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अवध की धूल चंदन है (एक सूर्य है, एक चंद्रमा) अयोध्या भजन लिरिक्स

Awadh Ki Dhool Chandan Hai (Ek Surya Hai Ek Chandrama) Lyrics

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अवध की धूल चंदन है (एक सूर्य है, एक चंद्रमा) अयोध्या भजन लिरिक्स

AWADH KI DHOOL CHANDAN HAI EK SURYA HAI EK CHANDRAMA LYRICS

एक अयोध्या धाम। कोटि तीर्थ से पावन वह रज, जहाँ हुए हैं राम, जहाँ हुए हैं राम॥ अवध की धूल चंदन है यह तुलसीदास कहते हैं, अवध की धूल चंदन है यह तुलसीदास कहते हैं। वहीं हमको भी रहना है, वहीं हमको भी रहना है, जहाँ श्रीराम रहते हैं, हमारे राम रहते हैं। अवध की धूल चंदन है यह तुलसीदास कहते हैं॥ अवधपुरी का महिमा-मंडन कहाँ हमारे बस का, हाँ, अवधपुरी का महिमा-मंडन कहाँ हमारे बस का। इस नगरी का कण-कण साक्षी रामचरितमानस का। यहीं हनुमान ने सीना चीर दिखाई राघव की तस्वीर, भरत जी यहीं खड़ाऊँ चूमके रोए। ये तो है चौपाई से घाट गवैए गाएँ इनके ठाट, यहीं तो पाँव हमारे राम ने धोए। ये सरयू माँ है इनके जल में आशीर्वाद बहते हैं, शुभ आशीर्वाद बहते हैं। वहीं हमको भी रहना है, जहाँ श्रीराम रहते हैं॥ नगर धरा पर अनगिन होंई, अवधपुरी सब प्रिय नहीं कोई, दक्षिण में है वन मनभावन, उत्तर में वह सरयू पावन। हर घर मंदिर राम-लला का, हर पग जैसे राम शरा का, अधिकारी शत-शत वंदन की जन्मभूमि यह रघुनंदन की। ये वह नगरी है, जिस नगरी में चारों धाम रहते हैं, हाँ, चारों धाम रहते हैं। अवध की धूल चंदन है यह तुलसीदास कहते हैं॥ वहीं हमको भी रहना है, जहाँ श्रीराम रहते हैं, हमारे राम रहते हैं। वहीं हमको भी रहना है, जहाँ श्रीराम रहते हैं, हमारे राम रहते हैं, जहाँ श्रीराम रहते हैं, हमारे राम रहते हैं॥

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Hindi Bhajan Manjari

एक अयोध्या धाम। कोटि तीर्थ से पावन वह रज, जहाँ हुए हैं राम, जहाँ हुए हैं राम॥

अवध की धूल चंदन है यह तुलसीदास कहते हैं, अवध की धूल चंदन है यह तुलसीदास कहते हैं। वहीं हमको भी रहना है, वहीं हमको भी रहना है, जहाँ श्रीराम रहते हैं, हमारे राम रहते हैं। अवध की धूल चंदन है यह तुलसीदास कहते हैं॥

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अवधपुरी का महिमा-मंडन कहाँ हमारे बस का, हाँ, अवधपुरी का महिमा-मंडन कहाँ हमारे बस का। इस नगरी का कण-कण साक्षी रामचरितमानस का। यहीं हनुमान ने सीना चीर दिखाई राघव की तस्वीर, भरत जी यहीं खड़ाऊँ चूमके रोए। ये तो है चौपाई से घाट गवैए गाएँ इनके ठाट, यहीं तो पाँव हमारे राम ने धोए। ये सरयू माँ है इनके जल में आशीर्वाद बहते हैं, शुभ आशीर्वाद बहते हैं। वहीं हमको भी रहना है, जहाँ श्रीराम रहते हैं॥

नगर धरा पर अनगिन होंई, अवधपुरी सब प्रिय नहीं कोई, दक्षिण में है वन मनभावन, उत्तर में वह सरयू पावन। हर घर मंदिर राम-लला का, हर पग जैसे राम शरा का, अधिकारी शत-शत वंदन की जन्मभूमि यह रघुनंदन की। ये वह नगरी है, जिस नगरी में चारों धाम रहते हैं, हाँ, चारों धाम रहते हैं। अवध की धूल चंदन है यह तुलसीदास कहते हैं॥

वहीं हमको भी रहना है, जहाँ श्रीराम रहते हैं, हमारे राम रहते हैं। वहीं हमको भी रहना है, जहाँ श्रीराम रहते हैं, हमारे राम रहते हैं, जहाँ श्रीराम रहते हैं, हमारे राम रहते हैं॥

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अर्थ (Bhavarth)

यह भजन अयोध्या नगरी (अवधपुरी) की परिक्रमा और श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम का एक सजीव चित्र प्रस्तुत करता है: 1. अयोध्या धाम की अद्वितीय महिमा: भजन के आरंभ में बताया गया है कि धरती पर केवल एक ही अयोध्या धाम है। यहाँ की 'रज' (धूल) करोड़ों तीर्थों से भी अधिक पवित्र है क्योंकि इस धरती पर स्वयं भगवान श्री राम ने जन्म लिया है। गोस्वामी तुलसीदास जी के अनुसार, अवध की मिट्टी चंदन के समान पवित्र है और हर भक्त की यही लालसा है कि वह उसी नगरी में रहे जहाँ उसके राम रहते हैं। 2. रामचरितमानस और माँ सरयू का आशीर्वाद: भक्त कहता है कि हम मनुष्यों के बस में नहीं है कि अवधपुरी की महिमा का पूरा वर्णन कर सकें। यहाँ का कण-कण 'रामचरितमानस' का साक्षी है। यही वह पावन धरती है जहाँ हनुमान जी ने सीना चीरकर राघव की तस्वीर दिखाई थी और भरत जी ने खड़ाऊँ चूमकर विलाप किया था। यहाँ के घाट-घाट पर चौपाइयाँ गूँजती हैं। यहीं पर साक्षात सरयू माँ बहती हैं, जिनके जल में केवल पानी नहीं, बल्कि प्रभु का शुभ आशीर्वाद बहता है। 3. चारों धामों का स्वरूप: धरती पर अनगिनत नगर हो सकते हैं, लेकिन अयोध्या जैसा प्रिय कोई नहीं। इसके दक्षिण में मनभावन वन हैं और उत्तर में पावन सरयू बहती है। यहाँ का हर घर राम-लला का मंदिर है। श्री राम (रघुनंदन) की यह जन्मभूमि सौ-सौ बार वंदन (प्रणाम) करने के योग्य है। यह ऐसी महान नगरी है जहाँ अकेले ही चारों धामों का पुण्य और वास समाहित है।

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Frequently Asked Questions

"अवध की धूल चंदन है" भजन में अयोध्या की तुलना चंदन से क्यों की गई है?

गोस्वामी तुलसीदास जी और संतों के अनुसार, अयोध्या (अवध) की धरती पर स्वयं भगवान श्री राम ने अवतार लिया और लीलाएं कीं। इसलिए यहाँ की धूल (रज) किसी साधारण मिट्टी की तरह नहीं, बल्कि माथे पर लगाने वाले पवित्र 'चंदन' के समान पूजनीय और वंदनीय मानी गई है।

भजन में "यहीं हनुमान ने सीना चीर दिखाई राघव की तस्वीर" का क्या प्रसंग है?

यह पंक्ति उस पौराणिक प्रसंग को दर्शाती है जब अयोध्या के दरबार में सीता माता द्वारा दिए गए मोतियों के हार को हनुमान जी ने यह कहकर तोड़ दिया था कि इसमें राम का नाम नहीं है। जब उन पर सवाल उठाया गया, तो उन्होंने अपना सीना चीरकर दिखा दिया कि उनके हृदय में साक्षात श्री राम (राघव) और माता सीता विराजमान हैं।

अयोध्या नगरी को "चारों धाम" क्यों कहा गया है?

हिंदू धर्म में यह मान्यता है कि जहाँ भगवान के साक्षात चरण पड़े हों और जो उनकी जन्मभूमि हो, उस एक स्थान की यात्रा और दर्शन करने मात्र से भारत के 'चारों धामों' (बद्रीनाथ, द्वारका, जगन्नाथ पुरी, और रामेश्वरम) के बराबर पुण्य प्राप्त हो जाता है।

Categories: Ram Ji, Ramayan Prasang, Navratri Special

Deity: Shri Ram

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

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