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नगरी हो अयोध्या सी, रघुकुल सा घराना हो (राम भजन) लिरिक्स

Nagri Ho Ayodhya Si Raghukul Sa Gharana Ho Lyrics

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नगरी हो अयोध्या सी, रघुकुल सा घराना हो (राम भजन) लिरिक्स

NAGRI HO AYODHYA SI RAGHUKUL SA GHARANA HO LYRICS

नगरी हो अयोध्या सी, रघुकुल सा घराना हो, चरण हो राघव के, जहाँ मेरा ठिकाना हो। हो त्याग भरत जैसा, सीता सी नारी हो, और लव कुश के जैसी संतान हमारी हो। श्रद्धा हो श्रवण जैसी, शबरी सी भक्ति हो, और हनुमान के जैसे निष्ठा और शक्ति हो। मेरी जीवन नैया हो, प्रभु राम खेवैया हो, और राम कृपा की सदा मेरे सिर छाया हो। कौशल्या माई हो, लक्ष्मण सा भाई हो, स्वामी तुम जैसा मेरा रघुराई हो। सरयू का किनारा हो, निर्मल जल धारा हो, और दर्शन मुझे भगवान, हर घड़ी तुम्हारा हो। नगरी हो अयोध्या सी, रघुकुल सा घराना हो, चरण हो राघव के, जहाँ मेरा ठिकाना हो।

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नगरी हो अयोध्या सी, रघुकुल सा घराना हो, चरण हो राघव के, जहाँ मेरा ठिकाना हो।

हो त्याग भरत जैसा, सीता सी नारी हो, और लव कुश के जैसी संतान हमारी हो।

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श्रद्धा हो श्रवण जैसी, शबरी सी भक्ति हो, और हनुमान के जैसे निष्ठा और शक्ति हो।

मेरी जीवन नैया हो, प्रभु राम खेवैया हो, और राम कृपा की सदा मेरे सिर छाया हो।

कौशल्या माई हो, लक्ष्मण सा भाई हो, स्वामी तुम जैसा मेरा रघुराई हो।

सरयू का किनारा हो, निर्मल जल धारा हो, और दर्शन मुझे भगवान, हर घड़ी तुम्हारा हो।

नगरी हो अयोध्या सी, रघुकुल सा घराना हो, चरण हो राघव के, जहाँ मेरा ठिकाना हो।

नगरी हो अयोध्या सी, रघुकुल सा घराना हो (राम भजन) लिरिक्स Video

अर्थ (Bhavarth)

यह अत्यंत भावपूर्ण भजन रामायण के महान पात्रों और उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारने की एक बहुत ही सुंदर प्रार्थना है: 1. अयोध्या और रघुकुल जैसा आदर्श जीवन: भक्त भगवान से प्रार्थना करता है कि उसका जीवन और परिवेश अयोध्या नगरी जैसा पवित्र हो, और उसका परिवार श्री राम के 'रघुकुल' (सूर्यवंश) जैसा संस्कारी हो। उसकी केवल एक ही चाहत है कि उसका अंतिम और पक्का ठिकाना भगवान श्री राम (राघव) के श्रीचरणों में हो। 2. रामायण के आदर्श चरित्रों की मांग: इस भजन में भक्त अपने परिवार के लिए रामायण के महान गुण माँगता है— भाई हो तो उसमें भरत जैसा अपार त्याग हो, पत्नी माता सीता जैसी पतिव्रता और पवित्र हो, तथा संतान लव-कुश जैसी वीर और संस्कारी हो। इसके साथ ही, माता-पिता की सेवा के लिए श्रवण कुमार जैसी श्रद्धा, माता शबरी जैसी निस्वार्थ भक्ति और हनुमान जी जैसी अटूट निष्ठा व शक्ति जीवन में होनी चाहिए। 3. जीवन की नैया और प्रभु का दर्शन: भक्त अपना सर्वस्व भगवान को सौंपते हुए कहता है कि मेरी इस जीवन रूपी नैया को पार लगाने वाले 'खेवैया' (नाविक) स्वयं प्रभु राम हों। माँ कौशल्या जैसी ममतामयी माँ और लक्ष्मण जैसा आज्ञाकारी भाई मिले। अंत में भक्त यह वरदान माँगता है कि सरयू नदी के पावन किनारे पर रहते हुए उसे हर घड़ी केवल भगवान श्री राम के ही दर्शन होते रहें।

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Frequently Asked Questions

"नगरी हो अयोध्या सी" भजन का मुख्य आध्यात्मिक संदेश क्या है?

यह भजन हमें रामायण के पात्रों से प्रेरणा लेने का संदेश देता है। यह सिखाता है कि एक आदर्श परिवार कैसा होना चाहिए— जिसमें भरत जैसा त्याग, शबरी जैसी भक्ति, श्रवण कुमार जैसी सेवा और हनुमान जी जैसी निष्ठा हो।

भजन में "मेरी जीवन नैया हो, प्रभु राम खेवैया हो" का क्या अर्थ है?

'खेवैया' का अर्थ होता है नाव चलाने वाला (नाविक)। भक्त पूर्ण रूप से भगवान की शरण में जाते हुए कह रहा है कि हे प्रभु! मेरे इस जीवन रूपी नाव के नाविक आप ही बनिए और मुझे इस भवसागर (संसार के दुखों) से पार लगा दीजिए।

इस भजन में "श्रवण जैसी श्रद्धा" का क्या तात्पर्य है?

हिंदू धर्म में 'श्रवण कुमार' माता-पिता की सेवा और उनके प्रति अटूट श्रद्धा के सबसे बड़े प्रतीक माने जाते हैं, जिन्होंने अपने अंधे माता-पिता को काँवर में बैठाकर तीर्थ यात्रा करवाई थी। भक्त ईश्वर से अपने भीतर वैसी ही सेवा-भावना (श्रद्धा) माँग रहा है।

Categories: Ramayan Prasang, Filmi Tarz Bhajan, Ram Ji, Navratri Special

Deity: Shri Ram

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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