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रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया (माता शबरी भजन) लिरिक्स

Rama Rama Ratte Ratte Beeti Re Umariya Lyrics - Shabari Bhajan

Location: Madhubani, Bihar, India
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रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया (माता शबरी भजन) लिरिक्स

RAMA RAMA RATTE RATTE BEETI RE UMARIYA LYRICS SHABARI BHAJAN

रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया, रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया। रघुकुल नंदन कब आओगे, भीलन की डगरिया, रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया। मैं शबरी भीलनी की जाई, भजन भाव नहीं जानूँ रे, मैं शबरी भीलनी की जाई, भजन भाव नहीं जानूँ रे। नाथ तुम्हारे दर्शन के हित, वन में जीवन पा लूँ रे, चरण कमल से निर्मल कर दो, चरण कमल से निर्मल कर दो, दास की झुपड़िया। रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया। रोज सवेरे वन में जाकर, रस्ता साफ कराती हूँ, अपने प्रभु के खातिर वन से, चुन चुन के फल लाती हूँ। मीठे-मीठे बेरन से भर मीठे-मीठे बेरन से भर लाई मैं छबरिया, रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया। सुंदर श्याम सलोनी सूरत, नैनन बीच बसाऊँगी, पद पंकज की रज धरी मस्तक, चरणों में शीश नवाऊँगी। प्रभु जी मुझको भूल गए क्या, प्रभु जी मुझको भूल गए क्या, लो दास की खबरिया? रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया। नाथ तुम्हारे दर्शन के हित, मैं अबला एक नारी हूँ, दर्शन बिन दो नैना तरसे, दिल की बड़ी दुखियारी हूँ। मुझको दर्शन दे दो दयामय, मुझको दर्शन दे दो दयामय, डालो मेहर नज़रिया, रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया। रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया। रघुकुल नंदन कब आओगे, भीलन की डगरिया, रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया। रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया। रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया।

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Hindi Bhajan Manjari
रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया,
रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया।
रघुकुल नंदन कब आओगे,
भीलन की डगरिया,
रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया।
मैं शबरी भीलनी की जाई,
भजन भाव नहीं जानूँ रे,
मैं शबरी भीलनी की जाई,
भजन भाव नहीं जानूँ रे।
नाथ तुम्हारे दर्शन के हित,
वन में जीवन पा लूँ रे,
चरण कमल से निर्मल कर दो,
चरण कमल से निर्मल कर दो,
दास की झुपड़िया।
रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया।
रोज सवेरे वन में जाकर,
रस्ता साफ कराती हूँ,
अपने प्रभु के खातिर वन से,
चुन चुन के फल लाती हूँ।
मीठे-मीठे बेरन से भर
मीठे-मीठे बेरन से भर लाई मैं छबरिया,
रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया।
सुंदर श्याम सलोनी सूरत,
नैनन बीच बसाऊँगी,
पद पंकज की रज धरी मस्तक,
चरणों में शीश नवाऊँगी।
प्रभु जी मुझको भूल गए क्या,
प्रभु जी मुझको भूल गए क्या,
लो दास की खबरिया?
रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया।
नाथ तुम्हारे दर्शन के हित,
मैं अबला एक नारी हूँ,
दर्शन बिन दो नैना तरसे,
दिल की बड़ी दुखियारी हूँ।
मुझको दर्शन दे दो दयामय,
मुझको दर्शन दे दो दयामय,
डालो मेहर नज़रिया,
रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया।
रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया।
रघुकुल नंदन कब आओगे,
भीलन की डगरिया,
रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया।
रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया।
रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया।
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अर्थ (Bhavarth)

यह भजन रामायण के अत्यंत भावपूर्ण 'शबरी प्रसंग' पर आधारित है। इसमें माता शबरी के उस निश्छल और अटूट प्रेम का वर्णन है, जिसमें वे जीवन भर अपने प्रभु श्री राम के आने का इंतज़ार करती रहीं: 1. राम-राम रटते बीती उमरिया: माता शबरी अत्यंत व्याकुल होकर कहती हैं कि हे रघुकुल नंदन श्री राम! आपका नाम (रामा-रामा) रटते-रटते मेरी पूरी उम्र (उमरिया) बीत गई है, मैं बूढ़ी हो गई हूँ। आप इस एक साधारण भीलनी की डगर (रास्ते) पर कब आएंगे? 2. निश्छल भाव और निर्मल कुटिया: शबरी जी कहती हैं कि मैं एक साधारण भील जाति की कन्या हूँ, मुझे किसी भी तरह का भजन, नियम या पूजा का भाव नहीं आता। मैं केवल आपके दर्शन के लिए ही इस वन में जीवित हूँ। हे नाथ! कृपया यहाँ आकर अपने चरण-कमलों से मेरी इस मैली-कुचैली झोपड़ी को पवित्र (निर्मल) कर दीजिए। 3. मीठे बेर और रोज़ का इंतज़ार: प्रभु के लिए माता शबरी का प्रेम इतना गहरा है कि वे रोज़ सुबह उठकर वन का रास्ता साफ़ करती हैं, ताकि जब राम जी आएँ तो उनके पैरों में कोई काँटा न चुभे। वे वन से चुन-चुन कर मीठे बेर लाती हैं और अपनी टोकरी (छबरिया) भरकर रखती हैं। उनकी यही पुकार है कि हे प्रभु! इस दुखियारी दासी की सुध (खबर) लीजिए और अपनी मेहर (कृपा) की नज़र मुझ पर डालिए।

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Frequently Asked Questions

"रोज सवेरे वन में जाकर, रस्ता साफ कराती हूँ" से शबरी जी का क्या भाव है?

माता शबरी को उनके गुरु मतंग ऋषि ने वचन दिया था कि एक दिन भगवान श्री राम उनकी कुटिया पर ज़रूर आएंगे। इसी अटल विश्वास के साथ शबरी जी प्रतिदिन सुबह उठकर अपने आश्रम और वन का रास्ता साफ़ करती थीं, ताकि जब उनके सुकोमल प्रभु राम उस रास्ते से आएं, तो उनके पैरों में वन का कोई काँटा या कंकड़ न चुभ जाए।

भजन में "मैं शबरी भीलनी की जाई" का क्या अर्थ है?

'भीलनी' का अर्थ है भील (एक आदिवासी) जाति की महिला, और 'जाई' का अर्थ है जन्मी हुई पुत्री। माता शबरी विनम्रतापूर्वक कहती हैं कि मैं एक साधारण भील परिवार में जन्मी हूँ, इसलिए मुझे पूजा-पाठ या भजन के कोई बड़े नियम नहीं आते, मुझे तो बस प्रभु से प्रेम करना आता है।

"रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया" भजन रामायण के किस प्रसंग पर आधारित है?

यह अत्यंत मार्मिक भजन रामायण के 'शबरी प्रसंग' पर आधारित है। इसमें माता शबरी (जो मतंग ऋषि के आश्रम में रहती थीं) द्वारा भगवान श्री राम के दर्शन के लिए किए गए उनके जीवन भर के लंबे इंतज़ार और अटूट भक्ति का वर्णन किया गया है।

Categories: Pad, Ramayan Prasang, Ram Ji

Deity: Shri Ram

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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