ओ मैया, तैने का ठानी मन में (राम वनवास) भजन लिरिक्स - रविन्द्र जैन
O Maiya Taine Ka Thani Man Mein Lyrics - Ravindra Jain
ओ मैया, तैने का ठानी मन में, राम सिया भेज दिए री वन में॥
जद्यपि भरत तेरो ही जायो, तेरी करनी देख लजायो, अपनों पद तैने आप गँवायो, भरत की नज़रन में। राम सिया भेज दिए री वन में॥
हठीली तैने का ठानी मन में, राम सिया भेज दिए री वन में॥
महल छोड़ वहाँ नहीं रे मड़ैया, सिया सुकुमारी संग दोऊ भैया, काहू वृक्ष तर भीजत होंगे, तीनों मेहन में। राम सिया भेज दिए री वन में॥
दीवानी तैने का ठानी मन में, राम सिया भेज दिए री वन में॥
कौसल्या की छिन गई वाणी, रोए न सकी उर्मिल दीवानी, कैकेयी तू बस एक ही रानी, रह गई महलन में। दीवानी तैने का ठानी मन में, राम सिया भेज दिए री वन में॥

अर्थ (Bhavarth)
Read the most authentic and complete O Maiya Taine Ka Thani Man Mein Lyrics - Ravindra Jain (ओ मैया, तैने का ठानी मन में (राम वनवास) भजन लिरिक्स - रविन्द्र जैन) lyrics. Popularized by Ravindra Jain, this divine ram ji dedicated to Shri Ram is presented in pristine Devanagari and English (Romanized) scripts. Using our advanced transliteration tool, you can instantly convert these lyrics into 8+ Indian languages including Gujarati, Bengali, Kannada, and Telugu. Scroll up to read the complete Bhavarth (meaning) to deeply understand the spiritual essence of this composition. You can also use the free PDF download feature to save these lyrics for your daily offline Puja, Aarti, and Satsang.
यहाँ आप ओ मैया, तैने का ठानी मन में (राम वनवास) भजन लिरिक्स - रविन्द्र जैन के संपूर्ण और शुद्ध पाठ का आनंद ले सकते हैं। हमारी वेबसाइट पर आप इस राम जी को हिंदी और अंग्रेजी के साथ-साथ गुजराती, बंगाली और अन्य 6 भारतीय भाषाओं में पढ़ सकते हैं।इस रचना के आध्यात्मिक रहस्य को समझने के लिए आप ऊपर इसका 'भावार्थ' (अर्थ) भी पढ़ सकते हैं। दैनिक पूजा और सत्संग के लिए आप इसका PDF (पीडीएफ) मुफ्त में डाउनलोड कर सकते हैं।
Frequently Asked Questions
"ओ मैया, तैने का ठानी मन में" भजन किसने लिखा और गाया है?
राम वनवास के प्रसंग पर आधारित यह अत्यंत रुला देने वाला भजन महान संगीतकार, गीतकार और गायक स्व. रवींद्र जैन (Ravindra Jain) जी ने लिखा और गाया है। यह रामानंद सागर जी के प्रसिद्ध धारावाहिक 'रामायण' का सबसे लोकप्रिय गीत है।
भजन में "जद्यपि भरत तेरो ही जायो, तेरी करनी देख लजायो" का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि हे कैकेयी! भले ही भरत तुम्हारा अपना सगा बेटा (जायो) है, जिसके लिए तुमने राम को वनवास भेजा, लेकिन वह भी तुम्हारे इस कठोर और क्रूर कार्य (करनी) को देखकर लज्जित (शर्मिंदा) है। तुमने अपने ही बेटे की नज़रों में सम्मान खो दिया है।
"रोए न सकी उर्मिल दीवानी" से कवि का क्या तात्पर्य है?
उर्मिला भगवान श्री राम के छोटे भाई लक्ष्मण जी की पत्नी हैं। जब लक्ष्मण जी राम-सीता के साथ वन चले गए, तो उर्मिला का दुख और सदमा इतना गहरा था कि वे अपने पति के वियोग में खुलकर रो भी नहीं सकीं। उनका यह मौन विलाप किसी भी रुदन से अधिक पीड़ादायक था।
Related Tags
Categories: Ram Ji, Ramayan Prasang, Ravindra Jain Bhajans
Deity: Shri Ram
Community Comments (0)
Be the first to share your devotion here.

मोहित तरकरMohit Tarkar
संस्थापक एवं मुख्य संपादक • Founder & Chief Editor
धार्मिक सटीकता और भाषाई शुद्धता के लिए प्रमाणित। प्रामाणिक सनातन धर्म साहित्य के संरक्षण के लिए समर्पित।
Fact-checked for religious accuracy and linguistic purity. Dedicated to preserving authentic Sanatan Dharma literature.