिया' का अर्थ है छोटी सी कोठरी या कमरा। इसका आध्यात्मिक अर्थ यह है कि मनुष्य का शरीर एक अस्थायी (Temporary) घर है जिसमें आत्मा केवल कुछ समय (एक जीवनकाल) के लिए ही रहती है। इसलिए इस छोटे से जीवन में ईश्वर की भक्ति कर लेनी चाहिए।
Q3: "नीलमणि ही जडाऊँगी" पंक्ति में 'नीलमणि' किसे कहा गया है?
A3: यहाँ 'नीलमणि' (नीले रंग का बहुमूल्य रत्न) साक्षात् भगवान श्री कृष्ण को कहा गया है, क्योंकि उनका स्वरूप श्यामल (नीला/सांवला) है और वे संसार के सबसे अनमोल रत्न हैं।
Categories: Krishna Bhajan, Braj Ras
Deity: Shri Krishna
Community Comments (0)
Be the first to share your devotion here.

मोहित तरकरMohit Tarkar
संस्थापक एवं मुख्य संपादक • Founder & Chief Editor
धार्मिक सटीकता और भाषाई शुद्धता के लिए प्रमाणित। प्रामाणिक सनातन धर्म साहित्य के संरक्षण के लिए समर्पित।
Fact-checked for religious accuracy and linguistic purity. Dedicated to preserving authentic Sanatan Dharma literature.