बचपन की यारी बड़ी प्यारी, चले आना बांके बिहारी (राधा-कृष्ण भजन) लिरिक्स
Bachpan Ki Yaari Badi Pyari Chale Aana Banke Bihari Lyrics
तर्ज: लाला की सुनके मैं आई
बचपन की यारी बड़ी प्यारी, चले आना बांके बिहारी, बांके बिहारी मेरे रमण बिहारी, बचपन की यारी बड़ी प्यारी.....
जो कान्हा मेरो गांव ना जानो, बरसाने की फुलवारी चले आना बांके बिहारी, बचपन की यारी बड़ी प्यारी.....
जो कान्हा मेरो महल ना जानो, ऊंची हवेली सबसे न्यारी चले आना बांके बिहारी, बचपन की यारी बड़ी प्यारी.....
जो कान्हा मेरो नाम ना जानो, घर-घर में गूंजे राधा प्यारी चले आना बांके बिहारी, बचपन की यारी बड़ी प्यारी.....
जो कान्हा मेरा कमरा ना जानो, कमरे में लिखो राधा प्यारी चले आना बांके बिहारी, बचपन की यारी बड़ी प्यारी.....
जो कान्हा मेरा मंदिर ना जानो, दरवाजे खड़ी तुलसी प्यारी चले आना बांके बिहारी, बचपन की यारी बड़ी प्यारी.....
तेरे गोकुल में कान्हा कैसे आऊं, झाड़ी में उलझी रेशम साड़ी चले आना बांके बिहारी, बचपन की यारी बड़ी प्यारी.....

अर्थ (Bhavarth)
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Frequently Asked Questions
"बचपन की यारी बड़ी प्यारी" भजन का मुख्य भाव क्या है?
यह भजन 'ब्रज रस' पर आधारित है। इसमें श्री राधा रानी और भगवान कृष्ण (बांके बिहारी) के बचपन के निश्छल प्रेम (यारी) और उनकी मीठी मनुहार को दर्शाया गया है, जहाँ राधा जी कान्हा को बरसाने बुला रही हैं।
भजन में श्री राधा रानी ने अपने घर की क्या पहचान बताई है?
भजन के अनुसार, श्री राधा रानी ने अपने घर की पहचान बताते हुए कहा है कि मेरा घर बरसाने की सबसे ऊँची और न्यारी हवेली है, जिसके मंदिर के दरवाज़े पर तुलसी का पावन पौधा रखा हुआ है।
"तेरे गोकुल में कान्हा कैसे आऊं" पंक्ति में राधा रानी क्या उलाहना दे रही हैं?
इस पंक्ति में राधा रानी बहुत ही मासूमियत से कान्हा को उलाहना (शिकायत) दे रही हैं कि मैं तुमसे मिलने गोकुल इसलिए नहीं आ सकती क्योंकि रास्ते में कँटीली झाड़ियाँ हैं, जिनमें मेरी सुंदर 'रेशम की साड़ी' उलझ जाती है।
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मोहित तरकरMohit Tarkar
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