साँचो बालाजी तुम्हारो दरबार है (मेहंदीपुर बालाजी) भजन लिरिक्स
Saacho Balaji Tumharo Darbar Hai Lyrics (Aake Dhara Pe Dhara Roop)
तर्ज: O Phirki Wali Tu Kal Phir Aana
आ के धरा पे, धरा रूप हरि ने, बन आए महावीर हरि। एक तन में, दो तन को संभाले, आ के हरि की पीर हरी॥
शंकर स्वयं, केसरी-नंदन, कलि के कष्ट निवारे। हरि के प्यारे, सिया के दुलारे, सदा ही जयकारे लगाए संसार है, साँचो बालाजी तुम्हारो दरबार है॥
लागी ललक लाल को, लाल लख के, लाल-लाल मुख धार लिया। दिनकर भी दिन कर न पाते, पवन देव आधार लिया॥
मान पाए, हनुमान कहाए, कपि को डुग दिखलाए। बजरंगी, सुमति के संगी, राम-रसरंगी, सो महिमा अपार है, साँचो बालाजी तुम्हारो दरबार है॥
लेटे कहीं माँ के संग में, कहीं पर माँ को भी सुख पाते हैं। बालरूप घाटा, मेंहदीपुर में, लीला अजब दिखाते हैं॥
विमल विनोदी, जान सके न कोई, जानन हारे। मन को भाई, हुई जब खुदाई, मति चकराई, पाया भी नहीं पार है, साँचो बालाजी तुम्हारो दरबार है॥

अर्थ (Bhavarth)
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Frequently Asked Questions
यह पंक्ति बहुत ही गहरे काव्यात्मक अर्थ (यमक अलंकार) से परिपूर्ण है। इसका अर्थ है कि भगवान शिव (हरि) ने पृथ्वी (धरा) पर वानर (हरि) का रूप धारण किया और भगवान विष्णु/राम (हरि) की पीड़ा और कष्टों (पीर) को दूर किया (हरी)।
यह पंक्ति बहुत ही गहरे काव्यात्मक अर्थ (यमक अलंकार) से परिपूर्ण है। इसका अर्थ है कि भगवान शिव (हरि) ने पृथ्वी (धरा) पर वानर (हरि) का रूप धारण किया और भगवान विष्णु/राम (हरि) की पीड़ा और कष्टों (पीर) को दूर किया (हरी)।
"हुई जब खुदाई, मति चकराई, पाया भी नहीं पार है" किस प्रसंग पर आधारित है?
यह पंक्ति राजस्थान के दौसा ज़िले में स्थित 'श्री मेहंदीपुर बालाजी धाम' के प्राकट्य से जुड़ी है। मान्यता है कि यहाँ बालाजी की मूर्ति किसी ने बनाई नहीं है, बल्कि वह अरावली पर्वत की चट्टान से स्वयं प्रकट हुई है। जब लोगों ने इस मूर्ति के अंतिम छोर को जानने के लिए खुदाई की, तो वे गहराई नापते-नापते थक गए लेकिन मूर्ति का कोई अंत (पार) नहीं मिला।
बालरूप घाटा (मेहंदीपुर) किसे कहा जाता है?
राजस्थान के मेहंदीपुर में स्थित श्री बालाजी के मंदिर को 'घाटे वाले बालाजी' (पहाड़ी की घाटी में स्थित होने के कारण) कहा जाता है। यहाँ श्री हनुमान जी अपने 'बाल स्वरूप' में विराजमान हैं।
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Categories: Filmi Tarz Bhajan, Ramayan Prasang, Hanuman Ji, Hanuman Janmotsav Special, Mangalvaar Bhajan
Deity: Shri Hanuman
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मोहित तरकरMohit Tarkar
संस्थापक एवं मुख्य संपादक • Founder & Chief Editor
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