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जगदम्बा भवानी (तू जाने माँ तेरियाँ, तू जाने) हंसराज रघुवंशी भजन लिरिक्स

Jagdamba Bhawani (Tu Jaane Maa) Lyrics – Hansraj Raghuwanshi Lyrics

Location: बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश
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जगदम्बा भवानी (तू जाने माँ तेरियाँ, तू जाने) हंसराज रघुवंशी भजन लिरिक्स

JAGDAMBA BHAWANI HANSRAJ RAGHUWANSHI NAVRATRI LYRICS

तू जाने माँ तेरियाँ, तू जाने, तू जाने माँ तेरियाँ, तू जाने॥ माँ की ममता से ऊपर, ना जग में कोई छाया है। मैं राह तकदाँ हर दिन तेरा, तू ही मेरा साया है। तुम रुद्राणी, तुम ब्रह्माणी, तुमसे ही जग ये आया है। मैं क्यों ना तुमको पूजूँ माँ, तुमने ही मुझे बनाया है। जब मन ये मेरा डर से काँपे, तुम हिम्मत भरने आना। कभी जगदंबा, कभी बनके भवानी, मुझ पे कृपा बरसाना। कभी जगदंबा, कभी बनके भवानी, मुझ पे कृपा बरसाना॥ जय माँ, जय माँ, जय माँ, जय माँ॥ चाहे आर करो, चाहे पार करो, मेरी मैया तुम स्वीकार करो। मैं आया जग से खा के धोखे, अब नैया मेरी पार करो। उद्धार करो माँ, मुझे प्यार करो माँ, मैं जग का सताया, दुलार करो माँ। जब भटकूँ मैं इस दुनिया से, रस्ता तू मुझको दिखा देना। कभी जगदंबा, कभी बनके भवानी, मुझ पे कृपा बरसाना। कभी जगदंबा, कभी बनके भवानी, मुझ पे कृपा बरसाना॥

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तू जाने माँ तेरियाँ, तू जाने, तू जाने माँ तेरियाँ, तू जाने॥

माँ की ममता से ऊपर, ना जग में कोई छाया है। मैं राह तकदाँ हर दिन तेरा, तू ही मेरा साया है। तुम रुद्राणी, तुम ब्रह्माणी, तुमसे ही जग ये आया है। मैं क्यों ना तुमको पूजूँ माँ, तुमने ही मुझे बनाया है।

जब मन ये मेरा डर से काँपे, तुम हिम्मत भरने आना। कभी जगदंबा, कभी बनके भवानी, मुझ पे कृपा बरसाना। कभी जगदंबा, कभी बनके भवानी, मुझ पे कृपा बरसाना॥

जय माँ, जय माँ, जय माँ, जय माँ॥

चाहे आर करो, चाहे पार करो, मेरी मैया तुम स्वीकार करो। मैं आया जग से खा के धोखे, अब नैया मेरी पार करो। उद्धार करो माँ, मुझे प्यार करो माँ, मैं जग का सताया, दुलार करो माँ। जब भटकूँ मैं इस दुनिया से, रस्ता तू मुझको दिखा देना। कभी जगदंबा, कभी बनके भवानी, मुझ पे कृपा बरसाना। कभी जगदंबा, कभी बनके भवानी, मुझ पे कृपा बरसाना॥

जगदम्बा भवानी (तू जाने माँ तेरियाँ, तू जाने) हंसराज रघुवंशी भजन लिरिक्स Video

अर्थ (Bhavarth)

चैत्र नवरात्रि (मार्च 2026) के इस अत्यंत पावन अवसर पर, अपनी रूहानी और सूफी आवाज़ के लिए मशहूर हंसराज रघुवंशी (Hansraj Raghuwanshi) जी द्वारा गाया गया यह नया माता भजन "जगदम्बा भवानी (तू जाने माँ तेरियाँ)" सीधे हृदय को छू लेता है। अमूमन शिव भजनों के लिए प्रसिद्ध हंसराज जी ने इस भजन में एक हारे हुए और दुनिया से सताए हुए बच्चे की पुकार को बहुत ही गहराई से पिरोया है। हंसराज रघुवंशी जी का यह भजन उस अवस्था का गीत है जब इंसान दुनिया से पूरी तरह हारकर केवल उस आदि-शक्ति के प्रेम और ममता में अपना आसरा खोजता है। इस भावपूर्ण वंदना को तीन मुख्य चरणों में समझा जा सकता है: 1. माँ की ममता और ब्रह्मांड की रचयिता: भजन की शुरुआत में भक्त अपना सब कुछ माता पर छोड़ते हुए कहता है, "माँ, तेरी लीलाएं और तेरी बातें केवल तू ही जाने।" वह कहता है कि इस पूरी दुनिया में 'माँ की ममता' से बड़ी कोई छाँव (आश्रय) नहीं है और तुम ही मेरा सच्चा साया (परछाई) हो। तुम ही शिव की शक्ति 'रुद्राणी' हो और तुम ही 'ब्रह्माणी' हो, यह पूरा संसार तुम्हीं से उत्पन्न हुआ है। जब तुमने ही मेरा निर्माण किया है, तो भला मैं तुम्हारी पूजा क्यों न करूँ? 2. डर में हिम्मत और जगदम्बा की कृपा: भक्त माता से प्रार्थना करता है कि जीवन के संघर्षों में जब भी मेरा मन डर के मारे कांपने लगे, तब तुम स्वयं आकर मेरे भीतर हिम्मत (साहस) भर देना। वह विनती करता है कि तुम चाहे 'जगदम्बा' (जगत की माता) के शांत रूप में आओ, या दुष्टों का नाश करने वाली 'भवानी' के प्रचंड रूप में, बस अपने इस बालक पर हमेशा अपनी कृपा बरसाते रहना। 3. दुनिया के धोखे और पूर्ण शरणागति: अंतिम भाग में भक्त की सबसे गहरी पीड़ा और समर्पण छलक पड़ता है। वह कहता है कि "हे मैया! मैं इस झूठे संसार से बहुत धोखे खाकर तुम्हारी शरण में आया हूँ। अब चाहे तुम मुझे इस पार रखो या उस पार (नैया पार लगाओ), बस मुझे स्वीकार कर लो।" वह स्वयं को दुनिया का सताया हुआ बताकर माता से अपने उद्धार (मोक्ष), प्यार और दुलार की भीख मांगता है, और कहता है कि जब भी मैं जीवन की राह से भटकूँ, मुझे सही रास्ता दिखाना।

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Frequently Asked Questions

Q1: 'जगदम्बा भवानी (तू जाने माँ तेरियाँ)' भजन के गायक कौन हैं?

माता का यह अत्यंत भावपूर्ण और नया भजन (Navratri 2026 Special) सुप्रसिद्ध युवा गायक हंसराज रघुवंशी (Hansraj Raghuwanshi) जी द्वारा गाया गया है, जो मुख्य रूप से अपने शिव भजनों ('मेरा भोला है भंडारी' आदि) के लिए जाने जाते हैं।

Q2: भजन में माता को "रुद्राणी" और "ब्रह्माणी" क्यों कहा गया है?

सनातन धर्म में माता आदि-शक्ति को त्रिदेवों की शक्ति माना गया है। भगवान शिव (रुद्र) की शक्ति होने के कारण उन्हें 'रुद्राणी' और भगवान ब्रह्मा की शक्ति होने के कारण उन्हें 'ब्रह्माणी' कहा जाता है, जिनसे इस पूरे जगत की उत्पत्ति हुई है।

Q3: "चाहे आर करो, चाहे पार करो" का क्या भाव है?

यह पंक्ति पूर्ण 'शरणागति' (Total Surrender) को दर्शाती है। भक्त कह रहा है कि हे माता! मैं दुनिया से हारकर आपकी शरण में आया हूँ। अब मेरी जीवन नैया को डुबाना है या पार लगाना है, यह पूरी तरह से आप पर निर्भर है, मुझे आपका हर फैसला स्वीकार है।

Categories: Navratri Special, Mata Ke Bhajan, Gauri Maa

Deity: Mata Rani

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

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