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आ ही गए रघुनंदन सजवा दो द्वार द्वार (सजी नगरिया है यह सारी) राम भजन लिरिक्स

Aa Hi Gaye Raghunandan Sajwa Do Dwar Dwar Lyrics

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आ ही गए रघुनंदन सजवा दो द्वार द्वार (सजी नगरिया है यह सारी) राम भजन लिरिक्स

AA HI GAYE RAGHUNANDAN SAJWA DO DWAR DWAR LYRICS

सजी नगरिया है यह सारी नाचे गावे नर और नारी सजी नगरिया है यह सारी नाचे गावे नर और नारी सजी नगरिया है यह सारी नाचे गावे नर और नारी खुशियां मनाओ गाओरी मंगल चार खुशियां मनाओ गाओरी मंगल चार स्वर्ण कलश रखवा दो बंधवा दो बंधनवार स्वर्ण कलश रखवा दो बंधवा दो बंधनवार आ ही गए... आज लड़ियों से, मणियों से, फुलझड़ियों से सजा राम दरबार आज लड़ियों से, मणियों से, फुलझड़ियों से सजा राम दरबार आज लड़ियों से, मणियों से, फुलझड़ियों से सजा राम दरबार शोभा अजब बनी शोभा अजब बनी शोभा अजब बनी शोभा अजब बनी शोभा अजब बनी सजा राम दरबार शोभा अजब बनी, शोभा अजब बनी कंचन कल शुभ चित्र सवारे सब ही सजे धर निज निज द्वारे सब ही सजे धर निज निज द्वारे खुशियां मनाओ गाओरी मंगल चार खुशियां मनाओ गाओरी मंगल चार स्वर्ण कलश रखवा दो बंधवा दो बंधनवार स्वर्ण कलश रखवा दो बंधवा दो बंधनवार आ ही गए रघुनंदन सजवा दो द्वार द्वार आ ही गए रघुनंदन सजवा दो द्वार द्वार आ ही गए रघुनंदन सजवा दो द्वार द्वार आ ही गए रघुनंदन सजवा दो द्वार द्वार स्वर्ण कलश रखवा दो बंधवा दो बंधनवार स्वर्ण कलश रखवा दो बंधवा दो बंदनवार स्वर्ण कलश रखवा दो बंधवा दो बंधनवार स्वर्ण कलश रखवा दो बंधवा दो बंधनवार आ ही गए...

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Hindi Bhajan Manjari

सजी नगरिया है यह सारी नाचे गावे नर और नारी सजी नगरिया है यह सारी नाचे गावे नर और नारी सजी नगरिया है यह सारी नाचे गावे नर और नारी खुशियां मनाओ गाओरी मंगल चार खुशियां मनाओ गाओरी मंगल चार स्वर्ण कलश रखवा दो बंधवा दो बंधनवार स्वर्ण कलश रखवा दो बंधवा दो बंधनवार आ ही गए...

आज लड़ियों से, मणियों से, फुलझड़ियों से सजा राम दरबार आज लड़ियों से, मणियों से, फुलझड़ियों से सजा राम दरबार आज लड़ियों से, मणियों से, फुलझड़ियों से सजा राम दरबार शोभा अजब बनी शोभा अजब बनी शोभा अजब बनी शोभा अजब बनी शोभा अजब बनी सजा राम दरबार शोभा अजब बनी, शोभा अजब बनी

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कंचन कल शुभ चित्र सवारे सब ही सजे धर निज निज द्वारे सब ही सजे धर निज निज द्वारे खुशियां मनाओ गाओरी मंगल चार खुशियां मनाओ गाओरी मंगल चार स्वर्ण कलश रखवा दो बंधवा दो बंधनवार स्वर्ण कलश रखवा दो बंधवा दो बंधनवार

आ ही गए रघुनंदन सजवा दो द्वार द्वार आ ही गए रघुनंदन सजवा दो द्वार द्वार आ ही गए रघुनंदन सजवा दो द्वार द्वार आ ही गए रघुनंदन सजवा दो द्वार द्वार स्वर्ण कलश रखवा दो बंधवा दो बंधनवार स्वर्ण कलश रखवा दो बंधवा दो बंदनवार स्वर्ण कलश रखवा दो बंधवा दो बंधनवार स्वर्ण कलश रखवा दो बंधवा दो बंधनवार आ ही गए...

आ ही गए रघुनंदन सजवा दो द्वार द्वार (सजी नगरिया है यह सारी) राम भजन लिरिक्स Video

अर्थ (Bhavarth)

यह अत्यंत हर्षोल्लास से भरा भजन भगवान श्री राम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या वापस लौटने (दीपावली) या उनके नव-निर्मित मंदिर में विराजमान होने के पावन प्रसंग को दर्शाता है: 1. अयोध्या में उल्लास और मंगलचार: भजन के आरंभ में बताया गया है कि श्री राम के आने की खुशी में पूरी अयोध्या नगरी सज गई है। सभी नर-नारी खुशी से नाच-गा रहे हैं। लोग एक-दूसरे से कह रहे हैं कि खुशियाँ मनाओ और मंगल गीत गाओ। प्रभु के स्वागत के लिए हर द्वार पर सोने के कलश (स्वर्ण कलश) रखवा दो और फूलों व आम के पत्तों की तोरण (बंधनवार) बंधवा दो। 2. राम दरबार की अद्भुत शोभा: आज श्री राम का दरबार प्रकाश की लड़ियों, कीमती मणियों और फुलझड़ियों से सजाया गया है। इस भव्य सजावट से दरबार की शोभा अत्यंत अद्भुत और अलौकिक बन गई है। 3. घर-घर में राम का स्वागत: हर अयोध्यावासी ने अपने घर के द्वारों को सोने (कंचन) के कलशों और शुभ चित्रों (रंगोली आदि) से संवार लिया है। चारों तरफ बस एक ही गूँज है— "आ ही गए रघुनंदन, सजवा दो द्वार-द्वार!" यह भजन हर रामभक्त के हृदय में दीपावली जैसा उल्लास और श्री राम के प्रति अटूट प्रेम जगा देता है।

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Frequently Asked Questions

"आ ही गए रघुनंदन सजवा दो द्वार द्वार" भजन का मुख्य प्रसंग क्या है?

यह अत्यंत हर्षोल्लासपूर्ण भजन भगवान श्री राम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या वापस लौटने (दीपावली के उत्सव) या उनके भव्य मंदिर में विराजमान होने के शुभ प्रसंग पर आधारित है।

भजन में "स्वर्ण कलश" और "बंधनवार" का क्या महत्व है?

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य या भगवान के स्वागत के लिए घर के दरवाज़ों पर 'स्वर्ण कलश' (सोने या तांबे का जल भरा लोटा) रखा जाता है और आम या अशोक के पत्तों व फूलों से बनी 'बंधनवार' (तोरण) बाँधी जाती है, जो सुख-समृद्धि और मंगल का प्रतीक है।

"कंचन कल शुभ चित्र सवारे" का क्या अर्थ है?

इस पंक्ति का अर्थ है कि अयोध्यावासियों ने अपने आराध्य श्री राम का स्वागत करने के लिए अपने घरों के द्वारों को सोने (कंचन) के कलशों और बहुत ही सुंदर, शुभ चित्रों (जैसे रंगोली और स्वास्तिक) से संवारा (सजाया) है।

Categories: Ramayan Prasang, Ram Ji, Navratri Special

Deity: Shri Ram

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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