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होली खेले श्याम संवरिया रंग डारो है बीच बजरिया (होली रसिया) लिरिक्स

Holi Khele Shyam Sanwariya Rang Daaro Hai Beech Bajariya Lyrics Lyrics

Location: Sonkh, Magorra (Mathura)

तर्ज (Tune): ब्रज की पारंपरिक होली (रसिया)

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होली खेले श्याम संवरिया रंग डारो है बीच बजरिया (होली रसिया) लिरिक्स

HOLI KHELE SHYAM SANWARIYA RANG DAARO HAI BEECH BAJARIYA RASIYA

होली खेले श्याम संवरिया, रंग डारो है बीच बजरिया। होली को है बड़ो खिलैया, रंग डारी रेशम साड़ी, ग्वाल सखा सब संग बुलाय के, मारी ऐसी पिचकारी, और मेरी भीजी सबरी घघरिया, रंग डारो है बीच बजरिया। नाय मानू मैं आज कोई की, वर्ष दिना को मेला है, लाल भी डालूँ, हरो भी डालूँ, लायो भरके थैला है। ओ तेरी लेलूँ सबरी खबरिया, रंग डारो है बीच बजरिया। आज तोय हम मजा चखा दें, काहे करे उदासी है, धूम मचा दें या ब्रज में, हम तो पक्के ब्रजवासी। ओ हम कहते हैं श्याम संवरिया, रंग डारो है बीच बजरिया। होली खेले श्याम संवरिया, रंग डारो है बीच बजरिया।

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HINDI BHAJAN
होली खेले श्याम संवरिया,
रंग डारो है बीच बजरिया।

होली को है बड़ो खिलैया, रंग डारी रेशम साड़ी,
ग्वाल सखा सब संग बुलाय के, मारी ऐसी पिचकारी,
और मेरी भीजी सबरी घघरिया, रंग डारो है बीच बजरिया।

नाय मानू मैं आज कोई की, वर्ष दिना को मेला है,
लाल भी डालूँ, हरो भी डालूँ, लायो भरके थैला है।
ओ तेरी लेलूँ सबरी खबरिया, रंग डारो है बीच बजरिया।

आज तोय हम मजा चखा दें, काहे करे उदासी है,
धूम मचा दें या ब्रज में, हम तो पक्के ब्रजवासी।
ओ हम कहते हैं श्याम संवरिया, रंग डारो है बीच बजरिया।

होली खेले श्याम संवरिया,
रंग डारो है बीच बजरिया।
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अर्थ (Bhavarth)

यह फाल्गुन मास का एक अत्यंत नटखट और मस्ती भरा रसिया है, जिसमें गोपी और कन्हैया के बीच होली की नोंक-झोंक का वर्णन है। गोपी शिकायत करती है कि साँवले श्याम ने बीच बाज़ार (बजरिया) में उस पर रंग डाल दिया है। कन्हैया होली का बहुत बड़ा 'खिलैया' (खिलाड़ी) है; उसने अपने ग्वाल-बालों के साथ मिलकर ऐसी पिचकारी मारी कि गोपी की रेशमी साड़ी और घघरिया पूरी तरह भीग गई। कन्हैया बड़े ही प्रेम से कहता है कि "मैं आज किसी की नहीं मानूंगा क्योंकि यह साल भर में एक बार आने वाला त्यौहार (वर्ष दिना को मेला) है। मैं तो थैला भरकर लाल और हरा रंग लाया हूँ।" अंत में पक्के ब्रजवासी होने के नाते पूरे ब्रज में होली की धूम मचाने की बात कही गई है।

FAQs

Q1: 'होली खेले श्याम संवरिया' रसिया में गोपी कन्हैया की क्या शिकायत कर रही है?

A1: गोपी शिकायत कर रही है कि कन्हैया ने बीच बाज़ार (बजरिया) में उसे घेर कर उस पर रंग डाल दिया। उसने अपने दोस्तों (ग्वाल सखा) के साथ मिलकर ऐसी पिचकारी मारी कि गोपी की रेशमी साड़ी और पूरी घघरिया भीग गई।

Q2: श्री कृष्ण गोपी की बात मानने से इंकार क्यों कर देते हैं?

A2: श्री कृष्ण गोपी से कहते हैं कि वह आज किसी की कोई बात नहीं मानेंगे क्योंकि होली साल भर में एक बार आने वाला त्यौहार (वर्ष दिना को मेला) है, इसलिए वे जी भरकर रंग खेलेंगे।

Q3: कन्हैया होली खेलने के लिए अपने साथ क्या-क्या लेकर आए हैं?

A3: कन्हैया अपने ग्वाल-बालों (सखाओं), रंग भरी पिचकारी और लाल-हरे रंग (गुलाल) से भरा हुआ पूरा थैला लेकर बीच बाज़ार में होली खेलने आए हैं।

Categories: Phalgun Bhajan, Holi Rasiya, Braj Ras, Krishna Bhajan

Deity: Shri Krishna

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