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आओ पूरी, हलवा-चने हम बनाएँ (कन्या पूजन) भजन लिरिक्स - पारुल गुप्ता

Aao Poori Halwa Chane Hum Banayein Lyrics - Parul Gupta

Singer:
Writer:
HINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARI

आओ पूरी, हलवा-चने हम बनाएँ (कन्या पूजन) भजन लिरिक्स - पारुल गुप्ता

AAO POORI HALWA CHANE HUM BANAYEIN LYRICS PARUL GUPTA

(मुखड़ा) आओ पूरी, हलवा-चने हम बनाएँ, माँ की ज्योत जलाएँ 🙏 कन्याएँ आई हैं घर के द्वार, उनको भोग लगाएँ॥ (अंतरा 1) माता का रूप लेकर आईं, खुशियाँ साथ वो लाई। छोटे-छोटे कदमों में देखो, माँ की छवि समाई॥ प्यार से चरण धोकर उनके, दिल से शीश झुकाएँ। आओ पूरी, हलवा-चने हम बनाएँ, माँ की ज्योत जलाएँ॥ (अंतरा 2) लाल चुनरिया ओढ़े आईं, मुस्कान में है प्रकाश। इनमें ही बसती है अम्बे, इनसे पूरी हर आस॥ माथे तिलक लगाकर इनके, फूलों से सजाएँ। कन्याएँ आई हैं घर के द्वार, उनको भोग लगाएँ॥ (अंतरा 3) नौ रूपों में आई मैया, नौ दुर्गा का वास। जो भी श्रद्धा से पूजे इनको, पूरी होती हर आस॥ भक्ति से झोली भर जाएगी, माँ कृपा बरसाएँ। आओ पूरी, हलवा-चने हम बनाएँ, माँ की ज्योत जलाएँ॥ (अंतरा 4) ढोल-मंजीरे गूँज रहे हैं, घर-घर है उल्लास। जय माता दी के जयकारों से, गूँज उठा आकाश॥ दीप जलाकर आरती गाओ, माँ को शीश नवाएँ। कन्याएँ आई हैं घर के द्वार, उनको भोग लगाएँ॥

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(मुखड़ा) आओ पूरी, हलवा-चने हम बनाएँ, माँ की ज्योत जलाएँ 🙏 कन्याएँ आई हैं घर के द्वार, उनको भोग लगाएँ॥

(अंतरा 1) माता का रूप लेकर आईं, खुशियाँ साथ वो लाई। छोटे-छोटे कदमों में देखो, माँ की छवि समाई॥ प्यार से चरण धोकर उनके, दिल से शीश झुकाएँ। आओ पूरी, हलवा-चने हम बनाएँ, माँ की ज्योत जलाएँ॥

(अंतरा 2) लाल चुनरिया ओढ़े आईं, मुस्कान में है प्रकाश। इनमें ही बसती है अम्बे, इनसे पूरी हर आस॥ माथे तिलक लगाकर इनके, फूलों से सजाएँ। कन्याएँ आई हैं घर के द्वार, उनको भोग लगाएँ॥

(अंतरा 3) नौ रूपों में आई मैया, नौ दुर्गा का वास। जो भी श्रद्धा से पूजे इनको, पूरी होती हर आस॥ भक्ति से झोली भर जाएगी, माँ कृपा बरसाएँ। आओ पूरी, हलवा-चने हम बनाएँ, माँ की ज्योत जलाएँ॥

(अंतरा 4) ढोल-मंजीरे गूँज रहे हैं, घर-घर है उल्लास। जय माता दी के जयकारों से, गूँज उठा आकाश॥ दीप जलाकर आरती गाओ, माँ को शीश नवाएँ। कन्याएँ आई हैं घर के द्वार, उनको भोग लगाएँ॥

आओ पूरी, हलवा-चने हम बनाएँ (कन्या पूजन) भजन लिरिक्स - पारुल गुप्ता Video

अर्थ (Bhavarth)

Gemini said जय माता दी! पारुल गुप्ता (Parul Gupta) द्वारा रचित, संगीतबद्ध और गाया गया यह "आओ पूरी, हलवा-चने हम बनाएँ" एक अत्यंत ही मधुर और उल्लास से भरा नया 'कन्या पूजन' भजन है। अष्टमी और नवमी के दिन घर में पधारीं कन्याओं के स्वागत और भोग के लिए यह एकदम परफेक्ट गीत है। यह अत्यंत उल्लासपूर्ण भजन नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि पर होने वाले 'कन्या पूजन' (Kanya Pujan) का बहुत ही सुंदर वर्णन करता है। 1. माता का साक्षात रूप और उनका स्वागत: भजन के आरंभ में भक्त खुशी से कहते हैं कि चलो पूरी, हलवा और काले चने का प्रसाद बनाएँ और माता की अखंड ज्योत जलाएँ। हमारे घर के द्वार पर जो छोटी-छोटी कन्याएँ आई हैं, वे कोई और नहीं बल्कि साक्षात माता रानी का ही रूप हैं। उनके छोटे-छोटे कदमों में माँ दुर्गा की छवि समाई हुई है। 2. चरण वंदना और श्रृंगार: भक्त बड़े ही प्रेम और आदर से उन कन्याओं के चरण धोते हैं और उनके आगे शीश झुकाते हैं। लाल चुनरी ओढ़े हुए इन कन्याओं की मुस्कान में एक दिव्य प्रकाश है। उनके माथे पर कुमकुम का तिलक लगाकर और उन्हें फूलों से सजाकर भोग लगाया जा रहा है, क्योंकि इन्हीं में अम्बे माता बसती हैं। 3. नवदुर्गा का वास और घर-घर उल्लास: इन छोटी कन्याओं में नवदुर्गा के नौ स्वरूपों का वास माना गया है। जो भी श्रद्धा से इनकी पूजा करता है, उसकी सारी मुरादें (आस) पूरी हो जाती हैं। माता की कृपा से भक्तों की झोली भर जाती है। चारों तरफ ढोल-मंजीरे गूँज रहे हैं और 'जय माता दी' के जयकारों से पूरा आकाश गूँज उठा है। यह भजन हमें सिखाता है कि कन्याओं के रूप में मातृशक्ति का सम्मान ही सच्ची देवी पूजा है।

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Frequently Asked Questions

"आओ पूरी, हलवा-चने हम बनाएँ" भजन की गायिका और लेखिका कौन हैं?

कन्या पूजन को समर्पित यह अत्यंत मधुर और उल्लासपूर्ण भजन प्रसिद्ध भजन गायिका पारुल गुप्ता (Parul Gupta) द्वारा लिखा, संगीतबद्ध किया गया और गाया गया है।

कन्या पूजन में मुख्य रूप से क्या प्रसाद (भोग) लगाया जाता है?

हिंदू धर्म की मान्यताओं और इस भजन के अनुसार, नवरात्रि (अष्टमी और नवमी) के कन्या पूजन में मुख्य रूप से माता को और कन्याओं को पूरी, सूजी का हलवा और काले चने का पारंपरिक भोग लगाया जाता है।

भजन में "छोटे-छोटे कदमों में देखो, माँ की छवि समाई" का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है कि घर के आँगन में जब छोटी-छोटी कन्याएँ अपने नन्हे कदमों से चलकर आती हैं, तो भक्तों को उनमें साक्षात जगत जननी माँ दुर्गा का रूप (छवि) दिखाई देता है। कन्याओं को देवी का साक्षात स्वरूप माना गया है।

Categories: Navratri Special, Mata Ke Bhajan

Deity: Mata Rani

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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