Shri RamRam ji

सीताराम कहिए, जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिए (भजन) लिरिक्स

Sita Ram Kahiye Lyrics – Madhur Sharma & Payal Dev Lyrics

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सीताराम कहिए, जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिए (भजन) लिरिक्स

SITA RAM KAHIYE LYRICS MADHUR SHARMA PAYAL DEV

हाथ काहे जोड़े मितवा दुनिया के आगे, देने वाले राम हैं, तू क्यों किसी से माँगे। वो तो माँगने से पहले खाली झोलियाँ भर दे, प्रार्थना से पहले कोई कामना कर दे॥ दे रहा है दाता हमको, क्या किसी से चहिए, दे रहा है दाता हमको, क्या किसी से चहिए। सीताराम सीताराम सीताराम कहिए, जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिए। सीताराम सीताराम सीताराम कहिए॥ बंद आँखों से दिखता तो होगा कोई, कोरे कागज़ पे लिखता तो होगा कोई। कठपुतली हैं, कठपुतली हम, खेल तो सारा वही रचाए। आगे-पीछे क्या हम सोचें, नाचेंगे जैसे राम नचाए॥ श्रद्धा है अधूरी जिनकी, उन्हीं से वो डरते हैं, निश्चिंत हैं वो जिनकी चिंता राम करते हैं। राम-नाम नदिया साथी, पाती-पाती बहिए, राम-नाम नदिया साथी, पाती-पाती बहिए। सीताराम सीताराम सीताराम कहिए, जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिए। सीताराम सीताराम सीताराम कहिए॥ मेरे राम-राम, तेरा नाम-नाम, तेरा नाम है मंत्रों से बढ़के। हरि ओम-ओम, मेरा रोम-रोम, हुआ धन्य है रामायण पढ़ के॥ तेरे जैसा स्वामी, तेरे जैसा दानी, कौन होगा तीनों लोक में, कौन होगा तीनों लोक में। दे रहे हैं रघुवर हमको, क्या किसी से चहिए, दे रहे हैं रघुवर हमको, क्या किसी से चहिए। सीताराम सीताराम सीताराम कहिए, जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिए। सीताराम सीताराम सीताराम कहिए॥ (विशेष संदेश) जिनकी खुशियाँ तुमसे हैं, उन्हें खुशहाल रखना। माँ-बाप दोबारा नहीं मिलते, ख़याल रखना॥

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HINDI BHAJAN

हाथ काहे जोड़े मितवा दुनिया के आगे, देने वाले राम हैं, तू क्यों किसी से माँगे। वो तो माँगने से पहले खाली झोलियाँ भर दे, प्रार्थना से पहले कोई कामना कर दे॥ दे रहा है दाता हमको, क्या किसी से चहिए, दे रहा है दाता हमको, क्या किसी से चहिए। सीताराम सीताराम सीताराम कहिए, जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिए। सीताराम सीताराम सीताराम कहिए॥

बंद आँखों से दिखता तो होगा कोई, कोरे कागज़ पे लिखता तो होगा कोई। कठपुतली हैं, कठपुतली हम, खेल तो सारा वही रचाए। आगे-पीछे क्या हम सोचें, नाचेंगे जैसे राम नचाए॥ श्रद्धा है अधूरी जिनकी, उन्हीं से वो डरते हैं, निश्चिंत हैं वो जिनकी चिंता राम करते हैं। राम-नाम नदिया साथी, पाती-पाती बहिए, राम-नाम नदिया साथी, पाती-पाती बहिए। सीताराम सीताराम सीताराम कहिए, जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिए। सीताराम सीताराम सीताराम कहिए॥

मेरे राम-राम, तेरा नाम-नाम, तेरा नाम है मंत्रों से बढ़के। हरि ओम-ओम, मेरा रोम-रोम, हुआ धन्य है रामायण पढ़ के॥ तेरे जैसा स्वामी, तेरे जैसा दानी, कौन होगा तीनों लोक में, कौन होगा तीनों लोक में। दे रहे हैं रघुवर हमको, क्या किसी से चहिए, दे रहे हैं रघुवर हमको, क्या किसी से चहिए। सीताराम सीताराम सीताराम कहिए, जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिए। सीताराम सीताराम सीताराम कहिए॥

(विशेष संदेश) जिनकी खुशियाँ तुमसे हैं, उन्हें खुशहाल रखना। माँ-बाप दोबारा नहीं मिलते, ख़याल रखना॥

सीताराम कहिए, जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिए (भजन) लिरिक्स Video

अर्थ (Bhavarth)

जय श्री राम! मनोज मुंतशिर जी की शानदार लेखनी और मधुर शर्मा व पायल देव की अत्यंत सुरीली आवाज़ में गाया गया यह नया भजन "सीताराम कहिए, जाहि विधि राखे राम" पूर्ण वैराग्य और भगवान राम पर अटूट विश्वास का एक मास्टरपीस है। इसमें दुनिया से न माँगने और माता-पिता का सम्मान करने का जो संदेश है, वह सीधा दिल में उतर जाता है। यह भजन एक भक्त के भगवान राम पर अटूट विश्वास (Surrender) का अत्यंत सुंदर वर्णन है: 1. दुनिया के आगे हाथ न फैलाना: भजन की शुरुआत में इंसान को एक बहुत बड़ी सीख दी गई है कि इस दुनिया (लोगों) के आगे हाथ जोड़ने या माँगने का कोई फायदा नहीं है। जब सारी दुनिया को देने वाले स्वयं भगवान राम हैं, तो फिर किसी और से क्यों माँगना? हमारा दाता (ईश्वर) हमारी बिना माँगी मुरादें भी पूरी कर देता है, इसलिए हमें बस 'सीताराम' कहना चाहिए और वह जिस हाल में रखे, उसी में खुश रहना चाहिए। 2. कठपुतली और राम की मर्जी: भक्त कहता है कि हम सब तो केवल कठपुतलियाँ हैं, जीवन का यह सारा खेल तो पर्दे के पीछे से वही (राम) रचा रहा है। जिनकी श्रद्धा कमज़ोर होती है, वे लोग दुनिया के दुखों से डरते हैं; लेकिन जिन भक्तों की चिंता स्वयं राम करते हैं, वे हमेशा निश्चिंत रहते हैं। राम का नाम एक नदी की तरह है, जिसमें हमें एक पत्ते (पाती) की तरह बहते जाना चाहिए। 3. राम नाम का प्रताप और माता-पिता का सम्मान: अंतिम भाग में बताया गया है कि राम का नाम दुनिया के सभी मंत्रों से बढ़कर है और रामायण पढ़कर रोम-रोम धन्य हो जाता है। तीनों लोकों में राम के समान कोई दानी नहीं है। गीत के अंत में मनोज मुंतशिर जी ने एक अत्यंत भावुक संदेश दिया है— जीवन में अपने माता-पिता का हमेशा ख्याल रखना, क्योंकि इस दुनिया में माँ-बाप दोबारा नहीं मिलते।

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Frequently Asked Questions

Q1: "सीताराम कहिए" के इस नए वर्ज़न को किसने लिखा और गाया है?

A1: टी-सीरीज़ (T-Series) द्वारा रिलीज़ किए गए इस अत्यंत सुरीले भजन को प्रसिद्ध गीतकार मनोज मुंतशिर (Manoj Muntashir) ने लिखा है, और इसे मधुर शर्मा व पायल देव ने अपनी आवाज़ दी है।

Q2: "जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिए" का क्या अर्थ है?

A2: इसका अर्थ है पूर्ण 'शरणागति' (Surrender)। भगवान राम हमें जीवन में जिस भी स्थिति, हाल या विधि (तरीके) में रखें, हमें उसी में संतोष करना चाहिए और हर हाल में खुश रहना चाहिए।

Q3: भजन के अंत में "माँ-बाप दोबारा नहीं मिलते" का संदेश क्यों दिया गया है?

A3: गीतकार ने ईश्वर की भक्ति के साथ-साथ संसार का सबसे बड़ा धर्म भी याद दिलाया है। भगवान तो हर जगह हैं, लेकिन माता-पिता ही इस धरती पर भगवान का साक्षात रूप हैं। इसलिए ईश्वर की पूजा के साथ-साथ अपने माता-पिता का सम्मान और ख्याल रखना सबसे ज़रूरी है।

Categories: Ram ji

Deity: Shri Ram

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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