आ ही गए रघुनंदन सजवा दो द्वार द्वार (सजी नगरिया है यह सारी) राम भजन लिरिक्स
Aa Hi Gaye Raghunandan Sajwa Do Dwar Dwar Lyrics
सजी नगरिया है यह सारी नाचे गावे नर और नारी सजी नगरिया है यह सारी नाचे गावे नर और नारी सजी नगरिया है यह सारी नाचे गावे नर और नारी खुशियां मनाओ गाओरी मंगल चार खुशियां मनाओ गाओरी मंगल चार स्वर्ण कलश रखवा दो बंधवा दो बंधनवार स्वर्ण कलश रखवा दो बंधवा दो बंधनवार आ ही गए...
आज लड़ियों से, मणियों से, फुलझड़ियों से सजा राम दरबार आज लड़ियों से, मणियों से, फुलझड़ियों से सजा राम दरबार आज लड़ियों से, मणियों से, फुलझड़ियों से सजा राम दरबार शोभा अजब बनी शोभा अजब बनी शोभा अजब बनी शोभा अजब बनी शोभा अजब बनी सजा राम दरबार शोभा अजब बनी, शोभा अजब बनी
कंचन कल शुभ चित्र सवारे सब ही सजे धर निज निज द्वारे सब ही सजे धर निज निज द्वारे खुशियां मनाओ गाओरी मंगल चार खुशियां मनाओ गाओरी मंगल चार स्वर्ण कलश रखवा दो बंधवा दो बंधनवार स्वर्ण कलश रखवा दो बंधवा दो बंधनवार
आ ही गए रघुनंदन सजवा दो द्वार द्वार आ ही गए रघुनंदन सजवा दो द्वार द्वार आ ही गए रघुनंदन सजवा दो द्वार द्वार आ ही गए रघुनंदन सजवा दो द्वार द्वार स्वर्ण कलश रखवा दो बंधवा दो बंधनवार स्वर्ण कलश रखवा दो बंधवा दो बंदनवार स्वर्ण कलश रखवा दो बंधवा दो बंधनवार स्वर्ण कलश रखवा दो बंधवा दो बंधनवार आ ही गए...

अर्थ (Bhavarth)
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Frequently Asked Questions
"आ ही गए रघुनंदन सजवा दो द्वार द्वार" भजन का मुख्य प्रसंग क्या है?
यह अत्यंत हर्षोल्लासपूर्ण भजन भगवान श्री राम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या वापस लौटने (दीपावली के उत्सव) या उनके भव्य मंदिर में विराजमान होने के शुभ प्रसंग पर आधारित है।
भजन में "स्वर्ण कलश" और "बंधनवार" का क्या महत्व है?
हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य या भगवान के स्वागत के लिए घर के दरवाज़ों पर 'स्वर्ण कलश' (सोने या तांबे का जल भरा लोटा) रखा जाता है और आम या अशोक के पत्तों व फूलों से बनी 'बंधनवार' (तोरण) बाँधी जाती है, जो सुख-समृद्धि और मंगल का प्रतीक है।
"कंचन कल शुभ चित्र सवारे" का क्या अर्थ है?
इस पंक्ति का अर्थ है कि अयोध्यावासियों ने अपने आराध्य श्री राम का स्वागत करने के लिए अपने घरों के द्वारों को सोने (कंचन) के कलशों और बहुत ही सुंदर, शुभ चित्रों (जैसे रंगोली और स्वास्तिक) से संवारा (सजाया) है।
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Categories: Ramayan Prasang, Ram Ji, Navratri Special
Deity: Shri Ram
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मोहित तरकरMohit Tarkar
संस्थापक एवं मुख्य संपादक • Founder & Chief Editor
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