मैं राधा वल्लभ की, राधा वल्लभ मेरे (श्री राधा वल्लभ संकीर्तन) लिरिक्स
Main Radha Vallabh Ki Radha Vallabh Mere Lyrics - Braj Ras Sankirtan
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अर्थ (Bhavarth)
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Frequently Asked Questions
"मैं राधा वल्लभ की, राधा वल्लभ मेरे" संकीर्तन का मूल भाव क्या है?
इस अत्यंत मधुर संकीर्तन का मूल भाव 'पूर्ण शरणागति' और 'माधुर्य रस' है। इसमें जीवात्मा यह स्वीकार करती है कि उसका इस नश्वर संसार से कोई नाता नहीं है, वह हमेशा से भगवान श्री कृष्ण (राधा वल्लभ) की दासी है और कई जन्मों तक भटकने के बाद अंततः उन्हीं की शरण में लौट आई है।
"राधा वल्लभ" किसे कहा जाता है?
'राधा वल्लभ' का अर्थ है 'श्री राधा के प्राणों के प्रियतम', अर्थात स्वयं भगवान श्री कृष्ण। यह स्वरूप विशेष रूप से वृंदावन के 'श्री राधा वल्लभ संप्रदाय' में पूजा जाता है, जहाँ राधा रानी को सर्वोपरि माना गया है।
"जय जय राधावल्लभ श्री हरिवंश" मंत्र में 'श्री हरिवंश' कौन हैं?
'श्री हरिवंश' (श्री हित हरिवंश महाप्रभु) 16वीं शताब्दी के एक महान संत और 'श्री राधा वल्लभ संप्रदाय' के संस्थापक थे। मान्यता है कि वे भगवान श्री कृष्ण की बाँसुरी (वंशी) के अवतार थे। इस संप्रदाय के अनुयायी राधा वल्लभ जी के नाम के साथ सदा अपने गुरु श्री हरिवंश जी का नाम जपते हैं।
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Categories: Braj Ras, Shri Radha Rani, Krishna Bhajan
Deity: Shri Krishna
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मोहित तरकरMohit Tarkar
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