हनुमत तुम मेरे लाओ संजीवनी (लक्ष्मण मूर्छा प्रसंग) भजन लिरिक्स
Hanumat Tum Mere Lao Sanjeevani Lyrics Lyrics
तर्ज (Tune): मैं तेरे इश्क़ में मर न जाऊं कहीं (Main tere ishq mein mar na jaaun kahin - Lata Mangeshkar)
हनुमत तुम मेरे लाओ संजीवनी (लक्ष्मण मूर्छा प्रसंग) भजन लिरिक्स
HANUMAT TUM MERE LAO SANJEEVANI RAM HANUMAN BHAJAN
हनुमत तुम मेरे, लाओ संजीवनी, कैसी विपदा पड़ी है, लखन के लिए। मेरे रघुवर सुनो, मांग लो प्राण भी, तो मैं हंसकर के दे दूं वचन के लिए। राम ने यूं कहा हनुमान से, तन अलग हो रहा हो जैसे जान से, अंजनीसुत सुनो, मेरा संकट हरो, रो रहा हूं मगर, तुम नहीं जानते, है नहीं एक आंसू, नयन के लिए। आप की हो कृपा, मेरे राम हे, जग में ऐसा नहीं कोई काम रे, रघुवर, मुझ पर, इतना एहसान है, अभी जाता हूं मैं, आप को है नहीं, फिर जरूरत किसी भी कथन के लिए।
अर्थ (Bhavarth)
FAQs
Q1: 'हनुमत तुम मेरे लाओ संजीवनी' भजन किस पौराणिक प्रसंग पर आधारित है?
A1: यह हृदयस्पर्शी भजन रामायण के 'लक्ष्मण मूर्छा' प्रसंग पर आधारित है, जब मेघनाद की शक्ति लगने से लक्ष्मण जी मूर्छित हो जाते हैं और भगवान राम व्याकुल होकर हनुमान जी से संजीवनी बूटी लाने को कहते हैं।
Q2: इस भजन में श्री राम ने अपनी पीड़ा का वर्णन कैसे किया है?
A2: रचनाकार ने श्री राम की पीड़ा को बहुत ही मार्मिक शब्दों में पिरोया है। राम जी कहते हैं कि लक्ष्मण की इस दशा को देखकर उन्हें ऐसा लग रहा है जैसे उनके शरीर से उनके प्राण (जान) अलग हो रहे हों।
Q3: श्री राम की व्याकुलता देखकर हनुमान जी ने क्या उत्तर दिया?
A3: हनुमान जी ने अपनी सर्वोच्च भक्ति का परिचय देते हुए कहा कि "हे रघुवर! यदि आप वचन के लिए मेरे प्राण भी मांग लें, तो मैं हँसकर दे दूँगा। आपकी कृपा से मेरे लिए कोई भी कार्य असंभव नहीं है।"
Q4: इस करुणा से भरे 'राम-हनुमान संवाद' भजन के रचयिता कौन हैं?
A4: इस अत्यंत भावपूर्ण और सुंदर भजन की रचना युवा लेखक एवं रचनाकार श्री मोहित तरकर (Mohit Tarkar) जी द्वारा की गई है।
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Categories: Filmi Tarz Bhajan
Deity: Shri Hanuman
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