मोरछड़ी लहराई रे, रसिया ओ सांवरा (खाटू श्याम भजन) लिरिक्स
Morchhadi Lehrayi Re Rasiya O Sanwara Lyrics - Khatu Shyam
तर्ज: तर्ज़ - पंख होते तो उड़ आती रे
मोरछड़ी लहराई रे, रसिया ओ सांवरा, तेरी बहुत बड़ी सकलाई रे…
मोरछड़ी का जादू निराला, इसको थामे है खाटू वाला, लीले चढ़के दौड़ा ये आए, सारे संकट पल में मिटाए, रसिया ओ सांवरा, तेरी बहुत बड़ी सकलाई रे, मोरछड़ी…
श्याम बहादुर दर्शन को आए, ताले मंदिर के बंद पाए, मोरछड़ी से तालों को खोला, शीश झुका कर बाबा से बोला, रसिया ओ सांवरा, तेरी बहुत बड़ी सकलाई रे, मोरछड़ी…
मोरछड़ी की महिमा है भारी, श्याम धणी को लागे ये प्यारी, हर्ष कहे रोतों को हंसाए, हाथों में जब तेरे लहराए, रसिया ओ सांवरा, तेरी बहुत बड़ी सकलाई रे, मोरछड़ी…

अर्थ (Bhavarth)
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Frequently Asked Questions
"मोरछड़ी लहराई रे" भजन में 'श्याम बहादुर' कौन हैं?
'श्याम बहादुर जी' (श्री श्याम सिंह चौहान) खाटू श्याम बाबा के एक अनन्य और परम भक्त थे। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब वे एक बार देर रात खाटू मंदिर पहुँचे और ताले बंद पाए, तो बाबा श्याम ने उनके प्रेम के वशीभूत होकर स्वयं मंदिर के ताले खोल दिए थे।
बाबा खाटू श्याम की 'मोरछड़ी' का क्या महत्व है?
'मोरछड़ी' मोरों के पंखों से बनी एक झाड़ू या छड़ी होती है, जिसे खाटू श्याम जी अपने हाथों में धारण करते हैं। मान्यताओं के अनुसार, बाबा अपनी मोरछड़ी घुमाकर (लहराकर) भक्तों के सारे रोग, दोष, संकट और बुरी नज़र को पल भर में दूर कर देते हैं।
भजन में "लीले चढ़के दौड़ा ये आए" का क्या अर्थ है?
'लीला' (नीला) बाबा खाटू श्याम के प्रसिद्ध और चमत्कारिक घोड़े का नाम है। इस पंक्ति का अर्थ है कि जब भी कोई भक्त सच्चे दिल से बाबा को पुकारता है, तो वे अपने नीले घोड़े (लीले) पर सवार होकर उसकी मदद के लिए तुरंत दौड़े चले आते हैं।
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Categories: Filmi Tarz Bhajan, Khatu Shyam
Deity: Shri Khatu Shyam Ji
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मोहित तरकरMohit Tarkar
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