Shri Khatu Shyam JiKrishna Bhajan

एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है

Ek Aas Tumhari Hai Vishwas Tumhara Hai Lyrics

तर्ज (Tune): मुश्किल है सहन करना - साध्वी पूर्णिमा जी

HINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARI

एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है

EK AAS TUMHARI HAI VISHWAS TUMHARA HAI BHAJAN LYRICS

एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है। एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है, अब तेरे सिवा बाबा, कहो कौन हमारा है, एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है।। फूलों में महक तुमसे, तारों में चमक तुमसे, मेरे बाबा….., “इतना बता दो कहाँ तुम नहीं हो, ये सब को पता है कि तुम हर कहीं हो, अगर तुम ना होते तो दुनिया ना होती, अँधेरा मिटाती है तेरी ही ज्योति, अँधेरा मिटाती है तेरी ही ज्योति।” फूलों में महक तुमसे, तारों में चमक तुमसे, बर्फ़ों में शीतलता, अग्नि में धधक तुमसे, अग्नि में धधक तुमसे, जिस ओर नज़र डालूँ, तेरा ही नज़ारा है, अब तेरे सिवा बाबा, कहो कौन हमारा है। एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है।। मझधार में नैया है, मजबूर खिवैया है, कन्हैया….., “विश्वास मेरा ये टूटे ना प्यारे, तुम्हीं को लगानी है नैया किनारे, चले आओ ढूंढो ना कोई बहाना सोचो ज़रा है ये रिश्ता पुराना, सोचो ज़रा है ये रिश्ता पुराना।” मझधार में नैया है, मजबूर खिवैया है, नैया का खिवैया तो, अब तू ही कन्हैया है, अब तू ही कन्हैया है, भव पार लगा बाबा, मझधार किनारा है, अब तेरे सिवा बाबा, कहो कौन हमारा है। एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है।। इस तन में रमे हो तुम, इस मन में रमे हो तुम, ऐ मेरे बाबा…., “तुझसे जुड़ी है मेरी हर कहानी, तुम्हीं दे रहे हो मुझे दाना पानी, ये एहसान तेरा मैं कैसे चुकाऊँ, दिया है जो तूने मैं ना भूल पाऊँ, दिया है जो तूने मैं ना भूल पाऊँ।” इस तन में रमे हो तुम, इस मन में रमे हो तुम, मैं तुमको कहाँ ढूँढूँ, इस दिल में बसे हो तुम, इस दिल में बसे हो तुम, घनश्याम दरस दे दो, कोई ना हमारा है, अब तेरे सिवा बाबा, कहो कौन हमारा है। एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है।। एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है, अब तेरे सिवा बाबा, कहो कौन हमारा है, एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है।।

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HINDI BHAJAN

एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है।

एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है, अब तेरे सिवा बाबा, कहो कौन हमारा है, एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है।।

फूलों में महक तुमसे, तारों में चमक तुमसे, मेरे बाबा….., “इतना बता दो कहाँ तुम नहीं हो, ये सब को पता है कि तुम हर कहीं हो, अगर तुम ना होते तो दुनिया ना होती, अँधेरा मिटाती है तेरी ही ज्योति, अँधेरा मिटाती है तेरी ही ज्योति।” फूलों में महक तुमसे, तारों में चमक तुमसे, बर्फ़ों में शीतलता, अग्नि में धधक तुमसे, अग्नि में धधक तुमसे,

जिस ओर नज़र डालूँ, तेरा ही नज़ारा है, अब तेरे सिवा बाबा, कहो कौन हमारा है। एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है।।

मझधार में नैया है, मजबूर खिवैया है, कन्हैया….., “विश्वास मेरा ये टूटे ना प्यारे, तुम्हीं को लगानी है नैया किनारे, चले आओ ढूंढो ना कोई बहाना सोचो ज़रा है ये रिश्ता पुराना, सोचो ज़रा है ये रिश्ता पुराना।”

मझधार में नैया है, मजबूर खिवैया है, नैया का खिवैया तो, अब तू ही कन्हैया है, अब तू ही कन्हैया है,

भव पार लगा बाबा, मझधार किनारा है, अब तेरे सिवा बाबा, कहो कौन हमारा है। एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है।।

इस तन में रमे हो तुम, इस मन में रमे हो तुम, ऐ मेरे बाबा…., “तुझसे जुड़ी है मेरी हर कहानी, तुम्हीं दे रहे हो मुझे दाना पानी, ये एहसान तेरा मैं कैसे चुकाऊँ, दिया है जो तूने मैं ना भूल पाऊँ, दिया है जो तूने मैं ना भूल पाऊँ।”

इस तन में रमे हो तुम, इस मन में रमे हो तुम, मैं तुमको कहाँ ढूँढूँ, इस दिल में बसे हो तुम, इस दिल में बसे हो तुम,

घनश्याम दरस दे दो, कोई ना हमारा है, अब तेरे सिवा बाबा, कहो कौन हमारा है। एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है।।

एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है, अब तेरे सिवा बाबा, कहो कौन हमारा है, एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है।।

एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है Video

अर्थ (Bhavarth)

यह भजन भक्त और भगवान (विशेषकर बाबा खाटू श्याम / श्री कृष्ण) के बीच पूर्ण विश्वास और 'शरणागति' (Surrender) का एक अत्यंत ही सुंदर और दार्शनिक वर्णन है। इस भजन को मुख्य रूप से तीन गहरे भावों में बांटा जा सकता है: ईश्वर की सर्वव्यापकता (Omnipresence of God): भजन के पहले हिस्से में भक्त यह स्वीकार करता है कि इस पूरी सृष्टि के कण-कण में केवल ईश्वर का ही वास है। फूलों में जो खुशबू है, तारों में जो चमक है, बर्फ में जो ठंडक है और अग्नि में जो ताप (धधक) है, वह सब बाबा श्याम की ही शक्ति का रूप है। भक्त कहता है कि इस दुनिया में ऐसी कोई जगह नहीं जहाँ भगवान मौजूद न हों। अगर ईश्वर की ज्योति न होती, तो इस संसार में केवल अंधकार ही होता। जिधर भी नज़र जाती है, सिर्फ प्रभु का ही नज़ारा दिखता है। जीवन रूपी नैया का समर्पण (Surrender in the Ocean of Life): दूसरे हिस्से में भक्त अपने जीवन के संघर्षों का वर्णन करते हुए कहता है कि मेरी जीवन रूपी नाव बीच भंवर (मझधार) में फंसी हुई है और मैं एक बहुत ही मजबूर नाविक हूँ। भक्त अपने कन्हैया (श्याम बाबा) को उनके पुराने रिश्ते की याद दिलाते हुए कहता है कि "हे प्रभु! अब कोई बहाना मत बनाओ, मेरा विश्वास मत टूटने दो। मेरी इस नैया को किनारे लगाने की ज़िम्मेदारी अब तुम्हारी ही है, क्योंकि तुम ही मेरे जीवन के असली खेवनहार (नाविक) हो।" आत्मा से परमात्मा का मिलन और कृतज्ञता (Gratitude and Inner Connection): अंतिम भाग में भक्त ईश्वर को अपने भीतर ही महसूस करता है। वह कहता है कि "हे प्रभु, तुम मेरे तन और मन दोनों में रमे हुए हो। मुझे अब तुम्हें बाहर ढूँढने की ज़रूरत नहीं, क्योंकि तुम मेरे दिल में ही बस गए हो।" भक्त कृतज्ञता (Gratitude) व्यक्त करते हुए कहता है कि इस जीवन में दाना-पानी और हर सुख तुम्हारे ही एहसान का नतीजा है। यह एक ऐसा कर्ज़ है जिसे चुकाया नहीं जा सकता। अंत में, भक्त भगवान से साक्षात दर्शन (दरस) की मांग करता है, क्योंकि उसे केवल और केवल ईश्वर की ही आस और विश्वास है।

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Frequently Asked Questions

Q1: 'एक आस तुम्हारी है' भजन का मुख्य संदेश क्या है?

A1: इस भजन का मुख्य संदेश ईश्वर के प्रति 'पूर्ण समर्पण' और 'अटूट विश्वास' है। यह सिखाता है कि जीवन की हर परिस्थिति (चाहे वह प्रकृति का सौंदर्य हो या जीवन की परेशानियां) में ईश्वर ही हमारा एकमात्र सहारा और मार्गदर्शक है।

Q2: भजन में "मझधार में नैया है, मजबूर खिवैया है" का क्या दार्शनिक अर्थ है?

A2: यहाँ 'नैया' मनुष्य के जीवन का और 'मझधार' संसार की कठिनाइयों व संघर्षों का प्रतीक है। 'मजबूर खिवैया' का अर्थ है कि मनुष्य अपनी ताकत से संसार के दुखों को पार नहीं कर सकता, उसे अपनी जीवन रूपी नाव ईश्वर (कन्हैया) के हाथों में सौंपनी ही पड़ती है।

Q3: "बर्फ़ों में शीतलता, अग्नि में धधक तुमसे" पंक्ति से भक्त क्या कहना चाहता है?

A3: इस पंक्ति के माध्यम से भक्त ईश्वर की 'सर्वव्यापकता' को दर्शा रहा है। दुनिया की हर चीज़ का जो मूल स्वभाव है (जैसे बर्फ का ठंडा होना या आग का गर्म होना), वह सब ईश्वर की ही बनाई हुई ऊर्जा और सत्ता का प्रमाण है।

Categories: Krishna Bhajan

Deity: Shri Khatu Shyam Ji

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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