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गायत्री मंत्र (Gayatri Mantra) अर्थ और शब्दार्थ सहित

Gayatri Mantra Lyrics (Word-by-Word Meaning & PDF) Lyrics

तर्ज (Tune): पारंपरिक वैदिक मंत्र (Traditional Vedic Mantra)

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गायत्री मंत्र (Gayatri Mantra) अर्थ और शब्दार्थ सहित

GAYATRI MANTRA LYRICS WORD BY WORD MEANING PDF

ॐ भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्॥

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HINDI BHAJAN

ॐ भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्॥

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अर्थ (Bhavarth)

ॐ (Om): परब्रह्म, ईश्वर का सर्वश्रेष्ठ नाम। भूर्भुवः स्वः (Bhur Bhuva Swaha): भूः (प्राणस्वरूप/धरती), भुवः (दुःखनाशक/अंतरिक्ष), स्वः (सुखस्वरूप/स्वर्ग)। तत् (Tat): उस (That)। सवितुः (Savitur): सूर्य देव, प्रकाशमान, सम्पूर्ण जगत के रचयिता परमात्मा। वरेण्यं (Varenyam): वरण करने योग्य, सर्वश्रेष्ठ, अति पूजनीय। भर्गो (Bhargo): पापों का नाश करने वाला शुद्ध तेज़ (Divine illumination)। देवस्य (Devasya): देव का, परमात्मा का। धीमहि (Dheemahi): हम ध्यान करते हैं या धारण करते हैं। धियो (Dhiyo): बुद्धि (Intellect)। यो (Yo): जो (Who)। नः (Nah): हमारी (Our)। प्रचोदयात् (Prachodayat): प्रेरित करें, सन्मार्ग (सही रास्ते) पर ले चलें। संपूर्ण भावार्थ: हम उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, सर्वश्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा (सूर्य देव / गायत्री माता) का ध्यान करते हैं। वह परमात्मा हमारी बुद्धि (Intellect) को प्रकाशित करे और हमें सदैव सन्मार्ग (धर्म और सच्चाई के मार्ग) पर चलने के लिए प्रेरित करे।

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Frequently Asked Questions

Q1: गायत्री मंत्र के एक-एक शब्द का क्या अर्थ है (Word-by-Word Meaning)?

A1: 'तत्' यानी उस, 'सवितुः' यानी तेजस्वी सूर्य देव, 'वरेण्यं भर्गो' यानी सर्वश्रेष्ठ पापनाशक तेज़, 'धीमहि' यानी हम ध्यान करते हैं, 'धियो यो नः प्रचोदयात्' का अर्थ है कि वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग (सही रास्ते) पर चलने के लिए प्रेरित करे।

Q2: क्या मैं 'Gayatri Mantra PDF' अपनी क्षेत्रीय भाषा में डाउनलोड कर सकता हूँ?

A2: जी हाँ! आप इसी पेज पर मंत्र के ठीक ऊपर दिए गए 'Download PDF' और 'Translate' बटन पर क्लिक करके इसे अपनी मनपसंद भाषा (जैसे English, गुजराती, बंगाली आदि) में बिलकुल मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं।

Q3: गायत्री मंत्र (Om Bhur Bhuva Swaha) के रचयिता कौन हैं और इसका जाप कब करना चाहिए?

A3: ऋग्वेद के इस अत्यंत शक्तिशाली मंत्र के दृष्टा (रचयिता) महर्षि विश्वामित्र हैं। इसका जाप प्रातःकाल (सूर्योदय के समय), दोपहर या संध्याकाल में करना सर्वोत्तम माना जाता है। यह बुद्धि का विकास और मन को अपार शांति प्रदान करता है।

Categories: Mantra, Stotram

Deity: Saraswati

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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