पी लूँ मैं सागर को, डुबा दूँ सागर में लंका (आपका ये दास है) हनुमान भजन लिरिक्स
Pee Loon Main Sagar Ko (Aapka Ye Daas Hai) Lyrics - Veer Hanuman Bhajan
तर्ज: “सौ साल पहले मुझे तुमसे प्यार था”
पी लूँ मैं सागर को, डुबा दूँ सागर में लंका, मच्छर-सा मसल डालूँ, बना जो रावण बलबंका। रोम-रोम में मेरे आपका निवास है, आपका ये दास है, सदा से रहा और सदा ही रहेगा॥
आदेश अगर दो, काल की मैं गर्दन मरोड़ दूँगा, चंदा के अमृत को लखन मुख में निचोड़ दूँगा। यमराज का मैं जाकर कर दूँ विनाश है, आपका ये दास है, सदा से रहा और सदा ही रहेगा॥
गर सूर्य की चिंता है, ऐसा आनंदकंद कर दूँ, पाताल में दिनकर को पकड़ के जाकर बंद कर दूँ। जीवन में मेरे प्रभुवर आपका प्रकाश है, आपका ये दास है, सदा से रहा और सदा ही रहेगा॥

अर्थ (Bhavarth)
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Frequently Asked Questions
"पी लूँ मैं सागर को" भजन का मुख्य भाव क्या है?
इस अत्यंत ओजस्वी भजन का मुख्य भाव 'वीर रस' और 'दास्य भक्ति' है। इसमें भगवान श्री राम के प्रति हनुमान जी का अनन्य समर्पण और उनके असीम बल का वर्णन किया गया है, जहाँ वे प्रभु की आज्ञा पाकर पूरे ब्रह्मांड की दिशा बदलने का संकल्प लेते हैं।
"चंदा के अमृत को लखन मुख में निचोड़ दूँगा" से कवि का क्या तात्पर्य है?
यह पंक्ति रामायण के 'लक्ष्मण मूर्छा' प्रसंग की ओर इशारा करती है। श्री हनुमान जी भगवान राम से कहते हैं कि यदि आपकी आज्ञा हो तो मैं काल (मृत्यु) की गर्दन मरोड़ दूँ और चंद्रमा का शीतल अमृत लाकर लक्ष्मण जी के मुख में डाल दूँ, ताकि उनके प्राण तुरंत लौट आएँ।
"पाताल में दिनकर को पकड़ के जाकर बंद कर दूँ" में 'दिनकर' कौन हैं?
'दिनकर' का अर्थ है सूर्य देव। लक्ष्मण जी के प्राण बचाने के लिए सूर्योदय से पहले 'संजीवनी बूटी' लाना आवश्यक था। इसलिए हनुमान जी कहते हैं कि यदि आपको सूर्य निकलने की चिंता है, तो मैं स्वयं सूर्य देव (दिनकर) को पाताल लोक में जाकर बंद कर दूँगा ताकि सुबह ही न हो पाए।
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Categories: Hanuman Ji, Hanuman Janmotsav Special, Mangalvaar Bhajan, Ramayan Prasang
Deity: Shri Hanuman
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मोहित तरकरMohit Tarkar
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