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त्रेता में राम न होते, द्वापर घनश्याम न होते (जगत कल्याण न होता) भजन लिरिक्स

Treta Mein Ram Na Hote Dwapar Ghanshyam Na Hote Lyrics

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त्रेता में राम न होते, द्वापर घनश्याम न होते (जगत कल्याण न होता) भजन लिरिक्स

TRETA MEIN RAM NA HOTE DWAPAR GHANSHYAM BHAJAN LYRICS

त्रेता में राम न होते, द्वापर घनश्याम न होते, यदि चारों धाम न होते, जगत कल्याण न होता॥ यदि राम-सिया का वन-गमन न होता, तो दशरथ जी का मरण न होता। सीता चुराई न जाती, लंका जलाई न जाती, यदि रावण मरण न होता, तो जग कल्याण न होता॥ यदि अर्जुन के संग श्रीकृष्ण न होते, तो दुर्योधन भी यूँ हारे न होते। सारा राज नहीं जाता, सर का ताज नहीं जाता, यदि महाभारत न होता, तो जग कल्याण न होता॥ यदि राम के संग में हनुमान न होते, तो लक्ष्मण जी के प्राण न होते। कौन संजीवनी लाता, कौन बूटी को पिलाता, यदि लक्ष्मण जीवित न होते, तो जग कल्याण न होता॥ यदि भक्तों के संग भगवान न होते, तो सारी उम्र के अरमान न होते। अरमान नहीं होता, सम्मान नहीं होता, यदि गुरु का ज्ञान न होता, तो जग कल्याण न होता॥ शिव जी की जटा में, गंगा न समाती, वो पाप तारने धरती पे न आती। होते राम नहीं सीता, होती रामायण न गीता, यही हरि-कीर्तन न होता, जगत कल्याण न होता॥

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त्रेता में राम न होते, द्वापर घनश्याम न होते, यदि चारों धाम न होते, जगत कल्याण न होता॥

यदि राम-सिया का वन-गमन न होता, तो दशरथ जी का मरण न होता। सीता चुराई न जाती, लंका जलाई न जाती, यदि रावण मरण न होता, तो जग कल्याण न होता॥

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यदि अर्जुन के संग श्रीकृष्ण न होते, तो दुर्योधन भी यूँ हारे न होते। सारा राज नहीं जाता, सर का ताज नहीं जाता, यदि महाभारत न होता, तो जग कल्याण न होता॥

यदि राम के संग में हनुमान न होते, तो लक्ष्मण जी के प्राण न होते। कौन संजीवनी लाता, कौन बूटी को पिलाता, यदि लक्ष्मण जीवित न होते, तो जग कल्याण न होता॥

यदि भक्तों के संग भगवान न होते, तो सारी उम्र के अरमान न होते। अरमान नहीं होता, सम्मान नहीं होता, यदि गुरु का ज्ञान न होता, तो जग कल्याण न होता॥

शिव जी की जटा में, गंगा न समाती, वो पाप तारने धरती पे न आती। होते राम नहीं सीता, होती रामायण न गीता, यही हरि-कीर्तन न होता, जगत कल्याण न होता॥

त्रेता में राम न होते, द्वापर घनश्याम न होते (जगत कल्याण न होता) भजन लिरिक्स Video

अर्थ (Bhavarth)

यह अत्यंत ज्ञानवर्धक भजन हमें ईश्वर की 'लीला' और 'नियति' (Destiny) का गहरा रहस्य समझाता है। कई बार जो घटनाएँ हमें दुखद लगती हैं, उनके पीछे परमेश्वर का कोई बहुत बड़ा उद्देश्य (जगत कल्याण) छिपा होता है: 1. राम वनवास और रावण वध का रहस्य: भजन में बताया गया है कि यदि भगवान राम त्रेता युग में और श्री कृष्ण (घनश्याम) द्वापर युग में अवतार न लेते, तो इस संसार का उद्धार नहीं होता। यदि राम और सीता वन में न जाते, तो राजा दशरथ का मरण नहीं होता, सीता का हरण नहीं होता और न ही लंका जलती। यह सब इसलिए हुआ ताकि पापी रावण का वध हो सके और संसार का कल्याण हो। 2. महाभारत और दुर्योधन का अहंकार: यदि द्वापर युग में अर्जुन के सारथी स्वयं श्री कृष्ण न बनते, तो अहंकारी दुर्योधन कभी नहीं हारता। महाभारत का वह भयंकर युद्ध भी 'जगत कल्याण' के लिए ही था, ताकि अधर्म का नाश हो और धर्म की स्थापना हो सके। 3. हनुमान जी की भक्ति और शिव जी की कृपा: यदि राम जी के साथ हनुमान न होते, तो लक्ष्मण जी के प्राण कौन बचाता? यदि भगवान शिव अपनी जटाओं में माँ गंगा के वेग को न सँभालते, तो धरती के पाप धोने वाली गंगा कभी पृथ्वी पर न आतीं। इसी तरह, यदि संसार में गुरु का ज्ञान, रामायण और गीता जैसे ग्रंथ न होते, तो आज यह हरि-कीर्तन भी नहीं हो रहा होता। ईश्वर जो भी करता है, वह संपूर्ण ब्रह्मांड के कल्याण के लिए ही होता है।

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Frequently Asked Questions

"त्रेता में राम न होते, द्वापर घनश्याम न होते" भजन का मूल संदेश क्या है?

इस सत्संग भजन का मूल संदेश यह है कि संसार में जो भी घटित होता है—चाहे वह राम जी का वनवास हो या महाभारत का युद्ध—वह ईश्वर की एक सोची-समझी लीला है। हर विपत्ति या संघर्ष के पीछे अंततः 'जगत कल्याण' (संसार की भलाई) का उद्देश्य ही छिपा होता है।

भजन के अनुसार राम जी का वनवास क्यों ज़रूरी था?

भजन और रामायण के अनुसार, यदि भगवान राम वनवास नहीं जाते, तो माता सीता का हरण नहीं होता और अहंकारी रावण का अंत कभी नहीं हो पाता। रावण के वध और धर्म की रक्षा के लिए ही वनवास की यह पूरी लीला रची गई थी।

"शिव जी की जटा में, गंगा न समाती" का क्या तात्पर्य है?

यह पंक्ति उस पौराणिक कथा की ओर इशारा करती है जब भगीरथ के तप से माँ गंगा धरती पर आ रही थीं। उनके अपार वेग से धरती को नष्ट होने से बचाने के लिए भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में धारण कर लिया था, ताकि वे शांति से बहकर मनुष्यों के पाप धो सकें।

Categories: Ramayan Prasang, Krishna Bhajan, Chetawani Bhajan, Shri Hari (Vishnu)

Deity: Shri Hari

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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