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मेरी अँखियों के सामने ही रहना, ओ शेरों वाली जगदम्बे (लखबीर सिंह लक्खा) भजन लिरिक्स

Meri Ankhiyon Ke Samne Hi Rehna Lyrics (Lakhbir Singh Lakkha) Lyrics

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मेरी अँखियों के सामने ही रहना, ओ शेरों वाली जगदम्बे (लखबीर सिंह लक्खा) भजन लिरिक्स

MERI ANKHIYON KE SAMNE HI REHNA LYRICS LAKHBIR SINGH LAKKHA

मेरी अँखियों के सामने ही रहना, ओ शेरों वाली जगदम्बे। मेरी अँखियों के सामने ही रहना, ओ शेरों वाली जगदम्बे। मेरी अँखियों के सामने ही रहना, ओ शेरों वाली जगदम्बे। मेरी अँखियों के सामने ही रहना, ओ शेरों वाली जगदम्बे। हम तो हैं चाकर, मैया, तेरे दरबार के, हम तो हैं चाकर, मैया, तेरे दरबार के। हम तो हैं चाकर, मैया, तेरे दरबार के, हम तो हैं चाकर, मैया, तेरे दरबार के। हो, भूखे हैं हम तो, मैया, बस तेरे प्यार के। मेरी अँखियों के सामने ही रहना, ओ शेरों वाली जगदम्बे॥ विनती हमारी भी अब करो मंज़ूर, माँ, विनती हमारी भी अब करो मंज़ूर, माँ। विनती हमारी भी अब करो मंज़ूर, माँ, विनती हमारी भी अब करो मंज़ूर, माँ। हो, चरणों से हमको कभी करना न दूर, माँ। मेरी अँखियों के सामने ही रहना, ओ शेरों वाली जगदम्बे॥ मुझे जान के अपना ही बालक, सब भूल तू मेरी भुला देना, मुझे जान के अपना ही बालक, सब भूल तू मेरी भुला देना। मुझे जान के अपना ही बालक, सब भूल तू मेरी भुला देना, मुझे जान के अपना ही बालक, सब भूल तू मेरी भुला देना। ओ शेरों वाली जगदम्बे, आँचल में मुझे छुपा लेना। मेरी अँखियों के सामने ही रहना, ओ शेरों वाली जगदम्बे॥ तुम हो शिवजी की शक्ति, मैया शेरों वाली, तुम हो शिवजी की शक्ति, मैया शेरों वाली। तुम हो शिवजी की शक्ति, मेरे भोले की शक्ति, मैया शेरों वाली, तुम हो शिवजी की शक्ति, मेरे भोले की शक्ति, मैया शेरों वाली। तुम हो दुर्गा, हो अंबे मैया, तुम हो काली, तुम हो दुर्गा, हो अंबे मैया, तुम हो काली। बन के अमृत की धार सदा बहना, ओ शेरों वाली जगदम्बे। मेरी अँखियों के सामने ही रहना, ओ शेरों वाली जगदम्बे॥ तेरे बालक को तभी, माँ, सबर आए, तेरे बालक को तभी, माँ, सबर आए। तेरे बालक को, मैया, तेरे बालक को तभी, माँ, सबर आए, तेरे बालक को तभी, माँ, सबर आए। जहाँ देखूँ मैं, तू ही तू नज़र आए, जहाँ देखूँ मैं, तू ही तू नज़र आए। मुझे इसके सिवा कुछ न कहना, ओ शेरों वाली जगदम्बे। मेरी अँखियों के सामने ही रहना, ओ शेरों वाली जगदम्बे॥ दे दो शर्मा को भक्ति का दान, मैया जी, दे दो शर्मा को भक्ति का दान, मैया जी। अपने शर्मा को, माता, अपने शर्मा को भक्ति का दान, मैया जी, दे दो भक्तों को भक्ति का दान, मैया जी। लक्खा गाता रहे तेरा गुणगान, मैया जी, लक्खा गाता रहे तेरा गुणगान, मैया जी। है भजन तेरा भक्तों का गहना, ओ शेरों वाली जगदम्बे॥ मेरी अँखियों के सामने ही रहना, ओ शेरों वाली जगदम्बे। मेरी अँखियों के सामने ही रहना, ओ शेरों वाली जगदम्बे। मेरी अँखियों के सामने ही रहना, ओ मेहरा वाली जगदम्बे। ओ शेरों वाली जगदम्बे, ओ मेहरा वाली जगदम्बे॥

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मेरी अँखियों के सामने ही रहना, ओ शेरों वाली जगदम्बे। मेरी अँखियों के सामने ही रहना, ओ शेरों वाली जगदम्बे। मेरी अँखियों के सामने ही रहना, ओ शेरों वाली जगदम्बे। मेरी अँखियों के सामने ही रहना, ओ शेरों वाली जगदम्बे।

हम तो हैं चाकर, मैया, तेरे दरबार के, हम तो हैं चाकर, मैया, तेरे दरबार के। हम तो हैं चाकर, मैया, तेरे दरबार के, हम तो हैं चाकर, मैया, तेरे दरबार के। हो, भूखे हैं हम तो, मैया, बस तेरे प्यार के। मेरी अँखियों के सामने ही रहना, ओ शेरों वाली जगदम्बे॥

विनती हमारी भी अब करो मंज़ूर, माँ, विनती हमारी भी अब करो मंज़ूर, माँ। विनती हमारी भी अब करो मंज़ूर, माँ, विनती हमारी भी अब करो मंज़ूर, माँ। हो, चरणों से हमको कभी करना न दूर, माँ। मेरी अँखियों के सामने ही रहना, ओ शेरों वाली जगदम्बे॥

मुझे जान के अपना ही बालक, सब भूल तू मेरी भुला देना, मुझे जान के अपना ही बालक, सब भूल तू मेरी भुला देना। मुझे जान के अपना ही बालक, सब भूल तू मेरी भुला देना, मुझे जान के अपना ही बालक, सब भूल तू मेरी भुला देना। ओ शेरों वाली जगदम्बे, आँचल में मुझे छुपा लेना। मेरी अँखियों के सामने ही रहना, ओ शेरों वाली जगदम्बे॥

तुम हो शिवजी की शक्ति, मैया शेरों वाली, तुम हो शिवजी की शक्ति, मैया शेरों वाली। तुम हो शिवजी की शक्ति, मेरे भोले की शक्ति, मैया शेरों वाली, तुम हो शिवजी की शक्ति, मेरे भोले की शक्ति, मैया शेरों वाली। तुम हो दुर्गा, हो अंबे मैया, तुम हो काली, तुम हो दुर्गा, हो अंबे मैया, तुम हो काली। बन के अमृत की धार सदा बहना, ओ शेरों वाली जगदम्बे। मेरी अँखियों के सामने ही रहना, ओ शेरों वाली जगदम्बे॥

तेरे बालक को तभी, माँ, सबर आए, तेरे बालक को तभी, माँ, सबर आए। तेरे बालक को, मैया, तेरे बालक को तभी, माँ, सबर आए, तेरे बालक को तभी, माँ, सबर आए। जहाँ देखूँ मैं, तू ही तू नज़र आए, जहाँ देखूँ मैं, तू ही तू नज़र आए। मुझे इसके सिवा कुछ न कहना, ओ शेरों वाली जगदम्बे। मेरी अँखियों के सामने ही रहना, ओ शेरों वाली जगदम्बे॥

दे दो शर्मा को भक्ति का दान, मैया जी, दे दो शर्मा को भक्ति का दान, मैया जी। अपने शर्मा को, माता, अपने शर्मा को भक्ति का दान, मैया जी, दे दो भक्तों को भक्ति का दान, मैया जी। लक्खा गाता रहे तेरा गुणगान, मैया जी, लक्खा गाता रहे तेरा गुणगान, मैया जी। है भजन तेरा भक्तों का गहना, ओ शेरों वाली जगदम्बे॥ मेरी अँखियों के सामने ही रहना, ओ शेरों वाली जगदम्बे। मेरी अँखियों के सामने ही रहना, ओ शेरों वाली जगदम्बे। मेरी अँखियों के सामने ही रहना, ओ मेहरा वाली जगदम्बे। ओ शेरों वाली जगदम्बे, ओ मेहरा वाली जगदम्बे॥

मेरी अँखियों के सामने ही रहना, ओ शेरों वाली जगदम्बे (लखबीर सिंह लक्खा) भजन लिरिक्स Video

अर्थ (Bhavarth)

(विस्तृत भावार्थ): यह भेंट एक सच्चे भक्त की माता रानी से सबसे सुंदर और निस्वार्थ पुकार है। भक्त संसार की किसी वस्तु की कामना नहीं करता, बल्कि केवल माता के निरंतर दर्शन चाहता है। इस भावपूर्ण स्तुति को तीन मुख्य चरणों में समझा जा सकता है: 1. निरंतर दर्शन की लालसा और क्षमा याचना: भक्त माता रानी से विनती करते हुए कहता है कि "हे शेरों वाली जगदम्बे! तुम हमेशा मेरी आँखों (अँखियों) के सामने रहना, ताकि मैं पल-पल तुम्हारे दर्शन कर सकूँ।" वह स्वयं को माता के दरबार का एक साधारण सा सेवक (चाकर) मानता है, जो धन-दौलत का नहीं, बल्कि केवल माता के सच्चे 'प्यार' का भूखा है। भक्त माता से एक शिशु के समान प्रार्थना करता है कि "मुझे अपना ही नादान बालक समझकर मेरी सारी भूल-चूक माफ कर देना और हमेशा मुझे अपने ममतामयी आँचल में छुपा कर रखना, कभी अपने चरणों से दूर मत करना।" 2. शिव-शक्ति का स्वरूप और भक्त का 'सबर': भजन में माता के आदि-स्वरूप का बहुत ही सुंदर वर्णन किया गया है। भक्त कहता है कि "तुम ही शिवजी (भोले बाबा) की आधी शक्ति हो; तुम ही दुर्गा, तुम ही अम्बे और तुम ही महाकाली हो। हे माँ! मेरे जीवन में हमेशा अमृत की धार बनकर बहते रहना।" भक्त का हृदय माता के दर्शनों के लिए इतना व्याकुल है कि वह कहता है कि मेरे मन को चैन (सबर) तभी आएगा जब मैं जिधर भी देखूं, मुझे हर जगह केवल तुम ही तुम नज़र आओ। इसके सिवा मुझे जीवन में और कुछ नहीं चाहिए। 3. भक्ति का दान और भजन रूपी 'गहना': अंतिम भाग में इस भेंट के रचयिता ('शर्मा' जी) और गायक ('लक्खा' जी) अपने भाव प्रस्तुत करते हैं। रचयिता कहते हैं कि हे माता! अपने इस 'शर्मा' (लेखक) और सभी भक्तों को केवल अपनी सच्ची 'भक्ति का दान' दे दो। और 'लक्खा' जी प्रार्थना करते हैं कि हे माँ, बस इतनी कृपा करना कि मेरी आवाज़ हमेशा तुम्हारा ही गुणगान गाती रहे। क्योंकि सच्चे भक्तों के लिए दुनिया का सोना-चांदी कोई मायने नहीं रखता, उनके लिए तो माता के 'भजन' ही उनका सबसे बड़ा और कीमती 'गहना' (आभूषण) हैं।

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Frequently Asked Questions

Q1: 'मेरी अँखियों के सामने ही रहना' भजन के प्रसिद्ध गायक कौन हैं?

A1: माता शेरावाली का यह अत्यंत लोकप्रिय और भावपूर्ण जागरण भजन सुप्रसिद्ध भजन सम्राट लखबीर सिंह लक्खा (Lakhbir Singh Lakkha) जी द्वारा गाया गया है।

Q2: भजन में "दे दो शर्मा को भक्ति का दान" में 'शर्मा' कौन हैं?

A2: पारंपरिक भजनों में अक्सर गीतकार (Lyricist) अपना नाम अंतिम पंक्तियों में जोड़ देते हैं। इस भजन के रचयिता 'शर्मा' जी (जैसे कई प्रसिद्ध भजन लेखक होते हैं) हैं, जो माता से भक्ति का दान मांग रहे हैं, और लक्खा जी उसे गा रहे हैं।

Q3: "है भजन तेरा भक्तों का गहना" पंक्ति का क्या आध्यात्मिक अर्थ है?

A3: 'गहना' का अर्थ आभूषण (Jewelry/Wealth) होता है। इसका आध्यात्मिक अर्थ यह है कि सच्चे भक्तों के लिए सांसारिक सोना-चाँदी या धन-दौलत कोई मायने नहीं रखते; उनके लिए तो माता का नाम और उनके 'भजन' गाना ही उनका सबसे कीमती आभूषण और संपत्ति है।

Categories: Mata Ke Bhajan, Navratri Special

Deity: Mata Rani

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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