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मैं हूँ दासी तेरी दातिये, मैया जब तक जियूँ मैं सुहागन रहूँ (भजन) लिरिक्स

Jab Tak Jiyun Main Suhagan Rahun Lyrics (Main Hoon Daasi Teri Daatiye) Lyrics

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मैं हूँ दासी तेरी दातिये, मैया जब तक जियूँ मैं सुहागन रहूँ (भजन) लिरिक्स

JAB TAK JIYUN MAIN SUHAGAN RAHUN LYRICS MAIN HOON DAASI TERI DAATIYE

मैं हूँ दासी तेरी दातिये, सुन ले विनती मेरी दातिये। मैं हूँ दासी तेरी दातिये, सुन ले विनती मेरी दातिये। मैया, जब तक जियूँ मैं सुहागन रहूँ, मैया, जब तक जियूँ मैं सुहागन रहूँ, मुझको इतना तू वरदान दे, मुझको इतना तू वरदान दे। मेरे प्राणों से प्यारा पति, मुझसे बिछड़े ना, रूठे कभी। माता रानी, इसे मेरी आयु लगे— ये मनोकामना है मेरी। माँ तेरी लाल की, माँ तेरी लाल की मैं हूँ अर्धांगिनी। मैं हूँ दासी तेरी दातिये, सुन ले विनती मेरी दातिये। मैया, जब तक जियूँ मैं सुहागन रहूँ, मैया, जब तक जियूँ मैं सुहागन रहूँ, मुझको इतना तू वरदान दे, मुझको इतना तू वरदान दे। मैया, तू ही मेरी आस है, मेरा तुझ पे ही विश्वास है। आसरा है तेरा, मुझ पे करना दया— मेरी तुझसे ये अरदास है। बिन तेरे प्यार के, बिन तेरे प्यार के क्या मेरे पास है? मैं हूँ दासी तेरी दातिये, सुन ले विनती मेरी दातिये। मैया, जब तक जियूँ मैं सुहागन रहूँ, मैया, जब तक जियूँ मैं सुहागन रहूँ, मुझको इतना तू वरदान दे, मुझको इतना तू वरदान दे। मैं हूँ दासी तेरी दातिये, मैं हूँ दासी तेरी दातिये।

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HINDI BHAJAN

मैं हूँ दासी तेरी दातिये, सुन ले विनती मेरी दातिये। मैं हूँ दासी तेरी दातिये, सुन ले विनती मेरी दातिये।

मैया, जब तक जियूँ मैं सुहागन रहूँ, मैया, जब तक जियूँ मैं सुहागन रहूँ, मुझको इतना तू वरदान दे, मुझको इतना तू वरदान दे।

मेरे प्राणों से प्यारा पति, मुझसे बिछड़े ना, रूठे कभी। माता रानी, इसे मेरी आयु लगे— ये मनोकामना है मेरी। माँ तेरी लाल की, माँ तेरी लाल की मैं हूँ अर्धांगिनी।

मैं हूँ दासी तेरी दातिये, सुन ले विनती मेरी दातिये। मैया, जब तक जियूँ मैं सुहागन रहूँ, मैया, जब तक जियूँ मैं सुहागन रहूँ, मुझको इतना तू वरदान दे, मुझको इतना तू वरदान दे।

मैया, तू ही मेरी आस है, मेरा तुझ पे ही विश्वास है। आसरा है तेरा, मुझ पे करना दया— मेरी तुझसे ये अरदास है। बिन तेरे प्यार के, बिन तेरे प्यार के क्या मेरे पास है?

मैं हूँ दासी तेरी दातिये, सुन ले विनती मेरी दातिये। मैया, जब तक जियूँ मैं सुहागन रहूँ, मैया, जब तक जियूँ मैं सुहागन रहूँ, मुझको इतना तू वरदान दे, मुझको इतना तू वरदान दे।

मैं हूँ दासी तेरी दातिये, मैं हूँ दासी तेरी दातिये।

मैं हूँ दासी तेरी दातिये, मैया जब तक जियूँ मैं सुहागन रहूँ (भजन) लिरिक्स Video

अर्थ (Bhavarth)

(विस्तृत भावार्थ): यह भजन एक सुहागिन स्त्री की माता रानी (दातिये) से अपने पति की लंबी आयु और सुखमय वैवाहिक जीवन के लिए की गई एक पवित्र प्रार्थना है। इसके भावों को इस प्रकार समझें: 1. दासी की पुकार और सुहाग का वरदान: भक्त माता रानी को 'दातिये' (सब कुछ देने वाली) पुकारते हुए स्वयं को उनकी दासी बताती है। वह माता से अपने लिए कोई धन-दौलत नहीं, बल्कि केवल यह वरदान मांगती है कि "हे मैया! मैं इस संसार में जब तक जीवित रहूँ, तब तक मेरा सुहाग सलामत रहे (मैं सुहागन रहूँ)।" 2. अटूट प्रेम और त्याग की भावना: दूसरे अंतरे में एक पत्नी का अपने पति के प्रति गहरा प्रेम झलकता है। वह कहती है कि मेरे पति मुझे मेरे प्राणों से भी अधिक प्यारे हैं; वे मुझसे कभी न बिछड़ें और न कभी रूठें। पत्नी माता से यहाँ तक प्रार्थना करती है कि "हे माता रानी! मेरे हिस्से की उम्र (आयु) भी मेरे पति को लग जाए।" वह माता को याद दिलाती है कि मैं तुम्हारे ही लाल (बेटे/भक्त) की अर्धांगिनी (पत्नी) हूँ, इसलिए मेरी पुकार सुन लो। 3. माता पर अंतिम विश्वास: अंतिम भाग में पूर्ण शरणागति का वर्णन है। महिला कहती है कि "हे मैया! अब केवल तुम ही मेरी एकमात्र आस हो और मुझे सिर्फ तुम पर ही विश्वास है। मुझे केवल तुम्हारा ही आसरा है, मेरी इस 'अरदास' (प्रार्थना) को स्वीकार कर मुझ पर दया करना, क्योंकि तुम्हारे प्यार और आशीर्वाद के बिना मेरे पास इस दुनिया में और कुछ भी नहीं है।"

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Frequently Asked Questions

Q1: "मैया जब तक जियूँ मैं सुहागन रहूँ" भजन का मुख्य भाव क्या है?

A1: यह अत्यंत भावपूर्ण 'devi maa ka bhajan' एक सुहागिन स्त्री की प्रार्थना (Suhag Geet) है। इसमें पत्नी माता रानी से अपने पति की लंबी आयु, उनके उत्तम स्वास्थ्य और आजीवन 'सुहागन' रहने का वरदान मांगती है।

Q2: भजन में प्रयुक्त शब्द "दातिये" का क्या अर्थ है?

A2: 'दातिये' (Daatiye) का अर्थ है— 'हे दाता!' या 'सब कुछ देने वाली'। भक्त माता रानी को दातिये पुकार कर यह मानती है कि इस संसार में केवल माता ही हैं जो हर मुराद और वरदान देने में सक्षम हैं।

Q3: "माँ तेरी लाल की मैं हूँ अर्धांगिनी" का क्या तात्पर्य है?

A3: 'लाल' का अर्थ बेटा या प्रिय भक्त होता है, और 'अर्धांगिनी' का अर्थ पत्नी (आधा अंग) होता है। महिला माता रानी से कह रही है कि मेरे पति आपके ही लाल (भक्त) हैं, और मैं उनकी पत्नी हूँ, इसलिए हे माँ, हम पर अपनी कृपा बनाए रखना।

Categories: Mata Ke Bhajan, Navratri Special

Deity: Mata Rani

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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