Shri Khatu Shyam JiFilmi Tarz BhajanKhatu Shyam

मोरछड़ी लहराई रे, रसिया ओ सांवरा (खाटू श्याम भजन) लिरिक्स

Morchhadi Lehrayi Re Rasiya O Sanwara Lyrics - Khatu Shyam

Location: जयपुर, राजस्थान

तर्ज: तर्ज़ - पंख होते तो उड़ आती रे

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मोरछड़ी लहराई रे, रसिया ओ सांवरा (खाटू श्याम भजन) लिरिक्स

MORCHHADI LEHRAYI RE RASIYA O SANWARA LYRICS KHATU SHYAM

मोरछड़ी लहराई रे, रसिया ओ सांवरा, तेरी बहुत बड़ी सकलाई रे… मोरछड़ी का जादू निराला, इसको थामे है खाटू वाला, लीले चढ़के दौड़ा ये आए, सारे संकट पल में मिटाए, रसिया ओ सांवरा, तेरी बहुत बड़ी सकलाई रे, मोरछड़ी… श्याम बहादुर दर्शन को आए, ताले मंदिर के बंद पाए, मोरछड़ी से तालों को खोला, शीश झुका कर बाबा से बोला, रसिया ओ सांवरा, तेरी बहुत बड़ी सकलाई रे, मोरछड़ी… मोरछड़ी की महिमा है भारी, श्याम धणी को लागे ये प्यारी, हर्ष कहे रोतों को हंसाए, हाथों में जब तेरे लहराए, रसिया ओ सांवरा, तेरी बहुत बड़ी सकलाई रे, मोरछड़ी…

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Hindi Bhajan Manjari

मोरछड़ी लहराई रे, रसिया ओ सांवरा, तेरी बहुत बड़ी सकलाई रे…

मोरछड़ी का जादू निराला, इसको थामे है खाटू वाला, लीले चढ़के दौड़ा ये आए, सारे संकट पल में मिटाए, रसिया ओ सांवरा, तेरी बहुत बड़ी सकलाई रे, मोरछड़ी…

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श्याम बहादुर दर्शन को आए, ताले मंदिर के बंद पाए, मोरछड़ी से तालों को खोला, शीश झुका कर बाबा से बोला, रसिया ओ सांवरा, तेरी बहुत बड़ी सकलाई रे, मोरछड़ी…

मोरछड़ी की महिमा है भारी, श्याम धणी को लागे ये प्यारी, हर्ष कहे रोतों को हंसाए, हाथों में जब तेरे लहराए, रसिया ओ सांवरा, तेरी बहुत बड़ी सकलाई रे, मोरछड़ी…

मोरछड़ी लहराई रे, रसिया ओ सांवरा (खाटू श्याम भजन) लिरिक्स Video

अर्थ (Bhavarth)

यह भजन कलियुग के अवतारी 'खाटू श्याम जी' (बर्बरीक) और उनके हाथों में सुशोभित चमत्कारिक 'मोरछड़ी' (मोर पंख की झाड़ू) की अपार महिमा का गान है: 1. मोरछड़ी का निराला जादू: भक्त बाबा श्याम को 'रसिया' और 'सांवरा' कहकर पुकारते हैं। वे कहते हैं कि हे बाबा! आपकी 'सकलाई' (कृपा और शक्ति) बहुत बड़ी है। खाटू वाले बाबा के हाथों में जो मोरछड़ी है, उसका जादू बड़ा निराला है। जब भक्त संकट में होता है, तो बाबा अपने 'लीले' (नीले घोड़े) पर सवार होकर दौड़े चले आते हैं और मोरछड़ी के एक इशारे से पल भर में सारे दुख मिटा देते हैं। 2. भक्त श्याम बहादुर का चमत्कारिक प्रसंग: भजन के इस अंतरे में एक सच्ची घटना का ज़िक्र है। जब बाबा के परम भक्त 'श्याम बहादुर जी' (श्री श्याम सिंह चौहान) एक बार रात को खाटू मंदिर दर्शन के लिए पहुँचे, तो उन्होंने मंदिर के कपाट (ताले) बंद पाए। तब ऐसा चमत्कार हुआ कि बाबा श्याम ने स्वयं अपनी मोरछड़ी के प्रभाव से मंदिर के बंद तालों को खोल दिया था। भक्त उसी चमत्कार को याद करके शीश झुकाते हैं। 3. रोतों को हँसाने वाली मोरछड़ी: मोरछड़ी की महिमा बहुत भारी है और यह श्याम धणी (मालिक) को बहुत प्यारी लगती है। भजन के रचयिता कहते हैं कि जब बाबा के हाथों में यह मोरछड़ी लहराती है, तो यह रोते हुए और निराश भक्तों के चेहरों पर भी हँसी और उम्मीद लौटा देती है।

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Frequently Asked Questions

"मोरछड़ी लहराई रे" भजन में 'श्याम बहादुर' कौन हैं?

'श्याम बहादुर जी' (श्री श्याम सिंह चौहान) खाटू श्याम बाबा के एक अनन्य और परम भक्त थे। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब वे एक बार देर रात खाटू मंदिर पहुँचे और ताले बंद पाए, तो बाबा श्याम ने उनके प्रेम के वशीभूत होकर स्वयं मंदिर के ताले खोल दिए थे।

बाबा खाटू श्याम की 'मोरछड़ी' का क्या महत्व है?

'मोरछड़ी' मोरों के पंखों से बनी एक झाड़ू या छड़ी होती है, जिसे खाटू श्याम जी अपने हाथों में धारण करते हैं। मान्यताओं के अनुसार, बाबा अपनी मोरछड़ी घुमाकर (लहराकर) भक्तों के सारे रोग, दोष, संकट और बुरी नज़र को पल भर में दूर कर देते हैं।

भजन में "लीले चढ़के दौड़ा ये आए" का क्या अर्थ है?

'लीला' (नीला) बाबा खाटू श्याम के प्रसिद्ध और चमत्कारिक घोड़े का नाम है। इस पंक्ति का अर्थ है कि जब भी कोई भक्त सच्चे दिल से बाबा को पुकारता है, तो वे अपने नीले घोड़े (लीले) पर सवार होकर उसकी मदद के लिए तुरंत दौड़े चले आते हैं।

Categories: Filmi Tarz Bhajan, Khatu Shyam

Deity: Shri Khatu Shyam Ji

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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