वैष्णवी भवानी माँ के, हाथों में जग की डोर (वैष्णो माता भजन) लिरिक्स
Vaishnavi Bhawani Maa Ke Hathon Mein Jag Ki Dor Lyrics Lyrics
वैष्णवी भवानी माँ के, हाथों में जग की डोर, माँ के ही संकेत पे हो, दिन, रैन, सांझ और भोर संसार का संचार है वैष्णो माता, संसार का आधार है वैष्णो माता। ममता रुपी सार है , वैष्णो माता , अपरम्पार है माँ की महिमा, अमिट है गाथा गौरव गरिमा | संसार का संचार है वैष्णो माता, संसार का आधार है वैष्णो माता।
नव देवी का रूप है माँ, महा शक्ति स्वरुप है माँ , पालनहारी है माँ त्रिकुटा , कहीं छाँव, कहीं धूप है माँ | रंग केसरिया माँ का बाना, सिन्दूरी रंग अंग सुहाना, संसार का संचार है वैष्णो माता, संसार का आधार है वैष्णो माता।
वैष्णवी भवानी माँ के हाथों में जग की डोर, वैष्णवी भवानी माँ के हाथों में जग की डोर। संसार का संचार है वैष्णो माता, संसार का आधार है वैष्णो माता।

अर्थ (Bhavarth)
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Frequently Asked Questions
Q1: 'वैष्णवी भवानी माँ के हाथों में जग की डोर' भजन का मुख्य भाव क्या है?
A1: यह भजन माता वैष्णो देवी को परब्रह्म और 'महाशक्ति' के रूप में स्थापित करता है। इसका मुख्य भाव यह है कि संसार की हर एक गतिविधि (दिन, रात, सुख, दुख) माता के ही नियंत्रण में है और वे ही इस पूरे ब्रह्मांड का मूल आधार हैं।
Q2: भजन में प्रयुक्त "पालनहारी है माँ त्रिकुटा" का क्या अर्थ है?
A2: माता वैष्णो देवी का पवित्र और विश्व-प्रसिद्ध दरबार जम्मू के कटरा में स्थित 'त्रिकुटा पर्वत' (Trikuta Mountains) की गुफा में विराजमान है। इसलिए उन्हें त्रिकुटा की वासिनी और पूरे संसार का पालन करने वाली 'पालनहारी' कहा गया है।
Q3: माता का चोला और स्वरूप कैसा बताया गया है?
A3: भजन की पंक्तियों ("रंग केसरिया माँ का बाना, सिन्दूरी रंग अंग सुहाना") के अनुसार, माता ने केसरिया रंग का वस्त्र (चोला) धारण किया है और उनका स्वरूप सिंदूरी रंग का, अत्यंत मनमोहक और अलौकिक है।
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Categories: Navratri Special, Mata Ke Bhajan
Deity: Mata Vaishno Devi
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मोहित तरकरMohit Tarkar
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