स्वागतम स्वागतम शुभ स्वागतम (स्वागत गीत) लिरिक्स
Swagatam Swagatam Shubh Swagatam Lyrics Lyrics
तर्ज (Tune): पारंपरिक स्वागत गीत (Traditional Welcome Song)
स्वागतम स्वागतम शुभ स्वागतम (स्वागत गीत) लिरिक्स
SWAGATAM SWAGATAM SHUBH SWAGATAM LYRICS
स्वागतम, स्वागतम, शुभ स्वागतम....... स्वागतम है मान्यवर शुभ स्वागतम। स्वागत करने को हम, कब से अधीर थे, श्रद्धा सुमन से करते हम वंदनम। स्वागतम, स्वागतम, शुभ स्वागतम....... स्वागतम है मान्यवर शुभ स्वागतम। भाग्य हमारे जागे, आप जो पधारे हैं, चरणों में आपके है अभिनंदनम। स्वागतम, स्वागतम, शुभ स्वागतम....... स्वागतम है मान्यवर शुभ स्वागतम। भूल हो यदि हमसे तो, क्षमा याचनायें हैं। करबद्ध होकर करते अभिवादनम। स्वागतम, स्वागतम, शुभ स्वागतम....... स्वागतम है मान्यवर शुभ स्वागतम। वंदनम, अभिनंदनम, अभिवादनम...... स्वागतम है मान्यवर शुभ स्वागतम। स्वागतम, स्वागतम, शुभ स्वागतम....... स्वागतम है मान्यवर शुभ स्वागतम। स्वागतम है मान्यवर शुभ स्वागतम। स्वागतम है मान्यवर शुभ स्वागतम। स्वागतम है मान्यवर शुभ स्वागतम। स्वागतम है मान्यवर शुभ स्वागतम।

अर्थ (Bhavarth)
FAQs
Q1: 'स्वागतम शुभ स्वागतम' (स्वागत गीत) के रचयिता कौन हैं?
A1: भारतीय सत्कार परंपरा और विनम्रता को दर्शाने वाले इस अत्यंत मधुर और लोकप्रिय स्वागत गीत की रचना श्री मोहित तरकर (Mohit Tarkar) जी द्वारा की गई है।
Q2: 'स्वागतम शुभ स्वागतम' गीत का उपयोग मुख्य रूप से कहाँ किया जाता है?
A2: यह एक बहुत ही लोकप्रिय स्वागत गीत है जिसका उपयोग विद्यालयों, सत्संग समारोहों, और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में मुख्य अतिथियों या गुरुजनों के सत्कार के लिए किया जाता है।
Q3: गीत में 'अधीर' और 'श्रद्धा सुमन' का क्या अर्थ है?
A3: 'अधीर' का अर्थ है किसी के आने की बहुत ही उत्सुकता और बेसब्री से प्रतीक्षा करना। 'श्रद्धा सुमन' का अर्थ है आदर और भक्ति रूपी पुष्प (फूल) भेंट करना।
Q4: अतिथि के स्वागत में क्षमा याचना क्यों की गई है?
A4: गीत में क्षमा याचना ("भूल हो यदि हमसे तो...") भारतीय संस्कृति की गहरी विनम्रता को दर्शाती है। इसका अर्थ है कि अतिथि का सत्कार करते समय यदि अनजाने में कोई कमी या भूल रह जाए, तो उसके लिए पहले ही हाथ जोड़कर क्षमा माँग ली जाए।
Q5: इस स्वागत गीत की संरचना (Structure) और भावों का क्रम किस प्रकार रखा गया है?
A5: लेखक ने गीत की संरचना को बहुत ही मनोवैज्ञानिक और श्रृंखलाबद्ध तरीके से पिरोया है। यह गीत सबसे पहले अतिथि के आगमन की 'उत्सुकता' (कब से अधीर थे) से शुरू होता है, उसके बाद उनके आने पर 'सौभाग्य' (भाग्य हमारे जागे) का अनुभव कराता है, और अंत में 'विनम्रता' (क्षमा याचना और करबद्ध अभिवादन) के साथ पूर्णता को प्राप्त होता है।
Q6: गीत के अंतिम पद में "वंदनम, अभिनंदनम, अभिवादनम" का एक साथ प्रयोग क्या दर्शाता है?
A6: रचनाकार ने इन तीनों विशिष्ट शब्दों को एक ही लय में पिरोकर सत्कार की पराकाष्ठा (Climax of Welcome) को दर्शाया है। 'वंदनम' (प्रणाम करना), 'अभिनंदनम' (हृदय से प्रशंसा व स्वागत करना), और 'अभिवादनम' (सम्मानपूर्वक नमस्कार करना) — ये तीनों शब्द मिलकर अतिथि के प्रति सर्वोच्च सम्मान का भाव प्रकट करते हैं।
Q7: गायन (Singing) की दृष्टि से इस गीत की लय (Rhythm) को कैसा रखा गया है?
A7: इस गीत को बहुत ही सरल, प्रवाहमयी और मंत्रमुग्ध करने वाली लय में लिखा गया है। हर अंतरे (Stanza) के बाद मुखड़े "स्वागतम, स्वागतम" का दोहराव इसे सामूहिक रूप से (Group Song या Choir के रूप में) गाने के लिए बहुत ही आसान और प्रभावशाली बनाता है।
Related Tags:
Categories: Welcome Song
Community Comments (0)
Be the first to share your devotion here.