Mata RaniMata Ke Bhajan

ले जाओ दौलत, मैं मेरी माँ रख लेता हूँ (माता भेंट) लिरिक्स

Le Jao Daulat Main Meri Maa Rakh Leta Hoon Lyrics Lyrics

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ले जाओ दौलत, मैं मेरी माँ रख लेता हूँ (माता भेंट) लिरिक्स

LE JAO DAULAT MAIN MERI MAA RAKH LETA HOON LYRICS

तेरी चढ़ती रहे महिमा, तेरी जलती रहे ज्योति, दरबार सजे तेरा ऊँचे पर्वत की चोटी। दुनिया के बदले तेरी ममता रख लेता हूँ, सारी दुनिया के बदले तेरी ममता रख लेता हूँ। ले जाओ दौलत, मैं मेरी माँ रख लेता हूँ, सारी ले जाओ दौलत, मैं मेरी माँ रख लेता हूँ। तेरी मूरत को सीने में सजा रख लेता हूँ, ले जाओ दौलत, मैं मेरी माँ रख लेता हूँ। ममता की एक बूँद कहूँ तो सारा समंदर रखती है, मुझको सारी दुनिया में मेरी माँ ही सुंदर लगती है। रखते हैं भगवान की मूरत लोग तो मंदिर में, मेरे मन-मंदिर में तेरे पाँव रख लेता हूँ। ले जाओ दौलत, मैं मेरी माँ रख लेता हूँ, सारी ले जाओ दौलत, मैं मेरी माँ रख लेता हूँ। मेरे पास भी आने तक से ये अँधियारे डरते हैं, मेरे घर के सारे दीपक मेरी माँ से जलते हैं। नींद न आए जब मुझको, डर-चिंता सताए तो, चुपके से सिर गोद में तेरी आ रख लेता हूँ। ले जाओ दौलत, मैं मेरी माँ रख लेता हूँ, सारी ले जाओ दौलत, मैं मेरी माँ रख लेता हूँ। तेरी मूरत को सीने में सजा रख लेता हूँ, ले जाओ दौलत, मैं मेरी माँ रख लेता हूँ। तू ममता की मूरत है, और तू ही प्रेम का सागर है, धूप सताए क्या मुझको, जब सिर पे तेरा आँचल है। रूठे तो ये जग रूठे रहे, तेरा-मेरा नाता, माँ, इस दुनिया में कोई नहीं जो मेरी माँ के बराबर है।

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तेरी चढ़ती रहे महिमा, तेरी जलती रहे ज्योति, दरबार सजे तेरा ऊँचे पर्वत की चोटी। दुनिया के बदले तेरी ममता रख लेता हूँ, सारी दुनिया के बदले तेरी ममता रख लेता हूँ।

ले जाओ दौलत, मैं मेरी माँ रख लेता हूँ, सारी ले जाओ दौलत, मैं मेरी माँ रख लेता हूँ। तेरी मूरत को सीने में सजा रख लेता हूँ, ले जाओ दौलत, मैं मेरी माँ रख लेता हूँ।

ममता की एक बूँद कहूँ तो सारा समंदर रखती है, मुझको सारी दुनिया में मेरी माँ ही सुंदर लगती है। रखते हैं भगवान की मूरत लोग तो मंदिर में, मेरे मन-मंदिर में तेरे पाँव रख लेता हूँ। ले जाओ दौलत, मैं मेरी माँ रख लेता हूँ, सारी ले जाओ दौलत, मैं मेरी माँ रख लेता हूँ।

मेरे पास भी आने तक से ये अँधियारे डरते हैं, मेरे घर के सारे दीपक मेरी माँ से जलते हैं। नींद न आए जब मुझको, डर-चिंता सताए तो, चुपके से सिर गोद में तेरी आ रख लेता हूँ। ले जाओ दौलत, मैं मेरी माँ रख लेता हूँ, सारी ले जाओ दौलत, मैं मेरी माँ रख लेता हूँ।

तेरी मूरत को सीने में सजा रख लेता हूँ, ले जाओ दौलत, मैं मेरी माँ रख लेता हूँ।

तू ममता की मूरत है, और तू ही प्रेम का सागर है, धूप सताए क्या मुझको, जब सिर पे तेरा आँचल है। रूठे तो ये जग रूठे रहे, तेरा-मेरा नाता, माँ, इस दुनिया में कोई नहीं जो मेरी माँ के बराबर है।

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अर्थ (Bhavarth)

यह गीत एक ऐसा दर्पण है जिसमें माँ की ममता और उसके असीम त्याग की झलक दिखाई देती है। जीवन में माँ का साया होना किसी भी दौलत से कहीं बढ़कर है। इस गीत के गहरे भावों को तीन मुख्य चरणों में समझा जा सकता है: 1. संसार की दौलत से बढ़कर माँ का प्रेम: गीत की शुरुआत ऊंचे पर्वतों पर विराजमान माता रानी की महिमा से होती है, लेकिन यह गीत हर उस माँ को समर्पित है जो अपने बच्चों के लिए जीती है। भक्त/संतान पूरी दुनिया को चुनौती देते हुए कहता है कि "तुम चाहो तो संसार की सारी दौलत, शोहरत और सुख ले जाओ, मुझे केवल मेरी माँ चाहिए।" माँ की ममता के बदले पूरी दुनिया का राजपाट भी तुच्छ (छोटा) है। 2. मन का मंदिर और माँ की सुरक्षा: कवि बहुत ही सुंदर कल्पना करते हुए कहता है कि माँ की ममता की एक बूँद भी समंदर जितनी गहरी होती है। लोग भगवान की पत्थर की मूरत को मंदिरों में सजाते हैं, लेकिन एक सच्ची संतान अपने मन के मंदिर में हमेशा अपनी माँ के चरणों को बसा कर रखती है। जब घर में माँ होती है, तो दुखों और परेशानियों का अँधेरा पास आने से भी डरता है। जीवन में जब भी कोई चिंता या डर सताता है, तो माँ की गोद में सिर रखते ही सारी परेशानियां दूर हो जाती हैं और मीठी नींद आ जाती है। 3. माँ का आँचल और सर्वोच्च स्थान: अंतिम भाग में संतान अपनी माँ को प्रेम का सागर मानती है। जीवन की कड़ी धूप (कठिनाइयां) उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकतीं क्योंकि उसके सिर पर माँ की दुआओं का आँचल है। दुनिया रूठती है तो रूठ जाए, लेकिन इस पूरे ब्रह्मांड में ऐसा कोई नहीं है जो एक माँ की बराबरी कर सके।

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Frequently Asked Questions

Q1: 'ले जाओ दौलत मैं मेरी माँ रख लेता हूँ' गीत किसे समर्पित है?

A1: यह अत्यंत भावुक गीत दोहरे अर्थ (Dual meaning) में गाया जाता है। यह ऊंचे पहाड़ों पर बैठी 'माता रानी' (जगत जननी) के साथ-साथ जन्म देने वाली अपनी 'सांसारिक माँ' को भी पूर्ण रूप से समर्पित है।

Q2: "ममता की एक बूँद कहूँ तो सारा समंदर रखती है" का क्या अर्थ है?

A2: इसका अर्थ है कि एक माँ का प्यार और त्याग इतना विशाल है कि उसे मापा नहीं जा सकता। माँ के प्यार का एक छोटा सा हिस्सा (बूँद) भी अपनी गहराई और विशालता में पूरे समुद्र के बराबर होता है।

Q3: "मेरे घर के सारे दीपक मेरी माँ से जलते हैं" पंक्ति का भाव क्या है?

A3: 'दीपक' यहाँ खुशियों और घर की रौनक का प्रतीक है। संतान मानती है कि उसके घर में जो भी सुख, शांति, समृद्धि और रोशनी है, वह सब केवल उसकी माँ के होने और माँ के आशीर्वाद से ही है।

Categories: Mata Ke Bhajan

Deity: Mata Rani

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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