Mata Raniganga mata

चाँद को निहारूँ शिव को पुकारूँ (गंगा के किनारे बैठ के) शिव भजन लिरिक्स

Chand Ko Niharun Shiv Ko Pukarun Lyrics (Ganga Ke Kinare) Lyrics

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चाँद को निहारूँ शिव को पुकारूँ (गंगा के किनारे बैठ के) शिव भजन लिरिक्स

CHAND KO NIHARUN SHIV KO PUKARUN LYRICS GANGA KE KINARE

चाँद को निहारूँ शिव को पुकारूँ चाँद को निहारूँ शिव को पुकारूँ गंगा के किनारे बैठ के बैठ के… गंगा के किनारे बैठ के रूह को सँवारूँ आरती उतारूँ गंगा के किनारे बैठ के बैठ के… हम तो हमारे ही जीवन से हैं इतने सताए हुए टूटे हैं, बिखरे हैं हम तो सबके भुलाए हुए कहते हैं, आए जो गंगा नहाए हर जाते हैं सब रोग अब हमने समझा है अब हमने जाना क्यों गंगा आते हैं लोग थक गए थे हम दुखों को उठाकर अब चैन आया आई अब साँसें गंगा के किनारे बैठ के बैठ के… क्यों रोए हर बात में बन्दया क्या लाया था साथ में बन्दया जाने दे जो चला गया है कुछ भी नहीं तेरे हाथ में बन्दया मन नहीं भरता जितना भी ताकें इतना सुकून है भर गई आँखें गंगा के किनारे बैठ के… गंगा धऱाय शिवाय, गंगा धऱाय हर हर भोले नमः शिवाय…

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चाँद को निहारूँ शिव को पुकारूँ चाँद को निहारूँ शिव को पुकारूँ गंगा के किनारे बैठ के बैठ के… गंगा के किनारे बैठ के

रूह को सँवारूँ आरती उतारूँ गंगा के किनारे बैठ के बैठ के…

हम तो हमारे ही जीवन से हैं इतने सताए हुए टूटे हैं, बिखरे हैं हम तो सबके भुलाए हुए

कहते हैं, आए जो गंगा नहाए हर जाते हैं सब रोग अब हमने समझा है अब हमने जाना क्यों गंगा आते हैं लोग

थक गए थे हम दुखों को उठाकर अब चैन आया आई अब साँसें गंगा के किनारे बैठ के बैठ के…

क्यों रोए हर बात में बन्दया क्या लाया था साथ में बन्दया जाने दे जो चला गया है कुछ भी नहीं तेरे हाथ में बन्दया

मन नहीं भरता जितना भी ताकें इतना सुकून है भर गई आँखें गंगा के किनारे बैठ के…

गंगा धऱाय शिवाय, गंगा धऱाय हर हर भोले नमः शिवाय…

चाँद को निहारूँ शिव को पुकारूँ (गंगा के किनारे बैठ के) शिव भजन लिरिक्स Video

अर्थ (Bhavarth)

(विस्तृत भावार्थ): यह भजन जीवन की भागदौड़ से थक चुके एक इंसान की शिव के चरणों और गंगा के तट पर पाई गई शांति का बहुत ही मार्मिक वर्णन है: 1. गंगा का तट और शिव का ध्यान: भजन की शुरुआत एक बहुत ही शांत दृश्य से होती है। भक्त गंगा नदी के किनारे बैठा है, आसमान में चाँद को निहार रहा है और भगवान शिव को पुकार रहा है। वह इस पवित्र स्थान पर बैठकर अपनी 'रूह' (आत्मा) को संवारना चाहता है और ईश्वर की आरती उतारना चाहता है। 2. जीवन की थकान और गंगा का आश्रय: भक्त अपना दुख जताते हुए कहता है कि वह अपने ही जीवन और दुखों से बहुत सताया हुआ, टूटा और बिखरा हुआ है, जिसे सबने भुला दिया है। उसने हमेशा सुना था कि जो भी गंगा में स्नान करता है, उसके सारे रोग और दुख दूर हो जाते हैं। आज गंगा किनारे बैठकर उसे सचमुच यह एहसास हो गया है कि लोग शांति की तलाश में गंगा क्यों आते हैं। जीवन भर दुखों का बोझ उठाकर थक चुके इस इंसान को आज यहाँ आकर चैन की साँस आई है। 3. वैराग्य का संदेश और अंतिम सुकून: यह अंतरा इंसान को एक बहुत बड़ी सीख देता है— "हे बंदे (इंसान)! तू हर छोटी बात पर क्यों रोता है? तू इस दुनिया में अपने साथ क्या लेकर आया था जो तेरे जाने का तुझे इतना दुख है? जो चला गया उसे जाने दे, क्योंकि सच तो यही है कि तेरे हाथ में कुछ भी नहीं है।" गंगा किनारे का दृश्य और शिव की भक्ति में इतना सुकून है कि भक्त का मन उन्हें ताकते (देखते) हुए नहीं भरता, बस शांति से उसकी आँखें भर आती हैं।

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Frequently Asked Questions

Q1: "चाँद को निहारूँ शिव को पुकारूँ" भजन का मूल संदेश क्या है?

A1: यह भजन वैराग्य और आत्म-शांति का संदेश देता है। यह बताता है कि जब इंसान दुनिया के दुखों और भागदौड़ से थक जाता है, तो ईश्वर (शिव) का ध्यान और प्रकृति (गंगा का किनारा) ही उसे सच्चा सुकून और चैन की साँस देते हैं।

Q2: भजन में "क्यों रोए हर बात में बन्दया" का क्या अर्थ है?

A2: 'बन्दया' (Bandeya) का अर्थ है 'हे मनुष्य' या 'हे ईश्वर के बंदे'। यह पंक्ति इंसान को समझाती है कि दुनिया में जो कुछ भी छूट गया है उसके लिए रोना व्यर्थ है, क्योंकि इंसान इस दुनिया में खाली हाथ ही आया था और खाली हाथ ही जाएगा।

Q3: "गंगा धऱाय शिवाय" मंत्र का क्या तात्पर्य है?

A3: 'गंगा धराय' का अर्थ है 'गंगा को धारण करने वाले'। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, भगवान शिव ने पृथ्वी को विनाश से बचाने के लिए माता गंगा के तीव्र वेग को अपनी जटाओं में धारण किया था। इसलिए उन्हें गंगाधर भी कहा जाता है।

Categories: ganga mata

Deity: Mata Rani

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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