नगरी हो अयोध्या सी, रघुकुल सा घराना हो (राम भजन) लिरिक्स
Nagri Ho Ayodhya Si Raghukul Sa Gharana Ho Lyrics
नगरी हो अयोध्या सी, रघुकुल सा घराना हो, चरण हो राघव के, जहाँ मेरा ठिकाना हो।
हो त्याग भरत जैसा, सीता सी नारी हो, और लव कुश के जैसी संतान हमारी हो।
श्रद्धा हो श्रवण जैसी, शबरी सी भक्ति हो, और हनुमान के जैसे निष्ठा और शक्ति हो।
मेरी जीवन नैया हो, प्रभु राम खेवैया हो, और राम कृपा की सदा मेरे सिर छाया हो।
कौशल्या माई हो, लक्ष्मण सा भाई हो, स्वामी तुम जैसा मेरा रघुराई हो।
सरयू का किनारा हो, निर्मल जल धारा हो, और दर्शन मुझे भगवान, हर घड़ी तुम्हारा हो।
नगरी हो अयोध्या सी, रघुकुल सा घराना हो, चरण हो राघव के, जहाँ मेरा ठिकाना हो।

अर्थ (Bhavarth)
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Frequently Asked Questions
"नगरी हो अयोध्या सी" भजन का मुख्य आध्यात्मिक संदेश क्या है?
यह भजन हमें रामायण के पात्रों से प्रेरणा लेने का संदेश देता है। यह सिखाता है कि एक आदर्श परिवार कैसा होना चाहिए— जिसमें भरत जैसा त्याग, शबरी जैसी भक्ति, श्रवण कुमार जैसी सेवा और हनुमान जी जैसी निष्ठा हो।
भजन में "मेरी जीवन नैया हो, प्रभु राम खेवैया हो" का क्या अर्थ है?
'खेवैया' का अर्थ होता है नाव चलाने वाला (नाविक)। भक्त पूर्ण रूप से भगवान की शरण में जाते हुए कह रहा है कि हे प्रभु! मेरे इस जीवन रूपी नाव के नाविक आप ही बनिए और मुझे इस भवसागर (संसार के दुखों) से पार लगा दीजिए।
इस भजन में "श्रवण जैसी श्रद्धा" का क्या तात्पर्य है?
हिंदू धर्म में 'श्रवण कुमार' माता-पिता की सेवा और उनके प्रति अटूट श्रद्धा के सबसे बड़े प्रतीक माने जाते हैं, जिन्होंने अपने अंधे माता-पिता को काँवर में बैठाकर तीर्थ यात्रा करवाई थी। भक्त ईश्वर से अपने भीतर वैसी ही सेवा-भावना (श्रद्धा) माँग रहा है।
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Categories: Ramayan Prasang, Filmi Tarz Bhajan, Ram Ji, Navratri Special
Deity: Shri Ram
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मोहित तरकरMohit Tarkar
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