ना मन हूँ, ना बुद्धि, ना चित्त अहंकार (जगत चेतना हूँ) शिव भजन लिरिक्स
Na Man Hoon Na Buddhi (Jagat Chetna Hoon) Lyrics - Shiva Bhajan
तर्ज: आदि शंकराचार्य कृत 'निर्वाण षट्कम' का हिंदी रूपांतरण (Hindi Adaptation of Nirvana Shatakam)
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अर्थ (Bhavarth)
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Frequently Asked Questions
"ना मन हूँ ना बुद्धि ना चित्त अहंकार" भजन किस प्राचीन स्तोत्र पर आधारित है?
यह अत्यंत ज्ञानवर्धक भजन 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य जी द्वारा रचित प्रसिद्ध स्तोत्र 'निर्वाण षट्कम' (चिदानंद रूप: शिवोहम शिवोहम) का सरल हिंदी काव्यात्मक रूपांतरण है।
"जगत चेतना हूँ, अनादि अनंता" का क्या अर्थ है?
अद्वैत वेदांत के अनुसार, मनुष्य का शरीर नश्वर है, लेकिन उसके भीतर की आत्मा अमर है। 'जगत चेतना' का अर्थ है संपूर्ण ब्रह्मांड की परम चेतना (Pure Consciousness), 'अनादि' का अर्थ है जिसका कोई आरंभ न हो, और 'अनंता' का अर्थ है जिसका कोई अंत न हो। अर्थात, मैं वह परम चेतना हूँ जो जन्म और मृत्यु के चक्र से परे है।
भजन में "मैं पुण्य ना पाप, सुख दुःख से विलग हूँ" का क्या तात्पर्य है?
इस पंक्ति का तात्पर्य है कि 'आत्मा' किसी भी सांसारिक कर्म या भावना से अछूती रहती है। पाप-पुण्य, सुख और दुख केवल इस भौतिक शरीर और मन के अनुभव हैं। परम चेतना (आत्मा/शिव) इन सभी द्वंद्वों से पूरी तरह अलग (विलग) और मुक्त है।
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Deity: Shiv Ji
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