श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में (हनुमान जन्मोत्सव) भजन लिरिक्स
Shri Ram Janki Baithe Hai Mere Seene Me Lyrics - Hanuman Janmotsav Bhajan
श्री रामचंद्र जी महाराज के भरे दरबार में विभीषण ने ताना मारा— “ऐ बजरंगी, क्या तेरे मन में भी राम हैं?” हनुमान जी ने श्रीराम का नाम लिया और सीना फाड़ दिया, बोले— “ले देख, जय श्री राम!”
नहीं चलाओ बाण व्यंग के, ऐ विभीषण, ताना न सह पाऊँ। क्यों तोड़ी है माला, तुझे ऐ लंकापति बतलाऊँ। मुझमें भी है, तुझमें भी है, सबमें है— समझाऊँ। ऐ लंकापति विभीषण, ले देख, मैं तुझको आज दिखाऊँ॥ (और वीर बजरंगबली ने सीना चीर दिया, और बोले— “ये ले देख!”) जय-जय श्री राम, जय-जय श्री राम॥
श्री राम-जानकी बैठे हैं मेरे सीने में, श्री राम-जानकी बैठे हैं मेरे सीने में। देख लो मेरे दिल के नगीने में, श्री राम-जानकी बैठे हैं मेरे सीने में॥
मुझको कीर्ति, न वैभव, न यश चाहिए, राम के नाम का मुझको रस चाहिए। मुझको कीर्ति, न वैभव, न यश चाहिए, राम के नाम का मुझको रस चाहिए॥ सुख मिले ऐसे अमृत को पीने में, श्री राम-जानकी बैठे हैं मेरे सीने में॥
राम रसिया हूँ, मैं राम सुमिरण करूँ, सिया राम जी का सदा चिंतन करूँ। राम रसिया हूँ, मैं राम सुमिरण करूँ, सिया राम का सदा ही मैं चिंतन करूँ॥ अनमोल कोई भी चीज़ मेरे काम की नहीं, ऐ विभीषण, दिखती अगर उसमें छवि मेरे सिया-राम की नहीं॥ सच्चा आनंद है ऐसे ही जीने में, श्री राम-जानकी बैठे हैं मेरे सीने में॥
फाड़ सीना है, सबको ये दिखला दिया, भक्ति में मस्ती है, बेधड़क दिखला दिया। फाड़ सीना है, सबको ये दिखला दिया, भक्ति में मस्ती है, बेधड़क दिखला दिया॥ कोई मस्ती न सागर के मीने में, श्री राम-जानकी बैठे हैं मेरे सीने में॥
श्री राम-जानकी बैठे हैं मेरे सीने में, श्री राम-जानकी बैठे हैं मेरे सीने में। देख लो मेरे दिल के नगीने में, श्री राम-जानकी बैठे हैं मेरे सीने में॥ श्री राम-जानकी बैठे हैं मेरे सीने में (मेरे राम), श्री राम-जानकी बैठे हैं मेरे सीने में (मेरे श्री राम)॥

अर्थ (Bhavarth)
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Frequently Asked Questions
"श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में" भजन किस रामायण प्रसंग पर आधारित है?
यह प्रसिद्ध भजन उस प्रसंग पर आधारित है जब माता सीता ने हनुमान जी को एक बहुमूल्य मोतियों की माला भेंट की थी। हनुमान जी मोतियों को तोड़कर उनमें श्री राम को खोजने लगे। जब विभीषण जी ने इस पर व्यंग्य किया, तो हनुमान जी ने भरी सभा में अपना सीना फाड़कर अपने हृदय में बैठे श्री राम और माता जानकी के साक्षात् दर्शन करवा दिए थे।
हनुमान जी ने माता सीता द्वारा दी गई मोतियों की माला क्यों तोड़ दी थी?
हनुमान जी भगवान श्री राम के अनन्य भक्त (राम रसिया) हैं। उनके लिए दुनिया की वह हर अनमोल वस्तु व्यर्थ है जिसमें उनके प्रभु सिया-राम की छवि दिखाई न दे। इसीलिए यह देखने के लिए कि मोतियों के अंदर राम जी हैं या नहीं, उन्होंने माला को तोड़ दिया था।
हनुमान जन्मोत्सव (जयंती) पर यह भजन क्यों गाया जाता है?
हनुमान जन्मोत्सव श्री बजरंगबली की भक्ति और उनके समर्पण का उत्सव है। यह भजन हनुमान जी की उस पराकाष्ठा (सीना चीरने की घटना) को दर्शाता है जहाँ भक्त और भगवान एक हो जाते हैं, इसीलिए हनुमान जन्मोत्सव और मंगलवार के दिन इसे विशेष रूप से गाया जाता है।
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Categories: Mangalvaar Bhajan, Hanuman Ji, Ramayan Prasang, Hanuman Janmotsav Special
Deity: Shri Hanuman
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मोहित तरकरMohit Tarkar
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