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आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी (नवरात्रि चौथा दिन) लिरिक्स

Aarti Kushmanda Maa Ki Lyrics (Navratri Day 4) Lyrics

तर्ज (Tune): आरती कुञ्ज बिहारी की (aarti kunj bihaari ki)

HINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARI

आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी (नवरात्रि चौथा दिन) लिरिक्स

AARTI KUSHMANDA MAA KI LYRICS NAVRATRI DAY 4

आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी, आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी। नवरात्रा चौथा दिन मैया, भरे खाली झोली मैया, है आँचल में शीतल छैया, मिटाए दुख, रहें सब खुश माँ देती सुख, गूंजे जयकार महामा की। आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी, आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी। महिमा हर कोई गाए, और दर्शन को चल आए, बिना माँगे ही सब पाए, खुला दरबार लुटाए प्यार, कहे संसार, लगे दरबार शरण माँ की। आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी, आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी। मिटाए मिटते नहीं रेखा, रखे जन-जन का वे लेखा, कहाँ माँ करती अनदेखा, जो आए द्वार, करे उपकार, भरे भंडार, झुके संसार चरण माँ की। आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी, आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी। लगे मेला माँ के द्वारे, मगन मन झूम रहे सारे, कहूँ क्या लीला मैं प्यारी, है सांचा धाम, बने हर काम, जो लेवे नाम, करूँ सेवा मैं माता की। आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी, आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी।

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आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी, आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी। नवरात्रा चौथा दिन मैया, भरे खाली झोली मैया, है आँचल में शीतल छैया, मिटाए दुख, रहें सब खुश माँ देती सुख, गूंजे जयकार महामा की। आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी, आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी।

महिमा हर कोई गाए, और दर्शन को चल आए, बिना माँगे ही सब पाए, खुला दरबार लुटाए प्यार, कहे संसार, लगे दरबार शरण माँ की। आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी, आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी।

मिटाए मिटते नहीं रेखा, रखे जन-जन का वे लेखा, कहाँ माँ करती अनदेखा, जो आए द्वार, करे उपकार, भरे भंडार, झुके संसार चरण माँ की। आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी, आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी।

लगे मेला माँ के द्वारे, मगन मन झूम रहे सारे, कहूँ क्या लीला मैं प्यारी, है सांचा धाम, बने हर काम, जो लेवे नाम, करूँ सेवा मैं माता की। आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी, आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी।

आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी (नवरात्रि चौथा दिन) लिरिक्स Video

अर्थ (Bhavarth)

(विस्तृत भावार्थ): यह आरती नवरात्रि के चौथे दिन पूजी जाने वाली माँ कूष्मांडा की महिमा का बहुत ही सुंदर गान है: 1. चौथी नवरात्रि और माता का शीतल आँचल: भक्त आरती गाते हुए कहते हैं कि माँ कूष्मांडा की अद्भुत 'झांकी' (सुंदर स्वरूप) देखकर मन खुशी से झूम उठता है। नवरात्रि के चौथे दिन माता अपने दरबार में आने वाले भक्तों की खाली झोली भर देती हैं। माता के आँचल में इतनी शीतल (ठंडी) छाया है जो भक्तों के सारे दुख मिटा देती है, जिससे सब खुश रहते हैं। चारों दिशाओं में महामाया (महामा) की जयकार गूंज रही है। 2. खुला दरबार और भाग्य की रेखा: आरती के अगले भाग में बताया गया है कि माता का दरबार सभी के लिए खुला है। वे अपने भक्तों पर इतना प्यार लुटाती हैं कि भक्त बिना माँगे ही सब कुछ पा लेते हैं। माता हर एक इंसान (जन-जन) के कर्मों का लेखा-जोखा रखती हैं; उनके द्वारा लिखी गई भाग्य की रेखा कोई मिटा नहीं सकता। जो भी सच्चे मन से माता के द्वार आता है, माता उसे कभी 'अनदेखा' नहीं करतीं, बल्कि उस पर उपकार करके उसके भंडार भर देती हैं। पूरा संसार उनके चरणों में झुकता है। 3. सच्चा धाम और माता की सेवा: माता के द्वारे पर भक्तों का मेला लगा हुआ है और सबके मन मगन होकर झूम रहे हैं। भक्त कहता है कि माँ की लीला बहुत प्यारी है। यह दरबार दुनिया का सबसे 'सांचा धाम' (सच्चा तीर्थ) है, जहाँ माता का नाम लेने मात्र से इंसान के सारे बिगड़े काम बन जाते हैं। अंत में भक्त माता की उम्र भर सेवा करने का संकल्प लेता है।

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Frequently Asked Questions

Q1: "आरती कूष्मांडा माँ की" किस दिन गाई जाती है?

A1: यह अत्यंत शुभ आरती विशेष रूप से नवरात्रि के चौथे दिन (चतुर्थी तिथि) पर माँ दुर्गा के चौथे स्वरूप— 'माँ कूष्मांडा' की पूजा-अर्चना के दौरान गाई जाती है।

Q2: माँ कूष्मांडा को यह नाम क्यों दिया गया है?

A2: 'कूष्मांड' का अर्थ कुम्हड़ा (पेठा/कद्दू) होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अपनी मंद और हल्की हँसी द्वारा 'अंड' (ब्रह्मांड) को उत्पन्न करने के कारण इन्हें 'कूष्मांडा' कहा गया है।

Q3: आरती में "मिटाए मिटते नहीं रेखा" का क्या अर्थ है?

A3: इसका अर्थ है कि माता कूष्मांडा ही भाग्य की विधाता हैं। उनके द्वारा लिखी गई भाग्य की रेखा को कोई मिटा नहीं सकता। वे हर व्यक्ति (जन-जन) के कर्मों का हिसाब रखती हैं और उसी के अनुसार फल देती हैं।

Categories: Aarti, Mata Ke Bhajan, Navratri Special

Deity: Mata Rani

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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