हे जगतारिणि शोकनिवारिणि, सिंह-सवारी को साज के आओ (देवी स्तुति) लिरिक्स
He Jagtarini Shok Nivarini Lyrics (Devi Stuti) Lyrics
हे जगतारिणि शोकनिवारिणि, सिंह-सवारी को साज के आओ। श्रद्धा का पुष्प बिछा है मां राह में, सेवा को मेरे सौभाग्य बनाओ।। है रूखा-सूखा जो पुत्र के हाथ में, प्रेम से मां उसे भोग लगाओ। प्यासे हैं नैन मां दर्श को तेरे, कृपा की छवि एक बार दिखाओ।।
रूप अनेक हैं मैय्या तुम्हारे, दुर्गा तुम्हीं और हो तुम्हीं काली। दक्षसुता तुम्हीं, शंभु-प्रिया सती, हो तुम ही जग की रखवाली।। झोली फैलाकर जो आया है द्वार पे, भक्त वो मात गया नहीं खाली। धर्म की ज्योति तुम्हीं से प्रकाशित, कोटि प्रणाम तुम्हें जोतावाली।।
पाटन की तुम ही हो पाटेश्वरी, मां शीतला तुम दंतकुमारी। चिंतानिवारिणि मां चिंतपूर्णी हो, देवी मनसा मैय्या वैष्णो प्यारी।। सब शक्तिपीठों में शक्ति है एक ही, मां अद्भुत बड़ी लीला तुम्हारी। देव-त्रिदेव करें जयकार, सुनो विनती जगदंब हमारी।।
हे महादेवी तुम्हारे ही तेज से, सूर्य-शशि सब तेज हैं पाते। सागर पखार के हे अंबिका, हैं मन में अतिशय हर्षाते।। तुम हंस के जब देखती हो, तो सूखे हुए गुल भी खिल जाते। शेष सहस्र मुखों से कहें यश, वेद तो भाव से शीश झुकाते।।
मंगलकारिणि संकटहारिणि, पाप-पिशाच को मार भगाओ। जैसे मिटाती हो दुष्ट जनों को मां, वैसे मेरे दुःख-दोष मिटाओ।। सिद्धियों की हो भंडार भवानी, मेरे बिगड़े सब काज बनाओ। नाम जपूँ निशि-वासर तेरा ही, भक्ति दे मां, भ्रम फंद छुड़ाओ।।
श्रीधर-सा अनुराग नहीं है, ये सोच के मैय्या जी छोड़ न देना। नाता अटूट है मां और बेटे का, नाता ये मैय्या जी तोड़ न देना।। ध्यानू-सा ध्यान नहीं कर पाया मैं, हूं भटका—मुंह मोड़ न लेना। जैसे भी हूं अब दास हूं तेरा, मैं आस की पोटली फोड़ न देना।।
पूजा में नित्य चढ़े चरणों में जो, फूल बना दो मुझे वो मैय्या। दृष्टि करो अपने इस दास पे, चाहता हूं चरणों की मैं छैय्या।। आज फंसा मझधार में हूं मैं, मां आके निकालो मेरी अब नैय्या। रक्षा करो शरणागत की, सर्वेश्वरी दीन की लाज बचैय्या।।

अर्थ (Bhavarth)
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Frequently Asked Questions
Q1: स्तुति में "श्रीधर-सा अनुराग नहीं है" का क्या तात्पर्य है?
A1: 'पंडित श्रीधर' माता वैष्णो देवी के एक अत्यंत परम भक्त थे, जिनके सच्चे प्रेम (अनुराग) के कारण माता ने साक्षात दर्शन देकर उनके घर विशाल भंडारा संपन्न करवाया था। भक्त कह रहा है कि हे माँ, यद्यपि मेरे अंदर श्रीधर जैसी उत्तम भक्ति नहीं है, फिर भी मुझे अपना बेटा समझकर अपना लेना।
Q2: भजन में "ध्यानू-सा ध्यान नहीं कर पाया मैं" किस कथा की ओर संकेत करता है?
A2: 'ध्यानू भगत' माता ज्वाला जी के परम उपासक थे, जिन्होंने मुग़ल सम्राट अकबर के दरबार में माता की महिमा सिद्ध करने के लिए अपना शीश (सिर) काटकर माता को अर्पित कर दिया था। भक्त अपनी भक्ति की तुलना ध्यानू के सर्वोच्च समर्पण से करते हुए अपनी कमियाँ स्वीकार कर रहा है।
Q3: "सब शक्तिपीठों में शक्ति है एक ही" का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?
A3: हिंदू धर्म में 51 शक्तिपीठ माने गए हैं (जैसे वैष्णो देवी, चिंतपूर्णी, कामख्या आदि)। इस पंक्ति का अर्थ है कि यद्यपि माता के नाम और मंदिर अलग-अलग हैं, लेकिन उन सभी स्थानों पर विराजमान परम ऊर्जा और शक्ति (आदि-पराशक्ति) एक ही है।
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Categories: Stotram, Mata Ke Bhajan, Navratri Special
Deity: Mata Rani
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मोहित तरकरMohit Tarkar
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