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मोहे रंग डालो नंदलाल (मन बसिया गोविंद गोपाल) भजन लिरिक्स

Mohe Rang Daalo Nandlal Lyrics Lyrics

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मोहे रंग डालो नंदलाल (मन बसिया गोविंद गोपाल) भजन लिरिक्स

MOHE RANG DAALO NANDLAL MAN BASIYA GOVIND GOPAL BHAJAN

(सरगम: सा नि धा ग नि नि नि धा धा नि सा ग म ग सा) मन बसिया गोविंद गोपाल, मन बसिया गोविंद गोपाल। मोहे रंग डालो नंदलाल, रंग डालो नंदलाल। मोहे रंग डालो नंदलाल, रंग डालो नंदलाल॥ मैं जोगन हूँ तोरी सांवरिया, आज सुना दो फिर से मुरलिया। मैं जोगन हूँ तोरी जिंदगानी, आज सुना दो फिर से मुरलिया। कान गूंजे रे ऐसी बेमिसाल, कान गूंजे रे ऐसी बेमिसाल। मोहे रंग डालो नंदलाल, रंग डालो नंदलाल॥ (संकीर्तन) कृष्ण कृष्ण राधे राधे, कृष्ण कृष्ण राधे राधे। कृष्ण कृष्ण राधे राधे, कृष्ण कृष्ण राधे राधे॥ छोड़ूँ ना चौखट, वापस ना जाऊं, तोरे रंग में खुद को रंगाऊं। छोड़ूँ ना चौखट, वापस ना जाऊं, तोरे रंग में खुद को रंगाऊं। अब सांवला रंगो या तुम लाल, अब सांवला रंगो या तुम लाल। मोहे रंग डालो नंदलाल, रंग डालो नंदलाल॥ मदन मोहन श्यामा बनवारी, पल-पल जाऊं तोपे बलिहारी। मदन मोहन श्यामा बनवारी, पल-पल जाऊं तोपे बलिहारी। ऐसी कृपा करो नंदलाल, ऐसी कृपा करो नंदलाल। मोहे रंग डालो नंदलाल, रंग डालो नंदलाल॥

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(सरगम: सा नि धा ग नि नि नि धा धा नि सा ग म ग सा)

मन बसिया गोविंद गोपाल,
मन बसिया गोविंद गोपाल।
मोहे रंग डालो नंदलाल,
रंग डालो नंदलाल।
मोहे रंग डालो नंदलाल,
रंग डालो नंदलाल॥

मैं जोगन हूँ तोरी सांवरिया,
आज सुना दो फिर से मुरलिया।
मैं जोगन हूँ तोरी जिंदगानी,
आज सुना दो फिर से मुरलिया।
कान गूंजे रे ऐसी बेमिसाल,
कान गूंजे रे ऐसी बेमिसाल।
मोहे रंग डालो नंदलाल,
रंग डालो नंदलाल॥

(संकीर्तन)
कृष्ण कृष्ण राधे राधे,
कृष्ण कृष्ण राधे राधे।
कृष्ण कृष्ण राधे राधे,
कृष्ण कृष्ण राधे राधे॥

छोड़ूँ ना चौखट, वापस ना जाऊं,
तोरे रंग में खुद को रंगाऊं।
छोड़ूँ ना चौखट, वापस ना जाऊं,
तोरे रंग में खुद को रंगाऊं।
अब सांवला रंगो या तुम लाल,
अब सांवला रंगो या तुम लाल।
मोहे रंग डालो नंदलाल,
रंग डालो नंदलाल॥

मदन मोहन श्यामा बनवारी,
पल-पल जाऊं तोपे बलिहारी।
मदन मोहन श्यामा बनवारी,
पल-पल जाऊं तोपे बलिहारी।
ऐसी कृपा करो नंदलाल,
ऐसी कृपा करो नंदलाल।
मोहे रंग डालो नंदलाल,
रंग डालो नंदलाल॥
मोहे रंग डालो नंदलाल (मन बसिया गोविंद गोपाल) भजन लिरिक्स Video

अर्थ (Bhavarth)

यह भगवान श्री कृष्ण के प्रति पूर्ण समर्पण और भक्ति के रंग में रंग जाने का एक अत्यंत भावपूर्ण भजन है। इसकी शुरुआत शास्त्रीय सरगम से होती है, जो इसे और भी मधुर बनाती है। भजन में एक भक्त (जोगन) कन्हैया से प्रार्थना करती है कि "हे नंदलाल! मुझे अपने प्रेम के रंग में रंग दो।" वह कन्हैया की मुरली की बेमिसाल धुन सुनने के लिए आतुर है और कहती है कि "हे कान्हा! मैं तुम्हारी चौखट छोड़कर कहीं वापस नहीं जाना चाहती, मुझे अपने ही रंग में रंग लो, चाहे वह रंग साँवला हो या लाल।" अंत में भक्त मदन-मोहन रूपी कन्हैया पर पल-पल न्योछावर (बलिहारी) होने की कामना करता है।

FAQs

Q1: 'मोहे रंग डालो नंदलाल' भजन का मुख्य भाव क्या है?

A1: इस भजन का मुख्य भाव श्री कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण समर्पण है। इसमें भक्त स्वयं को कन्हैया की 'जोगन' मानकर उनके प्रेम के रंग (साँवले या लाल) में रंग जाने की प्रार्थना कर रहा है।

Q2: भजन में जोगन कन्हैया की चौखट क्यों नहीं छोड़ना चाहती?

A2: जोगन कन्हैया के प्रेम और भक्ति में इतनी मग्न हो चुकी है कि उसे अब यह सांसारिक जीवन रास नहीं आता। वह हमेशा के लिए कन्हैया की चौखट पर रहकर खुद को उन्हीं के रंग में रंगा लेना चाहती है।

Q3: 'पल-पल जाऊं तोपे बलिहारी' का क्या अर्थ है?

A3: ब्रज भाषा में 'बलिहारी' जाने का अर्थ है अपना सर्वस्व न्योछावर कर देना या वारी-वारी जाना। भक्त कह रहा है कि हे मदन-मोहन बनवारी, मैं हर पल तुम्हारे इस सुंदर स्वरूप पर अपना सब कुछ कुर्बान करता हूँ।

Categories: Krishna Bhajan, Phalgun Bhajan, Holi Rasiya

Deity: Shri Krishna

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