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लाल चुनरी में सजी मेरी माँ (पारुल गुप्ता) माता भजन लिरिक्स

Laal Chunari Mein Saji Meri Maa Lyrics (Parul Gupta) Lyrics

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HINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARI

लाल चुनरी में सजी मेरी माँ (पारुल गुप्ता) माता भजन लिरिक्स

LAAL CHUNARI MEIN SAJI MERI MAA LYRICS PARUL GUPTA

॥ श्लोक ॥ या देवी सर्वभूतेषु, शक्ति रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः। ॥ जयकारा ॥ सब मिल बोलो ज़ोर से — जय माता दी! जय दुर्गा मैया की! ॥ मुखड़ा ॥ लाल चुनरी में सजी मेरी माँ, दुर्गा मैया आई द्वार। जो भी माँ को सच्चे मन से पुकारे, भर देती माँ उसकी झोली अपार। जय अम्बे, जय अम्बे, जय जगदम्बे माँ। जय अम्बे, जय अम्बे, जय जगदम्बे माँ। ॥ अंतरा 1 ॥ माथे बिंदी लाल सुहानी, नयनों में ममता प्यारी। हाथों में चूड़ियाँ खनके माँ की, भक्तों की रखवाली। जय अम्बे, जय अम्बे, जय जगदम्बे माँ। ॥ अंतरा 2 ॥ सिंह सवारी माँ भवानी, हाथों में त्रिशूल धारी। दुष्टों का संहार करें माँ, भक्तों की रखवाली। जय अम्बे, जय अम्बे, जय जगदम्बे माँ। ॥ अंतिम प्रार्थना ॥ तेरे चरणों में शीश झुकाएँ, दे दे माँ आशीष। भक्ति दे दे, शक्ति दे दे, कर दे जीवन दीप्त। ॥ समापन जयकारा ॥ सब मिल बोलो — जय माता दी! जय जगदम्बे!

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॥ श्लोक ॥ या देवी सर्वभूतेषु, शक्ति रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः।

॥ जयकारा ॥ सब मिल बोलो ज़ोर से — जय माता दी! जय दुर्गा मैया की!

॥ मुखड़ा ॥ लाल चुनरी में सजी मेरी माँ, दुर्गा मैया आई द्वार। जो भी माँ को सच्चे मन से पुकारे, भर देती माँ उसकी झोली अपार। जय अम्बे, जय अम्बे, जय जगदम्बे माँ। जय अम्बे, जय अम्बे, जय जगदम्बे माँ।

॥ अंतरा 1 ॥ माथे बिंदी लाल सुहानी, नयनों में ममता प्यारी। हाथों में चूड़ियाँ खनके माँ की, भक्तों की रखवाली। जय अम्बे, जय अम्बे, जय जगदम्बे माँ।

॥ अंतरा 2 ॥ सिंह सवारी माँ भवानी, हाथों में त्रिशूल धारी। दुष्टों का संहार करें माँ, भक्तों की रखवाली। जय अम्बे, जय अम्बे, जय जगदम्बे माँ।

॥ अंतिम प्रार्थना ॥ तेरे चरणों में शीश झुकाएँ, दे दे माँ आशीष। भक्ति दे दे, शक्ति दे दे, कर दे जीवन दीप्त।

॥ समापन जयकारा ॥ सब मिल बोलो — जय माता दी! जय जगदम्बे!

लाल चुनरी में सजी मेरी माँ (पारुल गुप्ता) माता भजन लिरिक्स Video

अर्थ (Bhavarth)

नवरात्रि और माता के जागरण के लिए, गायिका और लेखिका पारुल गुप्ता (Parul Gupta) जी द्वारा प्रस्तुत यह नया माता भजन "लाल चुनरी में सजी मेरी माँ" अत्यंत ही मधुर और भक्तिभाव से परिपूर्ण है। इस भजन की शुरुआत पवित्र श्लोक "या देवी सर्वभूतेषु" से होती है, जो इसे और भी दिव्य बना देती है। यह भजन माता जगदम्बे के अलौकिक सौंदर्य, उनकी शक्ति और उनकी करुणा का एक बहुत ही सरल और सुंदर वर्णन है। इस भजन को तीन मुख्य चरणों में समझा जा सकता है: 1. पवित्र श्लोक और माँ का आगमन: भजन की शुरुआत 'दुर्गा सप्तशती' के सिद्ध श्लोक से होती है, जिसका अर्थ है— "जो देवी सभी प्राणियों में 'शक्ति' के रूप में स्थित हैं, उन्हें मेरा बार-बार नमस्कार है।" भक्त उल्लास से जयकारा लगाते हुए कहता है कि आज लाल चुनरी में सजकर स्वयं दुर्गा मैया हमारे द्वार पर पधारी हैं। जो भी भक्त उन्हें सच्चे मन से पुकारता है, माँ उसकी खाली झोली को अपनी अपार कृपा से भर देती हैं। 2. माँ का मनमोहक लाल श्रृंगार और ममता: पहले अंतरे में माता के दिव्य स्वरूप का वर्णन किया गया है। माँ के माथे पर लाल बिंदी बहुत ही सुंदर (सुहानी) लग रही है और उनकी आँखों (नयनों) में अपने बच्चों के लिए असीम ममता झलक रही है। भक्तों की रक्षा करने वाली उस जगदम्बे के हाथों में लाल चूड़ियाँ खनक रही हैं, जो सुहाग और सौभाग्य का प्रतीक हैं। 3. शक्ति स्वरूपा और जीवन को 'दीप्त' करने की प्रार्थना: दूसरे अंतरे में माँ के शक्ति और रौद्र स्वरूप का दर्शन है। माता भवानी शेर (सिंह) पर सवार हैं और उन्होंने हाथों में त्रिशूल धारण किया हुआ है, जिससे वे दुष्टों का नाश करती हैं और अपने भक्तों की रक्षा करती हैं। अंत में भक्त माता के चरणों में अपना सिर (शीश) झुकाकर आशीर्वाद मांगता है कि "हे माँ! हमें अपनी भक्ति और शक्ति दो, ताकि हमारा यह जीवन ज्ञान और आनंद के प्रकाश से दीप्त (रौशन) हो जाए।"

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Frequently Asked Questions

Q1: 'लाल चुनरी में सजी मेरी माँ' भजन की लेखिका और गायिका कौन हैं?

माता का यह अत्यंत मधुर और नया भजन पारुल गुप्ता (Parul Gupta) जी द्वारा ही लिखा और गाया गया है।

Q2: भजन की शुरुआत में पढ़े गए श्लोक का क्या अर्थ है?

"या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता..." यह दुर्गा सप्तशती का श्लोक है। इसका अर्थ है: "हे माँ! आप इस संसार के सभी प्राणियों में 'शक्ति' (Energy/Power) के रूप में विराजमान हैं, मैं आपको बारंबार नमन करता हूँ।"

Q3: "कर दे जीवन दीप्त" पंक्ति का क्या भाव है?

'दीप्त' का अर्थ होता है— प्रकाशित करना, चमकाना या रौशन करना (Enlightened)। भक्त माता से प्रार्थना कर रहा है कि मुझे अपनी भक्ति और शक्ति का ऐसा आशीर्वाद दो जिससे मेरा यह जीवन ज्ञान और प्रकाश से भर जाए।

Categories: Mata Ke Bhajan, Navratri Special

Deity: Mata Rani

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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