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माटी की महिमा (जगत जननी पायी माटी से) भजन लिरिक्स

Maati Ki Mahima Bhajan Lyrics - Jagat Janani Paayi Maati Se Lyrics

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तर्ज (Tune): कोई पत्थर से न मारे मेरे दीवाने को (Koi Patthar Se Na Maare)

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माटी की महिमा (जगत जननी पायी माटी से) भजन लिरिक्स

MAATI KI MAHIMA JAGAT JANANI PAAYI MAATI SE LYRICS

जन्म माटी में पाया है, मरण माटी में, सारे संसार का तारण तरण है माटी में, एक आधार माटी, वो पालनहार माटी, सदा जन-जन पे करती आई उपकार माटी। देखो महिमा माटी की पायी खोने पाने में, जगत जननी पायी माटी से किसी ज़माने में। मान माटी का श्रीमान ने बढ़ाया है, खेले माटी में, माटी को स्वयं खाया है। सार संसार माटी, माटी के घट बनाते, हर एक घट जानता है, जहाँ में पूजे जाते। आज गज पुजता, माटी का हर घराने में। जगत जननी पायी माटी से किसी ज़माने में। बना माटी के गुरु ज्ञान जग में पाया है, माटी की प्रतिमा से, दरबार को सजाया है। सीख माटी से मिलती, ज़माना जानता है, करे माटी का तिलक, इसे माँ मानता है। पार माटी का न पाया है किसी पैमाने में, जगत जननी पायी माटी से किसी ज़माने में।

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जन्म माटी में पाया है, मरण माटी में, सारे संसार का तारण तरण है माटी में, एक आधार माटी, वो पालनहार माटी, सदा जन-जन पे करती आई उपकार माटी। देखो महिमा माटी की पायी खोने पाने में, जगत जननी पायी माटी से किसी ज़माने में।

मान माटी का श्रीमान ने बढ़ाया है, खेले माटी में, माटी को स्वयं खाया है। सार संसार माटी, माटी के घट बनाते, हर एक घट जानता है, जहाँ में पूजे जाते। आज गज पुजता, माटी का हर घराने में। जगत जननी पायी माटी से किसी ज़माने में।

बना माटी के गुरु ज्ञान जग में पाया है, माटी की प्रतिमा से, दरबार को सजाया है। सीख माटी से मिलती, ज़माना जानता है, करे माटी का तिलक, इसे माँ मानता है। पार माटी का न पाया है किसी पैमाने में, जगत जननी पायी माटी से किसी ज़माने में।

माटी की महिमा (जगत जननी पायी माटी से) भजन लिरिक्स Video

अर्थ (Bhavarth)

यह भजन हमें मिट्टी (माटी) की महत्ता समझाता है, जिसे हम अक्सर तुच्छ समझते हैं। कवि कहते हैं कि हमारा जन्म और अंत दोनों इसी माटी में है। भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं माटी में खेलकर और माटी खाकर इसका मान बढ़ाया। इसी माटी से माता सीता (जगत जननी) प्रकट हुई थीं। एकलव्य ने माटी की प्रतिमा को गुरु मानकर धनुर्विद्या का ज्ञान पाया। यह भजन सिखाता है कि माटी केवल धूल नहीं, बल्कि हमारी पालनहार और आधार है, जिसे हम अपनी माँ मानकर तिलक करते हैं।

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Frequently Asked Questions

'जगत जननी पायी माटी से' पंक्ति का क्या अर्थ है?

इस पंक्ति का संदर्भ माता सीता (जगत जननी) से है, जो राजा जनक को हल चलाते समय धरती (माटी) के भीतर एक कलश में मिली थीं। यह माटी की परम पवित्रता को दर्शाता है।

क्या मैं 'Maati Ki Mahima Lyrics PDF' किसी दूसरी भाषा में डाउनलोड कर सकता हूँ?

जी हाँ! हमारी वेबसाइट पर PDF और ट्रांसलेशन बटन्स लिरिक्स के ठीक ऊपर उपलब्ध हैं। आप अपनी पसंदीदा भाषा (English, Gujarati, आदि) चुनकर तुरंत PDF सेव कर सकते हैं।

इस भजन में भगवान कृष्ण और एकलव्य का क्या संदर्भ दिया गया है?

भजन में बताया गया है कि श्री कृष्ण ने माटी खाकर उसका मान बढ़ाया और एकलव्य ने द्रोणाचार्य की माटी की प्रतिमा बनाकर ही संसार का सर्वश्रेष्ठ ज्ञान प्राप्त किया था।

Categories: Chetawani Bhajan, Filmi Tarz Bhajan

Deity: Nirgun

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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