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तेरा जग में है सच्चा दरबार, ओ भोली मैय्या शेरावालिए (देवी गीत) लिरिक्स

Tera Jag Mein Hai Saccha Darbar O Bholi Maiyya Sherawaliye Lyrics Lyrics

तर्ज (Tune): मोरे संकट के कटैया हनुमान

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तेरा जग में है सच्चा दरबार, ओ भोली मैय्या शेरावालिए (देवी गीत) लिरिक्स

TERA JAG MEIN HAI SACCHA DARBAR O BHOLI MAIYYA SHERAWALIYE LYRICS

॥ दोहा ॥ आदि शक्ति भवतारिणी, कृपामयी जगदम्ब। निज भक्तन के काज में, करती नहीं विलम्ब॥ ॥ मुखड़ा ॥ तेरा जग में है सच्चा दरबार, ओ भोली मैय्या शेरावालिए॥ तेरा जग में है सच्चा दरबार, ओ भोली मैय्या शेरावालिए॥ ॥ अंतरा 1 ॥ शंभुप्रिया हे मात शिवानी, तुमको ध्याते मुनि विज्ञानी। महिमा तुम्हरी वेद बखानी, करें देवता तेरी जय-जयकार॥ ओ भोली मैय्या शेरावालिए॥ ॥ अंतरा 2 ॥ तुम ही वैष्णवी तारा रानी, तुम ही उमा रमा ब्रह्माणी। तुम ही हो माँ आदि भवानी, गुण गाता तेरा ही संसार॥ ओ भोली मैय्या शेरावालिए॥ ॥ अंतरा 3 ॥ तेरी शरण में जो भी आया, खाली न उसको लौटाया। झोली भर-भर उसे पठाया, तेरा मिटता नहीं भंडार॥ ओ भोली मैय्या शेरावालिए॥ ॥ अंतरा 4 ॥ शुंभ-निशुंभ को तूने मारा, महिषासुर का किया संहारा। सत्य-धर्म को दिया सहारा, दौड़ी आती सुन पुकार॥ ओ भोली मैय्या शेरावालिए॥ ॥ अंतरा 5 ॥ मैं भी तेरे दर पे आई, लाल चुनरिया संग में लाई। करो कृपा मुझ पर महामाई, तेरी भक्ति से बेड़ा पार॥ ओ भोली मैय्या शेरावालिए॥ ॥ समापन ॥ तेरा जग में है सच्चा दरबार, ओ भोली मैय्या शेरावालिए॥ ओ भोली मैय्या शेरावालिए॥

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HINDI BHAJAN

॥ दोहा ॥ आदि शक्ति भवतारिणी, कृपामयी जगदम्ब। निज भक्तन के काज में, करती नहीं विलम्ब॥

॥ मुखड़ा ॥ तेरा जग में है सच्चा दरबार, ओ भोली मैय्या शेरावालिए॥ तेरा जग में है सच्चा दरबार, ओ भोली मैय्या शेरावालिए॥

॥ अंतरा 1 ॥ शंभुप्रिया हे मात शिवानी, तुमको ध्याते मुनि विज्ञानी। महिमा तुम्हरी वेद बखानी, करें देवता तेरी जय-जयकार॥ ओ भोली मैय्या शेरावालिए॥

॥ अंतरा 2 ॥ तुम ही वैष्णवी तारा रानी, तुम ही उमा रमा ब्रह्माणी। तुम ही हो माँ आदि भवानी, गुण गाता तेरा ही संसार॥ ओ भोली मैय्या शेरावालिए॥

॥ अंतरा 3 ॥ तेरी शरण में जो भी आया, खाली न उसको लौटाया। झोली भर-भर उसे पठाया, तेरा मिटता नहीं भंडार॥ ओ भोली मैय्या शेरावालिए॥

॥ अंतरा 4 ॥ शुंभ-निशुंभ को तूने मारा, महिषासुर का किया संहारा। सत्य-धर्म को दिया सहारा, दौड़ी आती सुन पुकार॥ ओ भोली मैय्या शेरावालिए॥

॥ अंतरा 5 ॥ मैं भी तेरे दर पे आई, लाल चुनरिया संग में लाई। करो कृपा मुझ पर महामाई, तेरी भक्ति से बेड़ा पार॥ ओ भोली मैय्या शेरावालिए॥

॥ समापन ॥ तेरा जग में है सच्चा दरबार, ओ भोली मैय्या शेरावालिए॥ ओ भोली मैय्या शेरावालिए॥

तेरा जग में है सच्चा दरबार, ओ भोली मैय्या शेरावालिए (देवी गीत) लिरिक्स Video

अर्थ (Bhavarth)

माता शेरावाली के चरणों में सच्ची श्रद्धा और समर्पण को दर्शाता हुआ यह अत्यंत सुरीला 'devi geet' "तेरा जग में है सच्चा दरबार, ओ भोली मैय्या शेरावालिए" भक्तों के मन को शांति और असीम ऊर्जा से भर देता है। इस भजन में आदि शक्ति भवानी के विभिन्न स्वरूपों और उनकी महिमा का बहुत ही सुंदर गुणगान किया गया है। यह भेंट माता शेरावाली के दरबार की सच्चाई, उनके अनंत स्वरूपों और उनकी अपार कृपा का बहुत ही सुंदर गान है। इंटरनेट पर खोजे जाने वाले बेहतरीन 'bhajan devi maa ke' की सूची में यह भजन एक विशेष स्थान रखता है। इसके भावार्थ को निम्नलिखित रूप में समझें: 1. सच्ची भवतारिणी और सच्चा दरबार: भजन की शुरुआत एक सुंदर दोहे से होती है, जिसमें माता को 'आदि शक्ति' और 'भवतारिणी' (भवसागर से पार लगाने वाली) कहा गया है। माता जगदम्बे इतनी कृपालु हैं कि वे अपने भक्तों के काम पूरे करने में ज़रा भी विलम्ब (देर) नहीं करतीं। इस पूरी दुनिया में यदि किसी का दरबार सबसे सच्चा है, तो वह हमारी भोली माता शेरावाली का ही दरबार है। 2. माता के विविध स्वरूप और महिमा: भक्त माता की स्तुति करते हुए कहता है कि आप ही भगवान शिव की प्रिय 'शिवानी' हैं, जिनका बड़े-बड़े मुनि और विज्ञानी ध्यान करते हैं। स्वयं वेद भी आपकी महिमा का बखान करते हैं। आप ही वैष्णवी, तारा रानी, उमा, रमा (लक्ष्मी), ब्रह्माणी और आदि भवानी हैं। यह पूरा संसार केवल आपके ही गुणों का गान करता है। 3. दुष्टों का संहार और भक्तों की झोली भरना: माता का दरबार इतना दयालु है कि जो भी उनकी शरण में आता है, वह कभी खाली हाथ नहीं लौटता। माता अपने भक्तों की झोली भर-भर कर विदा करती हैं, क्योंकि उनका भंडार कभी खत्म (मिटता) नहीं होता। जब भी सत्य और धर्म पर कोई संकट आया, तो माता ने ही शुंभ-निशुंभ और महिषासुर जैसे भयंकर राक्षसों का संहार किया। भक्तों की एक पुकार सुनकर वे दौड़कर उनकी रक्षा करने आती हैं। 4. लाल चुनरी और भक्ति का उपहार: अंतिम भाग में भक्त (या गायिका) माता से विनती करती है कि "हे महामाई! मैं भी तुम्हारे सच्चे दरबार में एक लाल चुनरी लेकर आई हूँ। मुझ पर अपनी कृपा बनाए रखना, क्योंकि केवल तुम्हारी सच्ची भक्ति से ही मेरा बेड़ा पार हो सकता है।"

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Frequently Asked Questions

Q1: भजन में "निज भक्तन के काज में, करती नहीं विलम्ब" का क्या अर्थ है?

'विलम्ब' का अर्थ होता है— 'देर करना' (Delay)। दोहे की इस पंक्ति का अर्थ है कि माता जगदम्बे अत्यंत कृपालु हैं; जब उनके सच्चे भक्तों पर कोई संकट आता है या उन्हें कोई काम होता है, तो माता उनकी मदद करने में ज़रा भी देर नहीं करतीं।

Q2: माता को 'भवतारिणी' क्यों कहा जाता है?

'भवतारिणी' दो शब्दों से बना है— 'भव' (संसार/मोह-माया) और 'तारिणी' (पार लगाने वाली)। माता को भवतारिणी इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे अपने भक्तों को इस जीवन रूपी जन्म-मरण के कष्टदायक सागर से पार लगाकर मोक्ष प्रदान करती हैं।

Q3: "उमा रमा ब्रह्माणी" में 'रमा' किस देवी का नाम है?

हिंदू धर्म में 'रमा' धन और ऐश्वर्य की देवी माता लक्ष्मी का ही एक नाम है। इस भजन में बताया गया है कि माता पार्वती (उमा), लक्ष्मी (रमा) और सरस्वती (ब्रह्माणी), सब एक ही आदि-शक्ति (शेरावाली) के अलग-अलग रूप हैं।

Categories: Mata Ke Bhajan, Navratri Special, Gauri Maa

Deity: Mata Rani

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

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