Mata RaniMata Ke BhajanNavratri Special

कभी फुर्सत हो तो जगदंबे, निर्धन के घर भी आ जाना (माता भेंट) लिरिक्स

Kabhi Fursat Ho To Jagdambe Nirdhan Ke Ghar Bhi Aa Jana Lyrics Lyrics

तर्ज (Tune): बाबुल की दुआएं लेती जा

HINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARI

कभी फुर्सत हो तो जगदंबे, निर्धन के घर भी आ जाना (माता भेंट) लिरिक्स

KABHI FURSAT HO TO JAGDAMBE NIRDHAN KE GHAR BHI AA JANA LYRICS

कभी फुर्सत हो तो जगदंबे, निर्धन के घर भी आ जाना, जो रूखा सूखा दिया हमें, कभी उसका भोग लगा जाना, कभी फुर्सत हो तो जगदंबे, निर्धन के घर भी आ जाना।। ना छत्र बना सका सोने का, ना चुनरी घर मेरे तारों जड़ी, ना पेड़े बर्फी मेवा है माँ, बस श्रद्धा है नैन बिछाए खड़ी, इस श्रद्धा की रख लो लाज हे माँ, इस अर्जी को ना ठुकरा जाना, जो रूखा सूखा दिया हमें, कभी उसका भोग लगा जाना, कभी फुर्सत हो तो जगदंबे, निर्धन के घर भी आ जाना।। जिस घर के दीये में तेल नहीं, वहाँ ज्योत जलाऊँ मैं कैसे, मेरा खुद ही बिछौना धरती पर, तेरी चौकी सजाऊँ मैं कैसे, जहाँ मैं बैठा वहीं बैठ के माँ, बच्चों का दिल बहला जाना, जो रूखा सूखा दिया हमें, कभी उसका भोग लगा जाना, कभी फुर्सत हो तो जगदंबे, निर्धन के घर भी आ जाना।। तू भाग्य बनाने वाली है, माँ मैं तकदीर का मारा हूँ, हे दाती संभालो भिखारी को, आखिर तेरी आँख का तारा हूँ, मैं दोषी तू निर्दोष है माँ, मेरे दोषों को तू भुला जाना, जो रूखा सूखा दिया हमें, कभी उसका भोग लगा जाना, कभी फुर्सत हो तो जगदंबे, निर्धन के घर भी आ जाना।।

Downloaded from

HINDI BHAJAN

कभी फुर्सत हो तो जगदंबे, निर्धन के घर भी आ जाना, जो रूखा सूखा दिया हमें, कभी उसका भोग लगा जाना, कभी फुर्सत हो तो जगदंबे, निर्धन के घर भी आ जाना।।

ना छत्र बना सका सोने का, ना चुनरी घर मेरे तारों जड़ी, ना पेड़े बर्फी मेवा है माँ, बस श्रद्धा है नैन बिछाए खड़ी, इस श्रद्धा की रख लो लाज हे माँ, इस अर्जी को ना ठुकरा जाना, जो रूखा सूखा दिया हमें, कभी उसका भोग लगा जाना, कभी फुर्सत हो तो जगदंबे, निर्धन के घर भी आ जाना।।

जिस घर के दीये में तेल नहीं, वहाँ ज्योत जलाऊँ मैं कैसे, मेरा खुद ही बिछौना धरती पर, तेरी चौकी सजाऊँ मैं कैसे, जहाँ मैं बैठा वहीं बैठ के माँ, बच्चों का दिल बहला जाना, जो रूखा सूखा दिया हमें, कभी उसका भोग लगा जाना, कभी फुर्सत हो तो जगदंबे, निर्धन के घर भी आ जाना।।

तू भाग्य बनाने वाली है, माँ मैं तकदीर का मारा हूँ, हे दाती संभालो भिखारी को, आखिर तेरी आँख का तारा हूँ, मैं दोषी तू निर्दोष है माँ, मेरे दोषों को तू भुला जाना, जो रूखा सूखा दिया हमें, कभी उसका भोग लगा जाना, कभी फुर्सत हो तो जगदंबे, निर्धन के घर भी आ जाना।।

कभी फुर्सत हो तो जगदंबे, निर्धन के घर भी आ जाना (माता भेंट) लिरिक्स Video

अर्थ (Bhavarth)

निर्धन (Nirdhan): गरीब या जिसके पास धन न हो (Poor/Penniless)। रूखा सूखा (Rookha Sookha): सादा या बिना छौंक-मसाले और घी का भोजन (Plain, dry food)। छत्र (Chhatra): भगवान की मूर्ति के ऊपर लगाया जाने वाला सोने या चांदी का छाता (Divine Canopy)। श्रद्धा (Shraddha): सच्चा विश्वास और अटूट भक्ति (Pure Devotion)। बिछौना (Bichhauna): सोने का बिस्तर (Bed/Bedding)। चौकी (Chauki): लकड़ी का आसन जिस पर माता रानी की मूर्ति स्थापित की जाती है। दाती (Daati): सब कुछ देने वाली या वरदान देने वाली माँ (The Giver)। संपूर्ण भावार्थ: एक अत्यंत निर्धन (गरीब) भक्त माता जगदंबे से प्रार्थना कर रहा है कि "हे माँ! अगर कभी फुरसत मिले तो मुझ गरीब के घर भी आना। आपने ही मुझे जो रूखा-सूखा अन्न दिया है, आज उसी का भोग लगाने मेरे घर पधारो।" भक्त अपनी गरीबी का वर्णन करते हुए कहता है कि "माँ, मेरे पास तुम्हें चढ़ाने के लिए सोने का छत्र, तारों जड़ी चुनरी और छप्पन भोग (पेड़े-बर्फी) नहीं हैं; मेरे पास केवल मेरी सच्ची श्रद्धा है जो तुम्हारे इंतज़ार में आँखें बिछाए खड़ी है। मेरे घर के दीये में तो तेल भी नहीं है, मैं तुम्हारी आरती की ज्योत कैसे जलाऊँ? मैं खुद नंगी ज़मीन पर सोता हूँ, मैं तुम्हारे लिए सुंदर चौकी कैसे सजाऊँ? हे माँ, मैं जहाँ ज़मीन पर बैठा हूँ, तुम भी वहीं मेरे पास बैठकर अपने इस बच्चे का दिल बहला जाना।" अंत में भक्त कहता है कि माँ, तुम भाग्य बनाने वाली हो और मैं तकदीर का मारा एक भिखारी हूँ; मेरे सारे दोषों को भूलकर मुझे संभाल लो, क्योंकि मैं भी तुम्हारी ही आँखों का तारा हूँ।

Read the most authentic and complete Kabhi Fursat Ho To Jagdambe Nirdhan Ke Ghar Bhi Aa Jana Lyrics (कभी फुर्सत हो तो जगदंबे, निर्धन के घर भी आ जाना (माता भेंट) लिरिक्स) lyrics. This divine mata ke bhajan dedicated to Mata Rani is presented in pristine Devanagari and English (Romanized) scripts. Using our advanced transliteration tool, you can instantly convert these lyrics into 8+ Indian languages including Gujarati, Bengali, Kannada, and Telugu. Scroll up to read the complete Bhavarth (meaning) to deeply understand the spiritual essence of this composition. You can also use the free PDF download feature to save these lyrics for your daily offline Puja, Aarti, and Satsang.

यहाँ आप कभी फुर्सत हो तो जगदंबे, निर्धन के घर भी आ जाना (माता भेंट) लिरिक्स के संपूर्ण और शुद्ध पाठ का आनंद ले सकते हैं। हमारी वेबसाइट पर आप इस माता के भजन को हिंदी और अंग्रेजी के साथ-साथ गुजराती, बंगाली और अन्य 6 भारतीय भाषाओं में पढ़ सकते हैं।इस रचना के आध्यात्मिक रहस्य को समझने के लिए आप ऊपर इसका 'भावार्थ' (अर्थ) भी पढ़ सकते हैं। दैनिक पूजा और सत्संग के लिए आप इसका PDF (पीडीएफ) मुफ्त में डाउनलोड कर सकते हैं।

Frequently Asked Questions

Q1: 'कभी फुर्सत हो तो जगदंबे' भजन का मुख्य संदेश क्या है?

A1: यह अत्यंत भावपूर्ण भेंट हमें सिखाती है कि ईश्वर को महंगे चढ़ावे, सोने के छत्र या छप्पन भोग की आवश्यकता नहीं होती। भगवान केवल भक्त की सच्ची भावना और 'श्रद्धा' के भूखे होते हैं।

Q2: भजन में "मेरा खुद ही बिछौना धरती पर, तेरी चौकी सजाऊँ मैं कैसे" का क्या भाव है?

A2: यह पंक्ति भक्त की घोर गरीबी को दर्शाती है। भक्त कह रहा है कि उसके पास खुद सोने के लिए बिस्तर नहीं है, वह नंगी ज़मीन पर सोता है, ऐसे में वह अपनी माता रानी को बिठाने के लिए सुंदर दरबार (चौकी) कैसे सजा सकता है; इसलिए वह माँ से उसी ज़मीन पर अपने साथ बैठने की विनती करता है।

Q3: क्या मैं इस 'भावपूर्ण माता भेंट' का PDF डाउनलोड कर सकता हूँ?

A3: जी हाँ! आप इसी पेज पर, लिरिक्स के ठीक ऊपर दिए गए 'Download PDF' और 'Translate' बटन पर क्लिक करके इस रुला देने वाली भेंट को अपनी मनपसंद भाषा में बिलकुल मुफ्त में सेव कर सकते हैं।

Categories: Mata Ke Bhajan, Navratri Special

Deity: Mata Rani

Community Comments (0)

Be the first to share your devotion here.

Mohit Tarkar
Verified Publisher
प्रमाणित प्रकाशक | Verified Publisher

मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

धार्मिक सटीकता और भाषाई शुद्धता के लिए प्रमाणित। प्रामाणिक सनातन धर्म साहित्य के संरक्षण के लिए समर्पित।

Fact-checked for religious accuracy and linguistic purity. Dedicated to preserving authentic Sanatan Dharma literature.