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मिश्री से भी मीठा नाम तेरा, तेरा जी मैया ऊँचे पहाड़ों पर डेरा (लखबीर सिंह लक्खा) भजन लिरिक्स

Mishri Se Bhi Meetha Naam Tera Lyrics (Lakhbir Singh Lakkha) Lyrics

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मिश्री से भी मीठा नाम तेरा, तेरा जी मैया ऊँचे पहाड़ों पर डेरा (लखबीर सिंह लक्खा) भजन लिरिक्स

MISHRI SE BHI MEETHA NAAM TERA LYRICS LAKHBIR SINGH LAKKHA

मिश्री से भी मीठा नाम तेरा, तेरा जी मैया ऊँचे पहाड़ों पर डेरा। डेरा जी तेरा मंदिर सुनहरी, शेरावालिये॥ हो तेरे दर से माँ अमृत की धारा, हाँ झर-झर बरस रही। तेरा दर्शन पाने को मैया, है दुनिया तरस रही। मैंने लिख दी अर्जी, मैया मैंने भी लिख दी माता अर्जी। अर्जी जी मैया, आगे जो तेरी मर्जी, अर्जी पे मेरी गौर तो करो माँ शेरावालिये॥ माँ मिश्री से भी मीठा नाम तेरा, तेरा जी मैया ऊँचे पहाड़ों पर डेरा। डेरा जी तेरा मंदिर सुनहरी, शेरावालिये॥ सदा आती पहाड़ों से तेरे, मैया जी हवा सुखों से भरी। बाँटे खुशियाँ तू भक्तों को अपने, माँ तुझ सा दयालु ना कोई। तूने है बनाई, माँ तूने बनाई सारी सृष्टि सृष्टि जी। माता चाहूँ मैं बस दया की दृष्टि दृष्टि जी। करो मुझ पे मेहरों की मेहरा वालिये॥ माँ मिश्री से भी मीठा नाम तेरा, तेरा जी मैया ऊँचे पहाड़ों पर डेरा। डेरा जी तेरा मंदिर सुनहरी, शेरावालिये॥ तेरी ज्योत माँ न्यारी न्यारी, है जगमग जगमग सदियों से। सारी दुनिया में तेरी चर्चा, मैं देख रहा अखियों से। कोमल है बालक, माँ कोमल जी बालक माता तेरा तेरा जी। लक्खा डाल दिया तेरे दर डेरा डेरा जी। मैया जाऊँगा ना खाली शेरावालिये॥ माँ मिश्री से भी মিশনের मीठा नाम तेरा, तेरा जी मैया ऊँचे पहाड़ों पर डेरा। डेरा जी तेरा मंदिर सुनहरी, शेरावालिये॥ माँ मिश्री से भी मीठा नाम तेरा, तेरा जी मैया ऊँचे पहाड़ों पर डेरा। डेरा जी तेरा मंदिर सुनहरी, शेरावालिये॥ शेरावाली शेरावालिये, मेहरावालिये मेहरावालिये, पहाड़ा वालिये शेरा वालिये॥

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HINDI BHAJAN

मिश्री से भी मीठा नाम तेरा, तेरा जी मैया ऊँचे पहाड़ों पर डेरा। डेरा जी तेरा मंदिर सुनहरी, शेरावालिये॥

हो तेरे दर से माँ अमृत की धारा, हाँ झर-झर बरस रही। तेरा दर्शन पाने को मैया, है दुनिया तरस रही। मैंने लिख दी अर्जी, मैया मैंने भी लिख दी माता अर्जी। अर्जी जी मैया, आगे जो तेरी मर्जी, अर्जी पे मेरी गौर तो करो माँ शेरावालिये॥

माँ मिश्री से भी मीठा नाम तेरा, तेरा जी मैया ऊँचे पहाड़ों पर डेरा। डेरा जी तेरा मंदिर सुनहरी, शेरावालिये॥

सदा आती पहाड़ों से तेरे, मैया जी हवा सुखों से भरी। बाँटे खुशियाँ तू भक्तों को अपने, माँ तुझ सा दयालु ना कोई। तूने है बनाई, माँ तूने बनाई सारी सृष्टि सृष्टि जी। माता चाहूँ मैं बस दया की दृष्टि दृष्टि जी। करो मुझ पे मेहरों की मेहरा वालिये॥

माँ मिश्री से भी मीठा नाम तेरा, तेरा जी मैया ऊँचे पहाड़ों पर डेरा। डेरा जी तेरा मंदिर सुनहरी, शेरावालिये॥

तेरी ज्योत माँ न्यारी न्यारी, है जगमग जगमग सदियों से। सारी दुनिया में तेरी चर्चा, मैं देख रहा अखियों से। कोमल है बालक, माँ कोमल जी बालक माता तेरा तेरा जी। लक्खा डाल दिया तेरे दर डेरा डेरा जी। मैया जाऊँगा ना खाली शेरावालिये॥

माँ मिश्री से भी মিশনের मीठा नाम तेरा, तेरा जी मैया ऊँचे पहाड़ों पर डेरा। डेरा जी तेरा मंदिर सुनहरी, शेरावालिये॥

माँ मिश्री से भी मीठा नाम तेरा, तेरा जी मैया ऊँचे पहाड़ों पर डेरा। डेरा जी तेरा मंदिर सुनहरी, शेरावालिये॥

शेरावाली शेरावालिये, मेहरावालिये मेहरावालिये, पहाड़ा वालिये शेरा वालिये॥

मिश्री से भी मीठा नाम तेरा, तेरा जी मैया ऊँचे पहाड़ों पर डेरा (लखबीर सिंह लक्खा) भजन लिरिक्स Video

अर्थ (Bhavarth)

चैत्र नवरात्रि के पावन दिनों में, जब बात माता की भेंटों की हो, तो भजन सम्राट लखबीर सिंह लक्खा (Lakhbir Singh Lakkha) जी का नाम सबसे ऊपर आता है। उनके सुपरहिट एल्बम 'मैया का जवाब नहीं' से लिया गया यह भजन "मिश्री से भी मीठा नाम तेरा" भक्तों के भीतर एक अद्भुत ऊर्जा और माता के प्रति अटूट प्रेम जगा देता है। लक्खा जी का यह भजन माता के दरबार (विशेषकर माता वैष्णो देवी के भवन) की महिमा और भक्त के अटूट विश्वास का एक अत्यंत ही सुंदर चित्रण है। इसके भावार्थ को तीन मुख्य चरणों में समझा जा सकता है: 1. नाम की मिठास और भक्त की 'अर्जी': भक्त माता रानी की महिमा का बखान करते हुए कहता है कि "हे शेरावालिये! आपका नाम मिश्री (शक्कर) से भी मीठा है और आपका सुनहरा मंदिर (डेरा) ऊँचे पहाड़ों पर स्थित है।" माता के दरबार से हमेशा अमृत की धारा बहती है और पूरी दुनिया उनके एक दर्शन के लिए तरसती है। भक्त अपनी झोली फैलाने के बजाय एक बहुत ही प्यारा भाव रखता है— वह कहता है कि "हे माँ! मैंने अपनी प्रार्थना (अर्जी) लिखकर आपके दरबार में लगा दी है। अब आगे आपकी जो मर्ज़ी हो, पर एक बार मेरी अर्जी पर गौर (ध्यान) ज़रूर करना।" 2. सृष्टि की रचयिता और सुखों की हवा: दूसरे अंतरे में प्राकृतिक और आध्यात्मिक शांति का वर्णन है। माता के ऊँचे पहाड़ों से हमेशा सुख और शांति से भरी हवा आती है। माँ अपने सभी भक्तों को खुशियाँ बांटती हैं और उनके जैसा दयालु इस संसार में कोई नहीं है। भक्त कहता है कि "हे माता! तुमने ही इस पूरी सृष्टि (ब्रह्मांड) की रचना की है, मैं तुमसे कोई सांसारिक धन नहीं, बल्कि केवल तुम्हारी 'दया की दृष्टि' (कृपा) चाहता हूँ।" 3. सदियों से जलती अखंड ज्योति और भक्त की ज़िद: भजन के अंतिम भाग में माता की अखंड ज्योति का वर्णन है, जो सदियों से जगमग कर रही है (जैसे ज्वाला जी या वैष्णो देवी की ज्योति)। पूरी दुनिया में माता के चमत्कारों की चर्चा है, जिसे भक्त अपनी आँखों से देख रहा है। अंत में, गायक (लक्खा जी) और रचयिता (कोमल जी) अपने भावों को एक छोटे और कोमल बालक के रूप में प्रस्तुत करते हुए ज़िद करते हैं कि "हे माँ! हमने तेरे दर पर अपना डेरा डाल दिया है, और हम तेरे दरबार से कभी खाली हाथ वापस नहीं जाएंगे।"

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Frequently Asked Questions

Q1: 'मिश्री से भी मीठा नाम तेरा' भजन के गायक और एल्बम का नाम क्या है?

यह ऊर्जावान और अत्यंत लोकप्रिय माता भेंट भजन सम्राट लखबीर सिंह लक्खा (Lakhbir Singh Lakkha) जी द्वारा गाई गई है। यह उनके सुपरहिट टी-सीरीज़ एल्बम 'मैया का जवाब नहीं' का प्रमुख भजन है।

Q2: भजन में "मैंने लिख दी अर्जी" का क्या अर्थ है?

'अर्जी' (Petition) का अर्थ है प्रार्थना पत्र या विनती। माता वैष्णो देवी और अन्य दरबारों में भक्त अपनी मनोकामनाएं लाल कपड़े या कागज़ पर लिखकर माता के चरणों में अर्पित करते हैं। भक्त भी इसी परंपरा का पालन करते हुए अपनी पुकार माता तक पहुँचा रहा है।

Q3: "तेरा जी मैया ऊँचे पहाड़ों पर डेरा" में किस मंदिर का संकेत है?

'ऊँचे पहाड़ों पर डेरा' मुख्य रूप से त्रिकुटा पर्वत पर स्थित माता वैष्णो देवी के पावन भवन की ओर संकेत करता है, जो अपनी भव्यता (सुनहरी मंदिर) और पवित्रता के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है।

Categories: Mata Ke Bhajan, Navratri Special

Deity: Mata Rani

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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