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कैसे ढूंढूं मैं रघुवर पता आपका (श्री राम भजन) लिरिक्स - धीरज़ कांत

Kaise Dhundhu Main Raghuvar Pata Aapka Lyrics - Dhiraj Kant Lyrics

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कैसे ढूंढूं मैं रघुवर पता आपका (श्री राम भजन) लिरिक्स - धीरज़ कांत

KAISE DHUNDHU MAIN RAGHUVAR PATA AAPKA BHAJAN LYRICS DHIRAJ KANT

कैसे ढूंढूं मैं रघुवर पता आपका, रूप माया लिया जब घनी रात का। कैसे ढूंढूं मैं रघुवर पता आपका॥ मन भटकते-भटकते परेशान है, अब तो केवल बचा आसरा आपका। रूप माया लिया जब घनी रात का, कैसे ढूंढूं मैं रघुवर पता आपका॥ सुनता हूँ उसका जीवन संवर जाता है, जिसपे होती करम की नज़र आपका। रूप माया लिया जब घनी रात का, कैसे ढूंढूं मैं रघुवर पता आपका॥ अपने चरणों से क्यों दूर रखा मुझे, आप ही से शिकायत करूँ आपका। रूप माया लिया जब घनी रात का, कैसे ढूंढूं मैं रघुवर पता आपका॥

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कैसे ढूंढूं मैं रघुवर पता आपका, रूप माया लिया जब घनी रात का। कैसे ढूंढूं मैं रघुवर पता आपका॥

मन भटकते-भटकते परेशान है, अब तो केवल बचा आसरा आपका। रूप माया लिया जब घनी रात का, कैसे ढूंढूं मैं रघुवर पता आपका॥

सुनता हूँ उसका जीवन संवर जाता है, जिसपे होती करम की नज़र आपका। रूप माया लिया जब घनी रात का, कैसे ढूंढूं मैं रघुवर पता आपका॥

अपने चरणों से क्यों दूर रखा मुझे, आप ही से शिकायत करूँ आपका। रूप माया लिया जब घनी रात का, कैसे ढूंढूं मैं रघुवर पता आपका॥

कैसे ढूंढूं मैं रघुवर पता आपका (श्री राम भजन) लिरिक्स - धीरज़ कांत Video

अर्थ (Bhavarth)

भगवान श्री राम की खोज और विरह (तड़प) को व्यक्त करने वाला यह एक अत्यंत ही भावुक और हृदयस्पर्शी भजन है। गायक धीरज़ कांत (Dhiraj Kant) जी ने इसे बहुत ही दर्द और पुकार भरे अंदाज़ (गज़ल शैली) में गाया है। जब भक्त इस मोह-माया रुपी दुनिया में भटक कर थक जाता है, तब वह अपने प्रभु से यह प्यारी सी शिकायत करता है। रघुवर (Raghuvar): रघुकुल के सबसे श्रेष्ठ (भगवान श्री राम)। माया (Maya): भ्रम, अज्ञान या सांसारिक मोह (Illusion/Worldly attachment)। घनी रात (Ghani Raat): घोर अंधकार या अज्ञानता का समय (Darkness of ignorance)। आसरा (Aasra): सहारा या उम्मीद (Shelter / Hope)। संवर जाता (Sanwar Jaata): सुधर जाना या सफल हो जाना (Life gets fulfilled/improved)। करम की नज़र (Karam ki nazar): कृपा दृष्टि या दया (Glance of grace/mercy)। संपूर्ण भावार्थ: यह भजन एक भक्त की भगवान श्री राम के प्रति करुण पुकार है। भक्त कहता है कि "हे रघुवर! इस अज्ञानता और मोह-माया रूपी घनी काली रात में, मैं आपका पता (मार्ग) कैसे ढूंढूं?" भक्त अपना दर्द बयां करते हुए कहता है कि इस संसार में भटकते-भटकते मेरा मन बहुत परेशान हो गया है और अब मेरे पास केवल आपका ही सहारा (आसरा) बचा है। मैंने सुना है कि जिस पर भी आपकी कृपा दृष्टि (करम की नज़र) पड़ जाती है, उसका पूरा जीवन संवर (सफल हो) जाता है। अंत में भक्त प्रेमपूर्वक भगवान से ही शिकायत करता है कि "हे प्रभु! आपने मुझे अपने श्री चरणों से इतना दूर क्यों रखा है? मेरी यह शिकायत सिर्फ आपसे है।"

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यहाँ आप कैसे ढूंढूं मैं रघुवर पता आपका (श्री राम भजन) लिरिक्स - धीरज़ कांत के संपूर्ण और शुद्ध पाठ का आनंद ले सकते हैं। हमारी वेबसाइट पर आप इस भजन को हिंदी और अंग्रेजी के साथ-साथ गुजराती, बंगाली और अन्य 6 भारतीय भाषाओं में पढ़ सकते हैं।इस रचना के आध्यात्मिक रहस्य को समझने के लिए आप ऊपर इसका 'भावार्थ' (अर्थ) भी पढ़ सकते हैं। दैनिक पूजा और सत्संग के लिए आप इसका PDF (पीडीएफ) मुफ्त में डाउनलोड कर सकते हैं।

Frequently Asked Questions

Q1: 'कैसे ढूंढूं मैं रघुवर पता आपका' भजन के गायक कौन हैं?

A1: भगवान श्री राम को समर्पित इस अत्यंत भावुक और करुण भजन को सुप्रसिद्ध भजन गायक धीरज़ कांत (Dhiraj Kant) जी ने अपनी मधुर आवाज़ में गाया है।

Q2: इस भजन में "रूप माया लिया जब घनी रात का" से कवि का क्या तात्पर्य है?

A2: यहाँ 'घनी रात' और 'माया' का अर्थ संसार के मोह और अज्ञानता के अंधकार से है। भक्त कह रहा है कि इस दुनिया के मोह-माया के घने अंधेरे में वह भटक गया है और उसे ईश्वर तक पहुँचने का रास्ता (पता) नहीं मिल रहा है।

Q3: क्या मैं 'Kaise Dhundhu Main Raghuvar Lyrics PDF' डाउनलोड कर सकता हूँ?

A3: जी हाँ! आप इसी पेज पर, लिरिक्स के ठीक ऊपर दिए गए 'Download PDF' और 'Translate' बटन पर क्लिक करके इस राम भजन को अपनी मनपसंद भाषा में बिलकुल मुफ्त में सेव कर सकते हैं।

Deity: Shri Ram

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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