राधा रानी को कन्हैया बड़ो प्यारो (ब्रज रस) कृष्ण भजन लिरिक्स
Radha Rani Ko Kanhaiya Bado Pyaro Lyrics - Indresh Ji Maharaj
राधा रानी को, श्यामा प्यारी को, राधा रानी को कन्हैया बड़ो प्यारो, मनमोहन मुरली वारो॥
घर-घर माखन जाए चुरावे, माखन खाए, दही फैलावे। माखन-चोरी हू पे लागे बड़ो प्यारो, मनमोहन मुरली वारो॥
पनघट पे जल भरन न देवें, गागर भरी शीश लुढ़कावे। गागर फोरे हू पे लागे बड़ो प्यारो, मनमोहन मुरली वारो॥
गली सांकरी घेरे नित ही, दधि को दान ले बरबस ही। लूटे मटकी हू पे लागे बड़ो प्यारो, मनमोहन मुरली वारो॥
कुंज गलिन में जो मिल जावे, बैयाँ पकड़ के रार मचावे। रार करत पे लागे बड़ो प्यारो, मनमोहन मुरली वारो॥

अर्थ (Bhavarth)
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Frequently Asked Questions
"राधा रानी को कन्हैया बड़ो प्यारो" भजन में कान्हा की किन लीलाओं का वर्णन है?
इस अत्यंत मधुर ब्रज रस भजन में भगवान श्री कृष्ण की नटखट बाल लीलाओं का वर्णन है, जिनमें मुख्य रूप से उनकी 'माखन चोरी लीला', पनघट पर गोपियों की 'मटकी फोड़ना', तंग गलियों में 'दही का दान' (टैक्स) माँगना और राधा रानी की कलाई पकड़कर मीठी तकरार (रार) करना शामिल है।
"दधि को दान ले बरबस ही" का क्या अर्थ है?
'दधि' का अर्थ है दही और 'बरबस' का अर्थ है ज़बरदस्ती। ब्रज की लीलाओं के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण अपने सखाओं के साथ तंग (सांकरी) गलियों में गोपियों का रास्ता रोक लेते थे और आगे जाने देने के बदले में ज़बरदस्ती उनसे उनके माखन और दही का 'दान' (कर या टैक्स) माँगते थे। इसे ब्रज में 'दान लीला' कहा जाता है।
इस भजन को किस प्रसिद्ध कथावाचक ने गाया है?
राधा-कृष्ण के निश्छल प्रेम और ब्रज की मीठी लीलाओं से भरे इस भजन को प्रसिद्ध संत और कथावाचक पूज्य श्री इन्द्रेश जी महाराज ने अपनी अत्यंत सुमधुर और भावपूर्ण आवाज़ में गाया है।
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Categories: Braj Ras, Krishna Bhajan
Deity: Shri Radha-Krishna
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मोहित तरकरMohit Tarkar
संस्थापक एवं मुख्य संपादक • Founder & Chief Editor
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