Shiv JiShiv JiShiv Parvati Ji

पार्वती बोली शंकर से, सुनिए भोलेनाथ जी (शिव-पार्वती भजन) लिरिक्स

Parvati Boli Shankar Se Suniye Bholenath Ji Lyrics - Shiv Parvati Bhajan

Location: बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश
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पार्वती बोली शंकर से, सुनिए भोलेनाथ जी (शिव-पार्वती भजन) लिरिक्स

PARVATI BOLI SHANKAR SE SUNIYE BHOLENATH JI LYRICS SHIV PARVATI BHAJAN

पार्वती बोली शंकर से, पार्वती बोली शंकर से, सुनिए भोलेनाथ जी, रहना है हर एक जन्म में, मुझे तुम्हारे साथ जी। वचन दीजिए ना छोड़ेंगे, कभी हमारा हाथ जी। ओ भोलेनाथ जी ओ शंभू नाथ जी, ओ भोलेनाथ जी ओ शंकर नाथ जी। जैसे मस्तक पे चंदा है, गंगा बसी जटाओं में, वैसे रखना हे अविनाशी, मुझे प्रेम की छाँव में। कोई नहीं तुम सा तीनों लोकों में, दसों दिशाओं में, महलों से ज्यादा सुख है, कैलाश की खुली हवाओं में। तुम हो जहां वहां होती है, तुम हो जहां वहां होती है, अमृत की बरसात जी, रहना है हर एक जन्म में मुझे तुम्हारे साथ जी। वचन दीजिए ना छोड़ोगे, कभी हमारा हाथ जी। ओ भोलेनाथ जी ओ शंभू नाथ जी, ओ भोलेनाथ जी ओ शंकर नाथ जी। देव हो तुम देवों के भोले, अमर हो अंतर्यामी हो, भाग्यवान है हम त्रिपुरारी, आप हमारे स्वामी हो। पुष्प विमानों से प्यारी, हमको नंदी की सवारी जी, युगों-युगों से पार्वती, भोले तुम पे बलिहारी जी। जब लाओ तुम ही लाना, जब लाओ तुम ही लाना, द्वारे मेरे बारात जी। ओ भोलेनाथ जी ओ शंभू नाथ जी, ओ भोलेनाथ जी ओ शंकर नाथ जी। प्राण मेरे बसते हैं तुम में, तुम बिन मेरी नहीं गति, अग्नि कुंड में होके भस्म, तुम हुई थी मेरे लिए सती। शिव बिन जैसे शक्ति अधूरी, शक्ति बिन शिव आधे हैं, जन्मों तक ना टूटेंगे, ये जन्म-जन्म के नाते हैं। तुम्ही मेरी संध्या हो गौरी, तुम्ही मेरी प्रभात जी, वचन है मेरा ना छोड़ूंगा, कभी तुम्हारा हाथ जी। सदा रहे हैं, सदा रहेंगे, गौरी शंकर साथ जी। है गौरा पार्वती, है गौरा पार्वती, ओ भोलेनाथ जी ओ शंकर नाथ जी। ओ भोलेनाथ जी ओ शंभू नाथ जी, ओ भोलेनाथ जी ओ शंकर नाथ जी। ओ मेरा भोला है मेरे साथ-साथ, मैं झूम-झूम के नाचूं, मेरा भोला है मेरे साथ-साथ, मैं झूम-झूम के नाचूं। मैं झूम-झूम के नाचूं। मैं घूम-घूम के नाचूं। ओ मेरा भोला ओ मेरा भोला ओ मेरा भोला है मेरे साथ-साथ, मैं झूम-झूम के नाचूं।

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Hindi Bhajan Manjari
पार्वती बोली शंकर से,
पार्वती बोली शंकर से,
सुनिए भोलेनाथ जी,
रहना है हर एक जन्म में,
मुझे तुम्हारे साथ जी।
वचन दीजिए ना छोड़ेंगे,
कभी हमारा हाथ जी।
भोलेनाथ जी शंभू नाथ जी,
भोलेनाथ जी शंकर नाथ जी।
जैसे मस्तक पे चंदा है,
गंगा बसी जटाओं में,
वैसे रखना हे अविनाशी,
मुझे प्रेम की छाँव में।
कोई नहीं तुम सा तीनों लोकों में,
दसों दिशाओं में,
महलों से ज्यादा सुख है,
कैलाश की खुली हवाओं में।
तुम हो जहां वहां होती है,
तुम हो जहां वहां होती है,
अमृत की बरसात जी,
रहना है हर एक जन्म में
मुझे तुम्हारे साथ जी।
वचन दीजिए ना छोड़ोगे,
कभी हमारा हाथ जी।
भोलेनाथ जी शंभू नाथ जी,
भोलेनाथ जी शंकर नाथ जी।
देव हो तुम देवों के भोले,
अमर हो अंतर्यामी हो,
भाग्यवान है हम त्रिपुरारी,
आप हमारे स्वामी हो।
पुष्प विमानों से प्यारी,
हमको नंदी की सवारी जी,
युगों-युगों से पार्वती,
भोले तुम पे बलिहारी जी।
जब लाओ तुम ही लाना,
जब लाओ तुम ही लाना,
द्वारे मेरे बारात जी।
भोलेनाथ जी शंभू नाथ जी,
भोलेनाथ जी शंकर नाथ जी।
प्राण मेरे बसते हैं तुम में,
तुम बिन मेरी नहीं गति,
अग्नि कुंड में होके भस्म,
तुम हुई थी मेरे लिए सती।
शिव बिन जैसे शक्ति अधूरी,
शक्ति बिन शिव आधे हैं,
जन्मों तक ना टूटेंगे,
ये जन्म-जन्म के नाते हैं।
तुम्ही मेरी संध्या हो गौरी,
तुम्ही मेरी प्रभात जी,
वचन है मेरा ना छोड़ूंगा,
कभी तुम्हारा हाथ जी।
सदा रहे हैं, सदा रहेंगे,
गौरी शंकर साथ जी।
है गौरा पार्वती, है गौरा पार्वती,
भोलेनाथ जी शंकर नाथ जी।
भोलेनाथ जी शंभू नाथ जी,
भोलेनाथ जी शंकर नाथ जी।
मेरा भोला है मेरे साथ-साथ,
मैं झूम-झूम के नाचूं,
मेरा भोला है मेरे साथ-साथ,
मैं झूम-झूम के नाचूं।
मैं झूम-झूम के नाचूं।
मैं घूम-घूम के नाचूं।
मेरा भोला
मेरा भोला
मेरा भोला है मेरे साथ-साथ,
मैं झूम-झूम के नाचूं।
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अर्थ (Bhavarth)

यह भजन भगवान शिव और माता पार्वती के बीच के अत्यंत भावपूर्ण और अलौकिक संवाद (बातचीत) पर आधारित है, जो उनके जन्म-जन्मांतर के अटूट बंधन को दर्शाता है: 1. जन्म-जन्म का साथ और कैलाश का सुख: माता पार्वती भगवान शिव से मनुहार करते हुए कहती हैं कि हे भोलेनाथ! मुझे हर जन्म में केवल आपका ही साथ चाहिए। मुझे राजाओं के महलों से ज़्यादा सुख 'कैलाश' की खुली हवाओं और नंदी की सवारी में मिलता है। आप मुझे भी चंदा और गंगा की तरह अपनी प्रेम की छाँव में रख लीजिए। 2. सती का बलिदान और शिव का वचन: पार्वती जी की बातों का उत्तर देते हुए भगवान शिव कहते हैं कि हे गौरी! तुम्हारे बिना मेरी भी कोई गति नहीं है। तुमने ही मेरे सम्मान के लिए हवन कुंड में भस्म होकर 'सती' का रूप धारण किया था। शिव के बिना शक्ति अधूरी है और शक्ति के बिना शिव आधे हैं। शिव वचन देते हैं कि वे उनका हाथ कभी नहीं छोड़ेंगे। 3. संपूर्णता और आनंद की अनुभूति: भजन के अंत में शिव और शक्ति का यह एकाकार (मिलन) एक अद्भुत आनंद में बदल जाता है। भक्त माता पार्वती के भाव में मग्न होकर खुशी से झूमने लगता है और कहता है कि "मेरा भोला मेरे साथ है, इसलिए मैं झूम-झूम के नाचूँगा।"

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Frequently Asked Questions

"शिव बिन जैसे शक्ति अधूरी, शक्ति बिन शिव आधे हैं" का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?

सनातन धर्म (विशेषकर शाक्त और शैव दर्शन) के अनुसार, 'शिव' (परम चेतना) और 'शक्ति' (परम ऊर्जा) दो अलग-अलग सत्ता नहीं हैं। जैसे सूर्य के बिना धूप का और आग के बिना गर्मी का कोई अस्तित्व नहीं है, वैसे ही शिव और शक्ति एक-दूसरे के पूरक हैं; उनके बिना सृष्टि की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

भजन में "अग्नि कुंड में होके भस्म, तुम हुई थी मेरे लिए सती" का क्या अर्थ है?

यह पंक्ति माता पार्वती के पूर्व जन्म 'सती' की कथा से जुड़ी है। जब माता सती के पिता राजा दक्ष ने एक विशाल यज्ञ किया और उसमें भगवान शिव का अपमान किया, तो माता सती ने अपने पति का अपमान न सह पाने के कारण उसी यज्ञ कुंड की अग्नि में अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। भगवान शिव इसी बलिदान को याद कर रहे हैं।

"पार्वती बोली शंकर से" भजन का मुख्य भाव क्या है?

इस अत्यंत मधुर भजन का मुख्य भाव 'शिव-शक्ति का एकाकार' और 'जन्म-जन्मांतर का प्रेम' है। इसमें माता पार्वती भगवान शिव से हर जन्म में उनका साथ माँग रही हैं, और शिवजी यह स्वीकार करते हैं कि शक्ति के बिना वे भी अधूरे हैं।

Categories: Shiv Ji, Shiv Parvati Ji

Deity: Shiv Ji

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

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