तू चिंतन कर ले अभिमानी (चेतावनी भजन) लिरिक्स
Tu Chintan Kar Le Abhimani Lyrics - Chetawani Bhajan
तू चिंतन कर ले अभिमानी, प्रभु-नाम की है ये ज़िंदगानी। दौलत के नशे में चूर रहे, ये माया है आनी-जानी॥
क्षण पैसों की खातिर तूने, अपनों को अपने से दूर किया। जो रहे थे तेरे हर सुख-दुःख में, उनको भी तूने मजबूर किया। तूने छीन लिया औरों का धन, तेरे मन में आ गई बेईमानी॥
इतना भी तूने सोचा न था, संग जाए न एक खोटा पैसा। देगी तुझको दुनिया ताने, तूने काम किया था ही ऐसा। जब अंत समय तेरा आए, न देगा कोई तुझको पानी॥
अर्थ (Bhavarth)
Read the most authentic and complete Tu Chintan Kar Le Abhimani Lyrics - Chetawani Bhajan (तू चिंतन कर ले अभिमानी (चेतावनी भजन) लिरिक्स) lyrics. Popularized by Tejveer Singh, this divine chetawani bhajan dedicated to Nirgun is presented in pristine Devanagari and English (Romanized) scripts. Using our advanced transliteration tool, you can instantly convert these lyrics into 8+ Indian languages including Gujarati, Bengali, Kannada, and Telugu. Scroll up to read the complete Bhavarth (meaning) to deeply understand the spiritual essence of this composition. You can also use the free PDF download feature to save these lyrics for your daily offline Puja, Aarti, and Satsang.
यहाँ आप तू चिंतन कर ले अभिमानी (चेतावनी भजन) लिरिक्स के संपूर्ण और शुद्ध पाठ का आनंद ले सकते हैं। हमारी वेबसाइट पर आप इस चेतावनी भजन को हिंदी और अंग्रेजी के साथ-साथ गुजराती, बंगाली और अन्य 6 भारतीय भाषाओं में पढ़ सकते हैं।इस रचना के आध्यात्मिक रहस्य को समझने के लिए आप ऊपर इसका 'भावार्थ' (अर्थ) भी पढ़ सकते हैं। दैनिक पूजा और सत्संग के लिए आप इसका PDF (पीडीएफ) मुफ्त में डाउनलोड कर सकते हैं।
Frequently Asked Questions
'चेतावनी भजन' (Chetawani Bhajan) का क्या अर्थ होता है?
हिंदू आध्यात्मिक संगीत में 'चेतावनी भजन' उन भजनों को कहा जाता है जो मनुष्य को सांसारिक मोह-माया, धन के लालच और अहंकार से दूर रहने की 'चेतावनी' (Warning) देते हैं। ये भजन जीवन की नश्वरता और मृत्यु के अटल सत्य को याद दिलाते हैं।
"तू चिंतन कर ले अभिमानी" भजन का मुख्य संदेश क्या है?
इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि धन, दौलत और यह शरीर सब कुछ नश्वर (मिट जाने वाला) है। इंसान को कुछ चंद पैसों के लिए बेईमानी नहीं करनी चाहिए और अपनों को दूर नहीं करना चाहिए, क्योंकि मृत्यु के समय इंसान के साथ एक 'खोटा पैसा' भी नहीं जाता, केवल उसके कर्म ही साथ जाते हैं।
भजन में "ये माया है आनी-जानी" का क्या तात्पर्य है?
संत और कवि भौतिक धन, दौलत और संपत्ति को 'माया' कहते हैं। 'आनी-जानी' का तात्पर्य यह है कि धन का स्वभाव चंचल होता है; जो धन आज किसी एक के पास है, कल वह किसी और के पास होगा। इसलिए इस पर अहंकार करना मूर्खता है।
Related Tags
Categories: Chetawani Bhajan
Deity: Nirgun
Community Comments (0)
Be the first to share your devotion here.

मोहित तरकरMohit Tarkar
संस्थापक एवं मुख्य संपादक • Founder & Chief Editor
धार्मिक सटीकता और भाषाई शुद्धता के लिए प्रमाणित। प्रामाणिक सनातन धर्म साहित्य के संरक्षण के लिए समर्पित।
Fact-checked for religious accuracy and linguistic purity. Dedicated to preserving authentic Sanatan Dharma literature.