Shri HariShri Hari (Vishnu)

पता नहीं किस रूप में आकर नारायण मिल जाएगा (भजन) लिरिक्स

Pata Nahi Kis Roop Mein Aakar Narayan Mil Jayega Lyrics

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पता नहीं किस रूप में आकर नारायण मिल जाएगा (भजन) लिरिक्स

PATA NAHI KIS ROOP MEIN AAKAR NARAYAN MIL JAYEGA LYRICS

प्रेम प्रभु का बरस रहा है, पीले अमृत प्यासे, सातों तीरथ तेरे अंदर, बाहर किसे तलाशे ... कण-कण में हरि, क्षण-क्षण में हरि, मुस्कानों में, असुअन में हरि, मन की आँखें तूने खोली, तो ही दर्शन पाएगा... पता नहीं किस रूप में आकर, नारायण मिल जाएगा पता नहीं किस रूप में आकर, नारायण मिल जाएगा... नियति भेद नहीं करती, जो लेती है वो देती है, जो बोएगा वो काटेगा, ये जग कर्मों की खेती है। यदि कर्म तेरे पावन हैं, सभी डूबेगी नहीं तेरी नाव कभी, तेरी बाँह पकड़ने को, वो भेष बदल के आएगा... पता नहीं किस रूप में आकर, नारायण मिल जाएगा पता नहीं किस रूप में आकर, नारायण मिल जाएगा नेकी व्यर्थ नहीं जाती, हरि लेखा-जोखा रखते हैं, औरों को फूल दिए जिसने, उसके भी हाथ महकते हैं। कोई दीप मिले तो बाती बन, तू भी तो किसी का साथी बन, मन को मानसरोवर कर ले, तो ही मोती पाएगा... पता नहीं किस रूप में आकर, नारायण मिल जाएगा पता नहीं किस रूप में आकर, नारायण मिल जाएगा... कान लगा के बातें सुन ले, सूखे हुए दरख़्तों की, लेता है भगवान परीक्षा, सबसे प्यारे भक्तों की। एक प्रश्न है गहरा, जिसकी हरि को थाह लगानी है, तेरी श्रद्धा सोना है या, बस सोने का पानी है... जो फूल धरे हर डाली पर, विश्वास तो रख उस माली पर, तेरे भाग में पत्थर है तो, पत्थर भी खिल जाएगा... पता नहीं किस रूप में आकर, नारायण मिल जाएगा पता नहीं किस रूप में आकर, नारायण मिल जाएगा...

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Hindi Bhajan Manjari
प्रेम प्रभु का बरस रहा है,
पीले अमृत प्यासे,
सातों तीरथ तेरे अंदर,
बाहर किसे तलाशे ...
कण-कण में हरि,
क्षण-क्षण में हरि,
मुस्कानों में, असुअन में हरि,
मन की आँखें तूने खोली,
तो ही दर्शन पाएगा...
पता नहीं किस रूप में आकर,
नारायण मिल जाएगा
पता नहीं किस रूप में आकर,
नारायण मिल जाएगा...
नियति भेद नहीं करती,
जो लेती है वो देती है,
जो बोएगा वो काटेगा,
ये जग कर्मों की खेती है।
यदि कर्म तेरे पावन हैं,
सभी डूबेगी नहीं तेरी नाव कभी,
तेरी बाँह पकड़ने को,
वो भेष बदल के आएगा...
पता नहीं किस रूप में आकर,
नारायण मिल जाएगा
पता नहीं किस रूप में आकर,
नारायण मिल जाएगा
नेकी व्यर्थ नहीं जाती,
हरि लेखा-जोखा रखते हैं,
औरों को फूल दिए जिसने,
उसके भी हाथ महकते हैं।
कोई दीप मिले तो बाती बन,
तू भी तो किसी का साथी बन,
मन को मानसरोवर कर ले,
तो ही मोती पाएगा...
पता नहीं किस रूप में आकर,
नारायण मिल जाएगा
पता नहीं किस रूप में आकर,
नारायण मिल जाएगा...
कान लगा के बातें सुन ले,
सूखे हुए दरख़्तों की,
लेता है भगवान परीक्षा,
सबसे प्यारे भक्तों की।
एक प्रश्न है गहरा,
जिसकी हरि को थाह लगानी है,
तेरी श्रद्धा सोना है या,
बस सोने का पानी है...
जो फूल धरे हर डाली पर,
विश्वास तो रख उस माली पर,
तेरे भाग में पत्थर है तो,
पत्थर भी खिल जाएगा...
पता नहीं किस रूप में आकर,
नारायण मिल जाएगा
पता नहीं किस रूप में आकर,
नारायण मिल जाएगा...
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अर्थ (Bhavarth)

यह भजन मनुष्य को जीवन की वास्तविकता, अच्छे कर्मों की महत्ता और ईश्वर की सर्वव्यापकता का गहरा बोध कराता है: 1. कण-कण में ईश्वर का वास: भजन के आरंभ में कहा गया है कि सातों तीर्थ मनुष्य के भीतर ही हैं, ईश्वर को बाहर तलाशने की आवश्यकता नहीं है। भगवान श्री हरि (नारायण) हर कण में, हर पल में, हमारी मुस्कुराहटों में और हमारे आँसुओं में भी मौजूद हैं। जब हम अपने मन की आँखें खोलेंगे, तभी हमें उनके दर्शन होंगे, क्योंकि भगवान किस रूप में आकर मिल जाएँ, यह कोई नहीं जानता। 2. कर्मों की खेती और परोपकार: यह संसार कर्मों की खेती है। यहाँ जो बोया जाता है, वही काटा जाता है। यदि आपके कर्म पवित्र (पावन) हैं, तो आपकी जीवन रूपी नाव कभी नहीं डूबेगी; स्वयं ईश्वर भेष बदलकर आपकी बाँह पकड़ने आएँगे। जो व्यक्ति दूसरों को फूल (खुशियां) देता है, उसके अपने हाथ भी महकते हैं (पुण्य मिलता है)। हमें दूसरों के जीवन में दीपक की बाती और एक सच्चा साथी बनना चाहिए। 3. भगवान की परीक्षा और अटूट विश्वास: भजन के अंतिम भाग में एक बहुत बड़ा संदेश है कि ईश्वर हमेशा अपने सबसे प्रिय भक्तों की ही कठिन परीक्षा लेते हैं। वे यह देखते हैं कि भक्त की श्रद्धा सच्चा 'सोना' है या केवल 'सोने का पानी' (दिखावा) है। जिस परमेश्वर (माली) ने हर डाली पर फूल खिलाए हैं, उस पर पूरा विश्वास रखना चाहिए। यदि तुम्हारी किस्मत में पत्थर भी लिखे होंगे, तो भगवान की कृपा से वे पत्थर भी फूल बनकर खिल जाएँगे।

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Frequently Asked Questions

"पता नहीं किस रूप में आकर नारायण मिल जाएगा" भजन का मूल संदेश क्या है?

इस अत्यंत भावपूर्ण भजन का मूल संदेश 'परोपकार' (नेकी) और 'ईश्वर की सर्वव्यापकता' है। यह सिखाता है कि हमें हर प्राणी के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए, क्योंकि भगवान श्री हरि विष्णु किसी भी रूप (भिखारी, असहाय या मित्र) में आकर हमारी परीक्षा ले सकते हैं और हमें दर्शन दे सकते हैं।

"औरों को फूल दिए जिसने, उसके भी हाथ महकते हैं" का क्या अर्थ है?

: यह पंक्ति 'कर्म के सिद्धांत' को बहुत ही खूबसूरती से समझाती है। इसका अर्थ है कि जो व्यक्ति निस्वार्थ भाव से दूसरों की मदद करता है और उनके जीवन में खुशियां (फूल) बांटता है, उस व्यक्ति का अपना जीवन भी पुण्य और शांति (महक) से भर जाता है। नेकी कभी व्यर्थ नहीं जाती।

भजन में भगवान को "माली" क्यों कहा गया है?

जिस प्रकार एक माली बगीचे की हर डाली पर सुंदर फूल खिलाता है और पौधों की रक्षा करता है, उसी प्रकार भगवान इस सृष्टि रूपी बगीचे के 'माली' (रचयिता और पालनहार) हैं। भजन में संदेश दिया गया है कि हमें उस 'माली' पर पूरा विश्वास रखना चाहिए, वह हमारे जीवन के पत्थरों (कठिनाइयों) को भी फूलों में बदल सकता है।

Categories: Shri Hari (Vishnu)

Deity: Shri Hari

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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