Shri RamPhalgun Bhajan

रघुवर संग खेलत जनक दुलारी, अवधपुरी में होली (अवधी भजन) लिरिक्स

Raghuvar Sang Khelat Janak Dulari Lyrics (Awadh Holi) Lyrics

तर्ज (Tune): श्री रघुवर कोमल कमल नयन को

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रघुवर संग खेलत जनक दुलारी, अवधपुरी में होली (अवधी भजन) लिरिक्स

RAGHUVAR SANG KHELAT JANAK DULARI AWADH HOLI LYRICS

रघुवर संग खेलत जनक दुलारी, अवधपुरी में होली, अवधपुरी में होली॥ केहू के भीजत पाग-पगड़िया, केहू के भीजत पाग-पगड़िया, केहू के भीजत चोली, अवधपुरी में होली॥ कनक कलश में केसर घोले, कनक कलश में केसर घोले, भर-भर मारत पिचकारी, अवधपुरी में होली॥ उड़त गुलाल लाल भयो अंबर, उड़त गुलाल लाल भयो अंबर, बरसत रंग की धारी, अवधपुरी में होली॥ जनक लली को मुख रंग डारो, जनक लली को मुख रंग डारो, रंग गए अवध बिहारी, अवधपुरी में होली॥ धन-धन भाग सखी नैनन के, धन-धन भाग सखी नैनन के, निरखत छवि अति प्यारी, अवधपुरी में होली॥ रघुवर संग खेलत जनक दुलारी, अवधपुरी में होली, अवधपुरी में होली॥

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रघुवर संग खेलत जनक दुलारी, अवधपुरी में होली, अवधपुरी में होली॥

केहू के भीजत पाग-पगड़िया, केहू के भीजत पाग-पगड़िया, केहू के भीजत चोली, अवधपुरी में होली॥

कनक कलश में केसर घोले, कनक कलश में केसर घोले, भर-भर मारत पिचकारी, अवधपुरी में होली॥

उड़त गुलाल लाल भयो अंबर, उड़त गुलाल लाल भयो अंबर, बरसत रंग की धारी, अवधपुरी में होली॥

जनक लली को मुख रंग डारो, जनक लली को मुख रंग डारो, रंग गए अवध बिहारी, अवधपुरी में होली॥

धन-धन भाग सखी नैनन के, धन-धन भाग सखी नैनन के, निरखत छवि अति प्यारी, अवधपुरी में होली॥

रघुवर संग खेलत जनक दुलारी, अवधपुरी में होली, अवधपुरी में होली॥

रघुवर संग खेलत जनक दुलारी, अवधपुरी में होली (अवधी भजन) लिरिक्स Video

अर्थ (Bhavarth)

फाल्गुन का महीना और होली का उल्लास केवल ब्रज तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अवध (अयोध्या) की होली का भी अपना एक अलग ही अलौकिक आनंद है। "रघुवर संग खेलत जनक दुलारी" एक अत्यंत ही पारंपरिक और लोकप्रिय अवधी लोकगीत है, जिसमें भगवान श्री राम और माता सीता की दिव्य होली का बहुत ही मनमोहक चित्रण किया गया है। यह पारंपरिक अवधी भजन अयोध्या धाम में श्री राम और माता सीता के बीच खेली जा रही प्रेममयी होली का अत्यंत ही सजीव और उल्लासपूर्ण वर्णन है। इसके भावों को तीन मुख्य हिस्सों में समझा जा सकता है: 1. अवधपुरी की दिव्य होली और रंगों की बौछार: भजन की शुरुआत इस सुंदर दृश्य से होती है कि आज अवधपुरी (अयोध्या) में राजा राम (रघुवर) अपनी प्राणप्रिय सीता जी (जनक दुलारी) के साथ होली खेल रहे हैं। इस फाल्गुन उत्सव में इतना रंग बरस रहा है कि किसी के सिर की पगड़ी (पाग-पगड़िया) रंग से भीग गई है, तो किसी की चोली (वस्त्र) रंगों से सराबोर हो गई है। 2. कनक कलश और अंबर का लाल होना: होली खेलने की भव्यता का वर्णन करते हुए गायक कहता है कि सोने के घड़ों (कनक कलश) में शुद्ध केसरिया रंग घोला गया है, और श्री राम भर-भर कर अपनी पिचकारी से वह रंग सब पर डाल रहे हैं। चारों तरफ इतना लाल गुलाल उड़ रहा है कि पूरा आकाश (अंबर) ही लाल हो गया है और रंगों की धार (बारिश) बरस रही है। 3. मनमोहक छवि और सखियों का सौभाग्य: होली के इस मधुर खेल में श्री राम ने माता सीता (जनक लली) के मुख पर रंग डाल दिया है, और बदले में स्वयं अवध बिहारी (श्री राम) भी माता सीता के प्रेम-रंग में पूरी तरह रंग गए हैं। इस अलौकिक दृश्य को देखकर वहाँ उपस्थित सखियाँ कहती हैं कि "हमारी आँखों (नैनन) के भाग्य सच में धन्य हैं, जो हमें श्री राम और माता सीता की इतनी प्यारी और दिव्य छवि को निहारने (निरखने) का सौभाग्य मिल रहा है।"

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Frequently Asked Questions

Q1: 'रघुवर संग खेलत जनक दुलारी' भजन में किस स्थान की होली का वर्णन है?

इस अत्यंत सुंदर और पारंपरिक लोकगीत में भगवान श्री राम की जन्मभूमि अवधपुरी (अयोध्या) की दिव्य होली का वर्णन किया गया है।

Q2: भजन में "जनक दुलारी" और "अवध बिहारी" किसे कहा गया है?

"जनक दुलारी" (राजा जनक की पुत्री) माता सीता को कहा गया है, और "अवध बिहारी" (अवध में विहार करने वाले राजा) भगवान श्री राम को कहा गया है।

Q3: "कनक कलश में केसर घोले" का क्या अर्थ है?

'कनक' का अर्थ सोना (Gold) होता है। इसका अर्थ है कि अवध के राजमहल में सोने के घड़ों (कलश) में होली खेलने के लिए केसरिया रंग घोला गया है, जिसे श्री राम पिचकारी में भरकर चला रहे हैं।

Categories: Phalgun Bhajan

Deity: Shri Ram

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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