Shri Radha RaniBraj Ras

राधे राधे कहने की आदत-सी हो गई है (श्री राम गोपाल शास्त्री) भजन लिरिक्स

Radhe Radhe Kehne Ki Aadat Si Ho Gayi Hai Lyrics (Sri Ram Gopal Shastri) Lyrics

HINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARI

राधे राधे कहने की आदत-सी हो गई है (श्री राम गोपाल शास्त्री) भजन लिरिक्स

RADHE RADHE KEHNE KI AADAT SI HO GAYI HAI LYRICS SRI RAM GOPAL SHASTRI

॥ दोहा ॥ आदत, आदत, आदत है, जिसको पड़ी जिसकी आदत है। हम पर तो श्री जी ने की है कृपा, राधे कहने की आदत है॥ ॥ जप ॥ राधे बोल, राधे बोल, राधे बोल, राधे बोल, राधे बोल, राधे बोल॥ ॥ मुखड़ा ॥ राधे राधे, राधे कहने की आदत-सी हो गई है। श्री जी के चरणों में रहने की आदत-सी हो गई है। राधे राधे, राधे कहने की आदत-सी हो गई है॥ ॥ जप ॥ श्यामा द्वारे आ पड़ी हूँ, तेरे नाम के सहारे। राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे, राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे॥ ॥ अंतरा 1 ॥ कोई पागल या दीवाना, और मस्ताना ही कहे। ऐसी बातों को अब सहने की आदत-सी हो गई है। राधे राधे, राधे कहने की आदत-सी हो गई है॥ ॥ अंतरा 2 ॥ अब चाहे डुबा दो, या बना दो — कोई ग़म भी तो नहीं। हमको तेरे नाम में बहने की आदत-सी हो गई है। राधे राधे, राधे कहने की आदत-सी हो गई है॥ ॥ अंतरा 3 ॥ मेरी फ़रियाद पे न तुमने कोई गौर ही किया। बीती बातों को दोहराने की आदत-सी हो गई है। राधे राधे, राधे कहने की आदत-सी हो गई है। श्री जी के चरणों में रहने की आदत-सी हो गई है॥ ॥ समापन जप ॥ श्यामा द्वारे आ पड़ी हूँ, तेरे नाम के सहारे। राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे, राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे॥

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॥ दोहा ॥ आदत, आदत, आदत है, जिसको पड़ी जिसकी आदत है। हम पर तो श्री जी ने की है कृपा, राधे कहने की आदत है॥

॥ जप ॥ राधे बोल, राधे बोल, राधे बोल, राधे बोल, राधे बोल, राधे बोल॥

॥ मुखड़ा ॥ राधे राधे, राधे कहने की आदत-सी हो गई है। श्री जी के चरणों में रहने की आदत-सी हो गई है।

राधे राधे, राधे कहने की आदत-सी हो गई है॥

॥ जप ॥ श्यामा द्वारे आ पड़ी हूँ, तेरे नाम के सहारे।

राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे, राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे॥

॥ अंतरा 1 ॥ कोई पागल या दीवाना, और मस्ताना ही कहे। ऐसी बातों को अब सहने की आदत-सी हो गई है।

राधे राधे, राधे कहने की आदत-सी हो गई है॥

॥ अंतरा 2 ॥ अब चाहे डुबा दो, या बना दो — कोई ग़म भी तो नहीं। हमको तेरे नाम में बहने की आदत-सी हो गई है।

राधे राधे, राधे कहने की आदत-सी हो गई है॥

॥ अंतरा 3 ॥ मेरी फ़रियाद पे न तुमने कोई गौर ही किया। बीती बातों को दोहराने की आदत-सी हो गई है।

राधे राधे, राधे कहने की आदत-सी हो गई है। श्री जी के चरणों में रहने की आदत-सी हो गई है॥

॥ समापन जप ॥ श्यामा द्वारे आ पड़ी हूँ, तेरे नाम के सहारे।

राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे, राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे॥

राधे राधे कहने की आदत-सी हो गई है (श्री राम गोपाल शास्त्री) भजन लिरिक्स Video

अर्थ (Bhavarth)

परम श्रद्धेय श्री राम गोपाल शास्त्री (Sri Ram Gopal Shastri) जी की मधुर और शांत आवाज़ में गाया गया यह भजन "राधे राधे कहने की आदत-सी हो गई है" श्री राधा रानी (श्री जी) के प्रति अनन्य प्रेम और 'नाम-जप' की महिमा का एक अत्यंत गहरा और भावपूर्ण गीत है। यह भजन दर्शाता है कि जब जीव को भगवान के नाम का नशा लग जाता है, तो फिर उसे दुनिया की कोई परवाह नहीं रहती। यह भजन श्री राधा रानी (श्री जी) के चरणों में पूर्ण शरणागति और 'राधा-नाम' के नशे का बहुत ही प्यारा वर्णन है। इसके गहरे आध्यात्मिक भावों को तीन मुख्य चरणों में समझा जा सकता है: 1. नाम-जप की सबसे मधुर आदत: भजन के दोहे में एक बहुत ही गहरी बात कही गई है कि इस दुनिया में हर इंसान को किसी न किसी चीज़ की आदत (लत) पड़ी हुई है। लेकिन भक्त खुद को अत्यंत सौभाग्यशाली मानता है कि उस पर 'श्री जी' (राधा रानी) की विशेष कृपा हुई है, जिसके कारण उसे किसी सांसारिक चीज़ की नहीं, बल्कि दिन-रात केवल "राधे-राधे" कहने की आदत पड़ गई है। अब भक्त को श्री जी के चरणों में ही सुकून मिलता है। 2. दुनिया की परवाह और पूर्ण समर्पण: जब कोई भक्त ईश्वर के नाम में डूब जाता है, तो यह सांसारिक दुनिया उसे पागल, दीवाना या मस्ताना कहने लगती है। लेकिन भक्त कहता है कि "अब मुझे इन तानों का कोई फर्क नहीं पड़ता, मुझे लोगों की ये बातें सहने की आदत हो गई है।" भक्त ने खुद को पूरी तरह से 'श्यामा जु' के द्वार पर छोड़ दिया है। वह कहता है कि "हे श्यामा! अब चाहे तुम मेरी जीवन नैया को डुबा दो या पार लगा दो, मुझे कोई ग़म (दुख) नहीं है। मुझे तो बस तुम्हारे नाम की धारा में बहने की आदत हो गई है।" 3. मीठी शिकायत और प्रेम की ज़िद: अंतिम अंतरे में भक्त अपनी श्यामा जु से एक बहुत ही मीठी शिकायत (Fariyaad) करता है। वह कहता है कि "हे राधे! तुमने मेरी पुकार पर कभी ध्यान (गौर) नहीं दिया, लेकिन फिर भी मैं तुम्हारे ही द्वार पर पड़ा हूँ।" भक्त हार नहीं मानता; वह कहता है कि चूँकि तुमने मेरी नहीं सुनी, इसलिए मुझे अपनी उसी पुरानी पुकार (बीती बातों) को बार-बार दोहराने की आदत हो गई है। यह भक्त की अपने इष्ट के प्रति सच्ची ज़िद और अटूट प्रेम है।

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Frequently Asked Questions

Q1: 'राधे राधे कहने की आदत-सी हो गई है' भजन के मूल गायक कौन हैं?

यह अत्यंत मधुर और वैराग्य से भरा राधा-नाम संकीर्तन परम श्रद्धेय श्री राम गोपाल शास्त्री (Sri Ram Gopal Shastri) जी द्वारा गाया गया है।

Q2: इस भजन के दोहे का क्या अर्थ है?

दोहे का अर्थ है कि इस संसार में हर व्यक्ति किसी न किसी सांसारिक आदत (धन, मोह, काम) से बंधा हुआ है। लेकिन भक्त कहता है कि मुझ पर श्री राधा रानी की असीम कृपा है, इसलिए मुझे दुनिया की नहीं, बल्कि केवल 'राधे-राधे' जपने की आदत पड़ गई है।

Q3: "कोई पागल या दीवाना और मस्ताना ही कहे" का क्या भाव है?

जब कोई भक्त सांसारिक मोह-माया छोड़कर पूरी तरह ईश्वर के प्रेम में डूब जाता है, तो भौतिक दुनिया उसे समझ नहीं पाती और उसे पागल या दीवाना कहने लगती है। भक्त का भाव यह है कि अब उसे दुनिया के तानों से कोई फर्क नहीं पड़ता।

Categories: Braj Ras

Deity: Shri Radha Rani

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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