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पी लूँ मैं सागर को, डुबा दूँ सागर में लंका (आपका ये दास है) हनुमान भजन लिरिक्स

Pee Loon Main Sagar Ko (Aapka Ye Daas Hai) Lyrics - Veer Hanuman Bhajan

Location: बुंदेलखंड
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तर्ज: “सौ साल पहले मुझे तुमसे प्यार था”

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पी लूँ मैं सागर को, डुबा दूँ सागर में लंका (आपका ये दास है) हनुमान भजन लिरिक्स

PEE LOON MAIN SAGAR KO AAPKA YE DAAS HAI LYRICS VEER HANUMAN BHAJAN

पी लूँ मैं सागर को, डुबा दूँ सागर में लंका, मच्छर-सा मसल डालूँ, बना जो रावण बलबंका। रोम-रोम में मेरे आपका निवास है, आपका ये दास है, सदा से रहा और सदा ही रहेगा॥ आदेश अगर दो, काल की मैं गर्दन मरोड़ दूँगा, चंदा के अमृत को लखन मुख में निचोड़ दूँगा। यमराज का मैं जाकर कर दूँ विनाश है, आपका ये दास है, सदा से रहा और सदा ही रहेगा॥ गर सूर्य की चिंता है, ऐसा आनंदकंद कर दूँ, पाताल में दिनकर को पकड़ के जाकर बंद कर दूँ। जीवन में मेरे प्रभुवर आपका प्रकाश है, आपका ये दास है, सदा से रहा और सदा ही रहेगा॥

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Hindi Bhajan Manjari

पी लूँ मैं सागर को, डुबा दूँ सागर में लंका, मच्छर-सा मसल डालूँ, बना जो रावण बलबंका। रोम-रोम में मेरे आपका निवास है, आपका ये दास है, सदा से रहा और सदा ही रहेगा॥

आदेश अगर दो, काल की मैं गर्दन मरोड़ दूँगा, चंदा के अमृत को लखन मुख में निचोड़ दूँगा। यमराज का मैं जाकर कर दूँ विनाश है, आपका ये दास है, सदा से रहा और सदा ही रहेगा॥

गर सूर्य की चिंता है, ऐसा आनंदकंद कर दूँ, पाताल में दिनकर को पकड़ के जाकर बंद कर दूँ। जीवन में मेरे प्रभुवर आपका प्रकाश है, आपका ये दास है, सदा से रहा और सदा ही रहेगा॥

पी लूँ मैं सागर को, डुबा दूँ सागर में लंका (आपका ये दास है) हनुमान भजन लिरिक्स Video
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अर्थ (Bhavarth)

यह अत्यंत शक्तिशाली भजन श्री हनुमान जी की 'वीर रस' और 'दास्य भक्ति' (सेवक भाव) का सबसे अद्भुत उदाहरण है। इसमें बजरंगबली भगवान राम से आज्ञा मांगते हुए अपने असीम बल का वर्णन कर रहे हैं: 1. सागर को पीना और रावण का वध: हनुमान जी कहते हैं कि हे प्रभु! यदि आपकी आज्ञा हो तो मैं इस पूरे समुद्र को पी जाऊँ और सोने की लंका को उसी समुद्र में डुबा दूँ। जो रावण खुद को बहुत बलवान (बलबंका) समझता है, उसे मैं एक मच्छर की तरह मसल सकता हूँ। क्योंकि मेरे रोम-रोम में आपका ही वास है और मैं युगों-युगों से आपका ही दास हूँ। 2. काल (मृत्यु) और यमराज का विनाश: यह प्रसंग तब का प्रतीत होता है जब लक्ष्मण जी मूर्छित थे। हनुमान जी कहते हैं कि यदि आप आदेश दें तो मैं स्वयं 'काल' (मृत्यु) की गर्दन मरोड़ दूँ और चंद्रमा से अमृत निचोड़कर लक्ष्मण जी (लखन) के मुख में डाल दूँ, ताकि उनके प्राण बच जाएँ। मैं स्वयं जाकर यमराज का भी विनाश कर सकता हूँ। 3. सूर्य देव (दिनकर) को पाताल में बंद करना: संजीवनी लाते समय सूर्योदय होने का भय था। हनुमान जी अपने प्रभु से कहते हैं कि यदि आपको सूर्योदय (सूर्य निकलने) की चिंता है, तो मैं जाकर 'दिनकर' (सूर्य देव) को पाताल लोक में ही पकड़ कर बंद कर दूँगा, जिससे सवेरा ही न हो। मेरे जीवन में तो केवल आपका ही प्रकाश है, क्योंकि यह दास सदा से आपका था और सदा ही रहेगा।

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Frequently Asked Questions

"पी लूँ मैं सागर को" भजन का मुख्य भाव क्या है?

इस अत्यंत ओजस्वी भजन का मुख्य भाव 'वीर रस' और 'दास्य भक्ति' है। इसमें भगवान श्री राम के प्रति हनुमान जी का अनन्य समर्पण और उनके असीम बल का वर्णन किया गया है, जहाँ वे प्रभु की आज्ञा पाकर पूरे ब्रह्मांड की दिशा बदलने का संकल्प लेते हैं।

"चंदा के अमृत को लखन मुख में निचोड़ दूँगा" से कवि का क्या तात्पर्य है?

यह पंक्ति रामायण के 'लक्ष्मण मूर्छा' प्रसंग की ओर इशारा करती है। श्री हनुमान जी भगवान राम से कहते हैं कि यदि आपकी आज्ञा हो तो मैं काल (मृत्यु) की गर्दन मरोड़ दूँ और चंद्रमा का शीतल अमृत लाकर लक्ष्मण जी के मुख में डाल दूँ, ताकि उनके प्राण तुरंत लौट आएँ।

"पाताल में दिनकर को पकड़ के जाकर बंद कर दूँ" में 'दिनकर' कौन हैं?

'दिनकर' का अर्थ है सूर्य देव। लक्ष्मण जी के प्राण बचाने के लिए सूर्योदय से पहले 'संजीवनी बूटी' लाना आवश्यक था। इसलिए हनुमान जी कहते हैं कि यदि आपको सूर्य निकलने की चिंता है, तो मैं स्वयं सूर्य देव (दिनकर) को पाताल लोक में जाकर बंद कर दूँगा ताकि सुबह ही न हो पाए।

Categories: Hanuman Ji, Hanuman Janmotsav Special, Mangalvaar Bhajan, Ramayan Prasang

Deity: Shri Hanuman

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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